गांव को बर्बाद कर दिया मिलता तो कर देते सेंदरा

Updated at : 02 Mar 2017 5:07 AM (IST)
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गांव को बर्बाद कर दिया मिलता तो कर देते सेंदरा

गुड़ाझोर. ग्रामीणों में नक्सली राहुल के सरेंडर पर आक्रोश, कहा घाटशिला : गालूडीह थाना क्षेत्र के बाघुड़िया पंचायत अंतर्गत नक्सल प्रभावित गुड़ाझोर गांव के ग्रामीणों में सांसद हत्याकांड के मुख्य आरोपी प्रमुख नक्सली रंजीत पाल उर्फ राहुल के बंगाल में सरेंडर कर देने से आक्रोश है. पुरुष और महिलाओं ने दोषी को बंगाल में सरकारी […]

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गुड़ाझोर. ग्रामीणों में नक्सली राहुल के सरेंडर पर आक्रोश, कहा

घाटशिला : गालूडीह थाना क्षेत्र के बाघुड़िया पंचायत अंतर्गत नक्सल प्रभावित गुड़ाझोर गांव के ग्रामीणों में सांसद हत्याकांड के मुख्य आरोपी प्रमुख नक्सली रंजीत पाल उर्फ राहुल के बंगाल में सरेंडर कर देने से आक्रोश है. पुरुष और महिलाओं ने दोषी को बंगाल में सरकारी मेहमान बना कर रखने और इनाम देने पर अपनी नाराजगी जताते हुए बुधवार को गांव में प्रदर्शन किया. ग्रामीणों ने कहा कि यह कैसा कानून है. दोषी मारे मजा निर्दोषों को मिले सजा. नाराज ग्रामीणों ने कहा कि गांवों को बर्बाद कर देने वाला राहुल अगर मिल जाता तो सेंदरा कर देते. ऐसा आक्रोश कमोवेश बाघुड़िया और दलदली पंचायत के सभी गांवों के ग्रामीणों में है.
इसका कारण है कि इस क्षेत्र में वर्ष 2006 से 2016 तक राहुल का आंतक था. संतोष महतो, कृष्णा महतो, सांसद सुनील महतो, प्रभाकर महतो की हत्या इसी क्षेत्र में राहुल ने की. घटना के बाद पुलिसिया कार्रवाई में गांव के निदोंर्षों को जेल जाना पड़ा. प्रताडि़त हुए. जेल जाने वालों के परिवार और बच्चे बर्बाद हो गये. केस लड़ने में घर की मुर्गी, बकरी, बर्त्तन समेत अन्य
सामान बिक गये. कई परिवार ऐसे हैं जो नक्सली और पुलिस रूपी दो पाटों में पीस बर्बाद हो चुके हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जिसने इन घटनाओं को अंजाम दिया वह आज सरेंडर कर सरकारी मेहमान बन गया. जो लोग निदोंर्ष होते हुए भी जेल गये. अपना सब कुछ बर्बाद किया.
नक्सली घटना से प्रताड़ित होने वाले इस गांव के ग्रामीण का दर्द: बाघुडि़या में सांसद सुनील महतो हत्याकांड, केशरपुर में नासुस नेता संतोष महतो की हत्या के बाद गुड़ाझोर गांव के करीब एक दर्जन परिवारों पर कहर टूटा. इस गांव के ग्राम प्रधान रामचंद्र सिंह, सुबोध सिंह, अजीत सिंह, भूमिज सिंह, सुनील सिंह, भोटेल सिंह, बंकिम सिंह, कृष्णा सिंह आदि कई लोग हैं जिन्हें जेल जाना पड़ा. पुलिस उन्हें शक के निगाह से देखती. घर की तलाशी ली गयी. कई घरों की कुर्की हुई. तब भी निर्दोष ग्रामीणों पर पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ महिला समिति के बैनर तले जुलूस निकाला था. परंतु तब कोई कुछ सुनने को तैयार नहीं था.
सच सामने आया, क्या निर्दोषों को न्याय मिलेगा: गांव के हरिपद सिंह, मंगल सिंह, जगन्नाथ सिंह, भागीरथ सिंह, दशरथ सिंह, वार्ड मेंबर जोसना सिंह, सरला सिंह, पार्वती सिंह आदि ने कहा कि अब जब राहुल ने सरेंडर कर अपना दोष कबूल कर लिया. उनके साथ कौन थे. कब किसकी हत्या क्यों की. सभी
जानकारी दे दी तो अब क्या इस क्षेत्र के निर्दोषों को न्याय मिलेगा. हमने जो खोया क्या वह आपस मिलेगा. बीहड़ में रहने का मतलब ही शहरी लोग नक्सली मान बैठते हैं.
ग्रामीणों ने कहा, जिसने कई हत्याएं की और गांव को बर्बाद किया वह आज सरकारी मेहमान बना है
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