खंडामौदा ओड़िया हाइस्कूल. तीन दिवसीय प्लेटिनम जुबिली कार्यक्रम आज से, राज्यपाल आयेंगीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 Mar 2016 5:27 AM (IST)
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1940 में छह आना से शुरू हुआ था विद्यालय स्कूल से पढ़े छात्र आज देश-विदेशों में उच्च पदों पर नौकरी कर रहे हैं. 34 एकड़ भू-भाग पर फैला स्कूल 75 साल से क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगा रहा है. बहरागोड़ा : गंधानाटा निवासी समाजसेवी तारा पदो षाड़ंगी और उनके सहयोगियों ने 1940 में छह […]
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1940 में छह आना से शुरू हुआ था विद्यालय
स्कूल से पढ़े छात्र आज देश-विदेशों में उच्च पदों पर नौकरी कर रहे हैं. 34 एकड़ भू-भाग पर फैला स्कूल 75 साल से क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगा रहा है.
बहरागोड़ा : गंधानाटा निवासी समाजसेवी तारा पदो षाड़ंगी और उनके सहयोगियों ने 1940 में छह आना से खंडामौदा ओड़िया हाई स्कूल की स्थापना की थी. यह स्कूल 75 वर्षों से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा दे रहा है. स्कूल से पढ़े छात्र आज देश-विदेशों में उच्च पदों पर नौकरी कर रहे हैं. 34 एकड़ भू-भाग पर फैला स्कूल लंबे समय से क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगा रहा है. 12 से 14 मार्च तक स्कूल का प्लेटिनम जुबिली समारोह आयोजित किया गया है.
इसलिए पड़ी हाई स्कूल की जरूरत
इस परिसर में 1937 में मध्य विद्यालय की स्थापना हुई थी. आसपास में ओड़िया हाई स्कूल नहीं होने से इस मवि से पास करने वाले विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई करने के लिए इस माध्यम का कोई हाई स्कूल नहीं था. इसलिए एक हाई स्कूल की जरूरत महसूस की गयी थी.
1967 में हुई थी रजत जयंती
इस विद्यालय का रजत जयंती समारोह 1967 में मनाया गया था. इस समारोह में मुख्य अतिथि डॉ राधानाथ रथ थे. समारोह में शिव चंडिका प्रसाद (एमपी), सर्वोदय आंदोलन की नेत्री रमा देवी समेत अन्य कई गणमान्य लोगों ने भाग लिया था. 1990 में इस विद्यालय ने अपना स्वर्ण जयंती समारोह मनाया. समारोह में लोक सभा के स्पीकर रवि राय, बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, ओड़िशा के संस्कृति मंत्री शरद कुमार कर और शिक्षा मंत्री सीपी माझी समेत कई अन्य गणमान्य लोग समारोह में शामिल हुए.
कई बने आइएएस, इंजीनियर और डॉक्टर: इस स्कूल के प्रथम बैच के छात्र गिरीश चंद्र पात्र, बाघराचुड़ा के मोती लाल महापात्रा आइएसएस बने. स्कूल के छात्र रहे प्रो रामदास मरांडी, प्रो गौरी पद त्रिपाठी, प्रो दीपक षाड़ंगी प्राध्यापक बने. डॉ कालिपद पांडा, डॉ वारिद जाना, डॉ आदित्य त्रिपाठी डॉक्टर, हरिहर त्रिपाठी, विजय जाना, संजय मिश्र (अमेरिका), नारायण माइती, अरुण भुई इंजीनियर और डॉ उमा शंकर सतपति वैज्ञानिक, रेल प्रशासनिक सेवा में अनूप सतपति और नालको में श्रीनाथ होता उच्च पदाधिकारी, दिलिप षाड़ंगी, दिवाकर सतपति, आरएन सतपति, केपी भगत अधिवक्ता बने.
स्कूल में पढ़े दो छात्र बलराम रथ व अनदा प्रसाद महापात्र को आदर्श शिक्षक के रूप में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. विधायक कुणाल षाड़ंगी ने भी इसी विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा पास की है. सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा है स्कूल: स्कूल पिछले कई वर्षों से सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा है. 11 की बजाय सिर्फ चार शिक्षक ही कार्यरत हैं. कई विषयों के शिक्षक नहीं है. आदिवासी बाल छात्रावास उपेक्षा से बंद हो गया है. स्कूल परिसर की चहारदीवारी नहीं है.
नहीं मिला प्लस टू का दर्जा: इस स्कूल को आज तक प्लस टू स्कूल का दर्जा नहीं मिला. जबकि इसके लिए ओड़िशा तथा बिहार सरकार का एकरारनामा हुआ था और बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दायर किया था.
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