मैं गवर्नर विद द डिफरेंस हूं, ‘इस्कॉन’ के कार्यक्रम में बोलीं राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Aug 2017 12:56 AM

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जमशेदपुर : झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने खुद को ‘गवर्नर विद दे डिफरेंस’ बताया है. उन्होंने कहा, ‘राज्य के पूर्व राज्यपालों के साथ ही अन्य राज्यपालों को भी जानती हूं, जो कॉलेज-यूनिवर्सिटी के कार्यक्रमों में ही मुख्य रूप से शिरकत करते थे, लेकिन मैं गर्वनर विद द डिफरेंस हूं. मैं समाज के अंतिम व्यक्ति […]

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जमशेदपुर : झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने खुद को ‘गवर्नर विद दे डिफरेंस’ बताया है. उन्होंने कहा, ‘राज्य के पूर्व राज्यपालों के साथ ही अन्य राज्यपालों को भी जानती हूं, जो कॉलेज-यूनिवर्सिटी के कार्यक्रमों में ही मुख्य रूप से शिरकत करते थे, लेकिन मैं गर्वनर विद द डिफरेंस हूं. मैं समाज के अंतिम व्यक्ति की समस्या से द्रवित हो जाती हूं. यही कारण है कि अक्सर मैं अस्पताल व छोटे-छोटे स्कूल का दौरा करती हूं अौर बच्चों को मोटिवेट करती हूं.’

राज्यपाल ने कहा कि झारखंड में प्राकृतिक संपदा तो खूब है, लेकिन मानव संपदा की स्थिति अच्छी नहीं है. मंगलवार को जमशेदपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में 26 फीसदी लोग आदिवासी हैं और इतनी बड़ी आबादी में 75 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं.

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राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने बिष्टुपुर स्थित रामदास भट्टा में मिड डे मिल तैयार करने वाली एजेंसी ‘इस्कॉन’ की अोर से आयोजित के दौरान कहा, ‘झारखंड की धरती में सोना है. यहां खनिज संपदा, भू संपदा, प्राकृतिक संपदा है लेकिन मानव संपदा की स्थिति अच्छी नहीं है. यही वजह है कि झारखंड राज्य तो अमीर है लेकिन यहां के लोग गरीब हैं. झारखंड की कुल आबादी का 26 फीसदी लोग अादिवासी हैं. अलग-अलग कुल 32 प्रकार की आदिवासी जातियां झारखंड में निवास कर रही हैं. लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि इतनी बड़ी आबादी के करीब 75 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं.’

हालांकि राज्यपाल ने यह भी कहा कि मानव संपदा के विकास के लिए सरकार काम कर रही है और उन्हें यह उम्मीद है कि एक दिन झारखंड देश का नंबर वन राज्य होगा. उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति ठीक नहीं है और इसको सुधारने के लिए सरकार के साथ-साथ आम लोगों को भी आगे आने की जरूरत है.

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इससे पूर्व कार्यक्रम में राज्यपाल का भव्य स्वागत किया गया. राज्यपाल ने इस्कॉन के सेंट्रल किचन का निरीक्षण कर देखा कि वहां किस तरह बच्चों के लिए हाइजेनेक तरीके से मिड डे मिल तैयार किया जाता है.

जैसा खायेंगे अन्न, वैसा होगा मन : अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने इस्कॉन की सराहना की अौर कहा कि यह माना जाता है कि हम जैसा अन्न खायेंगे वैसा ही हमारा मन होगा अौर जैसा हमारा मन होगा वैसा ही ज्ञान होगा. उन्होंने आह्वान किया कि सही भोजन ही करना चाहिए.

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सर्टिफिकेट मिल जाता है लेकिन कोई जानकारी नहीं होती : राज्यपाल ने सरकारी स्कूल के बच्चों की नींव मजबूत करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि बच्चों की ज्यादा से ज्यादा उपस्थिति बढ़े अौर आनंददायक माहौल में बच्चों को पढ़ाई करवायी जाये, इसका प्रयास होना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘स्कूलों में इस प्रकार की शिक्षा दी जाये, जिससे ना सिर्फ बच्चों को पास होने के बाद सर्टिफिकेट मिले बल्कि उन्हें वास्तव में कुछ जानकारी भी हो.’ उन्होंने आधुनिक खेती की दिशा में भी आगे बढ़ने पर बल दिया.

इस्कॉन अब हुआ ‘अन्नमृता’ : कार्यक्रम के दौरान इस्कॉन के ट्रस्टी सह वीपी संजय टिकू ने घोषणा की कि इस्कॉन का नाम बदल कर ‘अन्नमृता’ कर दिया गया है. संजय टिकू ने अपने भाषण के दौरान बताया कि वर्ष 2004 में उन्होंने फूड फॉर लाइफ से इस अभियान की शुरुआत की थी, जिसमें सबसे पहले 900 बच्चों को खाना खिलाया जाता था. इसके बाद इसका विस्तार कर 5000 बच्चों को खिलाने के लिए एक ट्रस्ट बनाया जिसका नाम इस्कॉन दिया गया. इस ट्रस्ट के जरिये फिलहाल देश के 8 राज्यों के कुल 12 लाख बच्चों को प्रतिदिन मिड डे मील दिया जा रहा है. वर्ष 2012 में झारखंड में जमशेदपुर से इसकी शुरुआत हुई थी. जमशेदपुर में प्रतिदिन 374 स्कूलों के करीब 49000 बच्चों के लिए सेंट्रल किचन में मिड डे मील बनता है.

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रांची, खूंटी, धनबाद, चाईबासा समेत अन्य जिलों में शुरू होगा सेंट्रल किचन : जमशेदपुर में सेंट्रल किचन की सफलता को देखते हुए इसे राज्य के दूसरे जिलों में भी शुरू करने की योजना है. इसके लिए सरकार व इस्कॉन की बात-चीत हो चुकी है. टिकू ने बताया कि रांची, चाईबासा व धनबाद में सेंट्रल किचन शुरू करने के लिए जगह भी मिल गयी है. साथ ही हजारीबाग व खूंटी में भी इसके लिए प्रयास किया जा रहा है. कई अन्य जिलों में इसे शुरू किया जायेगा.

प्रतिदिन 300 रुपये खर्च कर बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालेंगे : इस्कॉन के ट्रस्टी सह वीसी संजय टिकू ने अपने अभिभाषण के दौरान कहा कि कुपोषण ना सिर्फ झारखंड के लिए बल्कि पूरे देश के लिए बड़ी समस्या है. एक आंकड़े के अनुसार भारत के एक करोड़ बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. इससे निबटने के लिए यूनिसेफ व डब्ल्यूएचअो द्वारा संयुक्त रूप से प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि यूआरटीएस एक प्रकार का फूड सप्लीमेंट है जो एक पैकेट में 93 ग्राम रहता है. इसे दिन भर में अगर दो बार किसी कुपोषित बच्चे को दिया जाये, तो वह मात्र 75 दिनों में कुपोषण से बाहर निकल सकते हैं. उन्होंने बताया कि एक पैकेट की कीमत 150 रुपये होती है.

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