ड्यूटी से नदारद 10 डॉक्टर सहित 27 कर्मचारियों को नोटिस, वेतन रोकने का निर्देश

हॉस्पिटल सांकेतिक तस्वीर. (AI Image)
जमशेदपुर में मलेरिया-डेंगू के बीच ड्यूटी से नदारद 10 डॉक्टरों सहित 27 स्वास्थ्य कर्मियों को सिविल सर्जन ने नोटिस जारी कर वेतन रोकने का निर्देश दिया है।
संवाददाता, जमशेदपुर/घाटशिला
पूर्वी सिंहभूम जिले में पैर पसार रही मलेरिया और डेंगू जैसी घातक बीमारियों के बीच स्वास्थ्य विभाग में बड़ी लापरवाही सामने आयी है. ड्यूटी से नदारद रहने वाले 10 डॉक्टरों, एएनएम और लैब टेक्नीशियन सहित कुल 27 स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी किया है. उनका एक दिन का वेतन रोकने का निर्देश दिया है. सभी आरोपियों को 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है. जवाब संतोषजनक नहीं होने पर सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) के लिए राज्य मुख्यालय को लिखा जायेगा.
औचक निरीक्षण में खुली पोल, चार टीमों ने की छापेमारी
जिले में सोमवार को निरीक्षण के दौरान कई शहरी स्वास्थ्य केंद्र बंद पाये गये थे. इसके बाद मंगलवार को सिविल सर्जन के निर्देश पर पूरे शहर में एक साथ चार विशेष टीमों का गठन कर विभिन्न शहरी स्वास्थ्य केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया. मदर टेरेसा एडवांस हेल्थ क्लिनिक, शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (लक्ष्मीनगर व मानगो) में बड़े पैमाने पर लापरवाही मिली. ड्यूटी गायब रहने वालों में 10 डॉक्टर, 4 एएनएम, 3 लैब टेक्नीशियन, 1 फार्मासिस्ट, 1 जीएनएम, 3 सहायक कर्मचारी, 1 होम गार्ड, 2 एमपीडब्ल्यू और 2 सुरक्षा गार्ड शामिल हैं. लक्ष्मीनगर पीएचसी के डॉ. जितेंद्र कुमार का भी एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया गया है.
दो डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति हुई
डॉ. नाजिर अंसारी को शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर हनिफिया (मानगो) से हटाकर अगले आदेश तक सदर अस्पताल भेजा गया. सदर अस्पताल (डीइआइसी) के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आर.एन. तिवारी को अगले आदेश तक सदर अस्पताल में मुख्य रूप से कार्य करने को कहा गया है.
सिविल सर्जन ने क्या कहा
जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मलेरिया का फैलाव स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशासनहीनता का नतीजा है. जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा. यदि आगे भी कोई केंद्र बंद मिला या कोई कर्मी बिना अनुमति गायब पाया गया, तो सीधे बर्खास्तगी की कार्रवाई होगी. - डॉ. साहिर पाल, सिविल सर्जन, पूर्वी सिंहभूम
अधिकतर मरीज मलेरिया, तेज बुखार, बदन दर्द से पीड़ित
मौसम में अचानक आये बदलाव के कारण जमशेदपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम की इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी है. स्थिति इतनी गंभीर है कि अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के सभी बेड और स्ट्रेचर पूरी तरह फुल हो चुके हैं. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राघवेंद्र ने बताया कि ओपीडी और इमरजेंसी में आने वाले अधिकतर मरीज मलेरिया, तेज बुखार, बदन दर्द और बच्चों में वायरल फीवर से पीड़ित हैं. अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने बताया कि डॉक्टरों को अलर्ट मोड पर रखा गया है. जरूरी दवाएं उपलब्ध करा दी गयी हैं. भीड़ कम करने के लिए डॉक्टरों को निर्देश दिया गया है कि जिन मरीजों की स्थिति में थोड़ा भी सुधार हो, उन्हें तुरंत जनरल वार्ड में शिफ्ट करें ताकि इमरजेंसी में नये मरीजों के लिए बेड खाली हो सकें.
घाटशिला अनुमंडल अस्पताल में रोज मिल रहे 8-10 मलेरिया मरीज
प्रखंड में हर दिन हो रही 1000 जांचबारिश के मौसम की शुरुआत के साथ घाटशिला अनुमंडल अस्पताल, विभिन्न सीएचसी और पीएचसी में मरीजों की कतारें लग रही हैं. अनुमंडल अस्पताल में रोजाना 130 से 140 मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि पूरे प्रखंड में हर दिन लगभग 1000 लोगों की मलेरिया जांच किट के माध्यम से की जा रही है. अस्पताल प्रभारी डॉ. आर एन सोरेन ने बताया कि जांच के दौरान प्रतिदिन औसतन 8 से 10 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाये जा रहे हैं, जिनका तुरंत इलाज शुरू किया जा रहा है.
स्टाफ की भारी कमी, सर्वे व जांच कार्य प्रभावित
डॉ. सोरेन ने बताया कि क्षेत्र में मलेरिया फैलने के बावजूद फील्ड स्तर पर काम करने वाले एमपीडब्ल्यू (की भारी कमी है. स्वीकृत 7 पदों के मुकाबले केवल 5 एमपीडब्ल्यू ही कार्यरत हैं, जिससे सर्वे और जांच का काम प्रभावित हो रहा है. 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस पर अस्पताल पहुंचे स्थानीय विधायक सोमेश चंद्र सोरेन को इस कमी से अवगत कराया गया था, जिन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से बात कर जल्द ही सभी रिक्त पदों को भरने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने का भरोसा दिया है.
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