फर्श पर हो रहा जच्चा-बच्चा का इलाज

मुसाबनी : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं के अभाव में मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी रही है. कमरे तथा बेड के अभाव में सीएचसी में नवजात शिशु तथा प्रसूता को फर्श लेट कर अपना इलाज कराना पड़ता है. इस अस्पताल में संस्थागत प्रसव सुविधा लेने के लिए रोगी भरती होते हैं. प्रसव के बाद नियमानुसार […]
मुसाबनी : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं के अभाव में मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी रही है. कमरे तथा बेड के अभाव में सीएचसी में नवजात शिशु तथा प्रसूता को फर्श लेट कर अपना इलाज कराना पड़ता है.
इस अस्पताल में संस्थागत प्रसव सुविधा लेने के लिए रोगी भरती होते हैं. प्रसव के बाद नियमानुसार जच्चा-बच्चा को 48 घंटे सीएचसी में चिकित्सक की निगरानी में रखने का प्रावधान है. इसके बाद ही छुट्टी मिलती है. यहां छह बेड है. एक कमरे में सभी इंडोर रोगियों को रहने की व्यवस्था है.
महिला-पुरुष वार्ड अलग नहीं है. औसतन चार प्रसव प्रति दिन होते हैं. इसके कारण प्रसव के बाद नवजात शिशु एवं प्रसूता को बेड तत्काल नहीं मिल पाता है. फर्श पर लेट कर बेड के लिए इंतजार करना पड़ता है. प्रसव की संख्या बढ़ने के कारण बेड से अधिक रोगी होने पर फर्श में सो कर इलाज करना मजबूरी है. प्रभारी डॉ गोपी नाथ माहली के अनुसार सीएचसी में कमरे का अभाव है. रोगी बढ़ जाने से परेशानी होती है.
ऐसे में कभी बेड के बीच बेंच लगा कर तो कभी फर्श पर ही इलाज करना पड़ता है. उप प्रमुख रवींद्र नाथ घोष ने प्रशासन से सीएचसी में अतिरिक्त कमरे की व्यवस्था करने तथा बेड की संख्या बढ़ाने की मांग की है, ताकि जच्चा-बच्चा को फर्श पर लेट कर इलाज कराना ना पड़े. उन्होंने बंद पड़े सीओ आवास में वैकल्पिक व्यवस्था की मांग भी की.
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