देश को विश्व गुरु बनाने के लिए ज्ञान परंपरा का संरक्षण जरूरी : डॉ अमर

Published by : RAKESH KUMAR Updated At : 08 Apr 2025 11:39 PM

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एएन कॉलेज दुमका के प्राचार्य डॉ संजय कुमार सिंह के निर्देश पर छात्र- छात्राओं में कौशल विकास के उद्देश्य से मंगलवार को आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ तथा मानविकी संकाय से भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में साहित्य एवं समाज की भूमिका विषय पर अंतरविभागीय सेमिनार का आयोजन किया गया.

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दुमका. एएन कॉलेज दुमका के प्राचार्य डॉ संजय कुमार सिंह के निर्देश पर छात्र- छात्राओं में कौशल विकास के उद्देश्य से मंगलवार को आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ तथा मानविकी संकाय से भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में साहित्य एवं समाज की भूमिका विषय पर अंतरविभागीय सेमिनार का आयोजन किया गया. जैक सदस्य एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ अमर नाथ सिंह ने भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन को वर्तमान और भविष्य की जरूरत बताया. उन्होंने नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में महत्त्व देने की भी जानकारी छात्र – छात्राओं से साझा की. आयोजन सचिव एवं बांग्ला विभागाध्यक्ष डॉ प्रदीप कुमार गोराई ने प्राध्यापक व छात्र-छात्राओं का स्वागत करते मंच संचालन किया. प्रतिभागियों को मूल विषय वस्तु से रूबरू कराया. मानविकी संकाय के विद्वान वक्ताओं में अंग्रेजी विभाग से विभागाध्यक्ष डॉ प्रमोद कुमार झा ने विश्व स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से भारत कैसे नेतृत्व करे उससे प्रतिभागियों को अवगत कराया. इसमें साहित्य व समाज की भूमिका पर विस्तृत प्रकाश डाला. हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ अनहद लाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण व संवर्धन के लिए हिंदी भाषा एवं साहित्य के महत्त्व की विस्तार से चर्चा की. हिंदी के अधिकाधिक उपयोग पर जोर देने की अपील छात्र-छात्राओं से की. मौके पर संताली विभागाध्यक्ष प्रो सोम मुर्मू ने संताल परगना में संताली भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला. भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण के विभिन्न पहलुओं को बताया. परसियन विभाग से प्रो इस्लामुद्दीन ने शेरो शायरी के माध्यम से उर्दू एवं परसियन भाषा के महत्व के बारे में बताया. संस्कृत विभाग की ओर से प्रो रामजीवन झा एवं डॉ संजय कुमार पाठक ने सेमिनार की विषय वस्तु पर अपने-अपने व्याख्यान बड़े ही ज्ञानवर्धक व रोचक श्लोक के माध्यम से प्रस्तुत किया. भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में साहित्य एवं समाज की भूमिका पर प्रकाश डाला. सेमिनार में भाग लेनेवाले प्राध्यापकों में डॉ अमरकांत पोद्दार, प्रो कुमार मनोज, प्रो सुलेमान हांसदा, डॉ मनोज कुमार, प्रो प्रवीण कुमार सिंह, प्रो सुशील चंद्र चौधरी, प्रो नीरज झा एवं शिक्षकेतरकर्मियों में अमरेंद्र कुमार, मिथिलेश कुमार, धीरज सिंह, रणवीर सिंह, अंजू गुप्ता आदि मुख्य थे. सेमिनार में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे. सेमिनार के प्रारंभ में डॉ संजय कुमार पाठक ने मंगलाचरण पाठ किया. अंत में प्रो रामजीवन झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया. कॉलेज में इन दिनों राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद से द्वितीय चक्र की अच्छी ग्रेडिंग प्राप्ति के लिए कॉलेज प्रबंधन द्वारा एसएसआर जमा करने की तैयारी जोरों पर है. इसके लिए कॉलेज परिवार के सभी सदस्य जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं. इन दिनों कॉलेज की खूबसूरती देखते ही बनती है. ज्ञात हो की कॉलेज ने नैक ग्रेडिंग के प्रथम चक्र में बी प्लस ग्रेड प्राप्त किया था.

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