झारखंड के संताल अकादमी में संंताली स्पोकेन कोर्स का हुआ शुभारंभ, भाषा जानने का मिलेगा अवसर

Updated at : 08 Nov 2022 11:06 AM (IST)
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झारखंड के संताल अकादमी में संंताली स्पोकेन कोर्स का हुआ शुभारंभ, भाषा जानने का मिलेगा अवसर

संताल अकादमी द्वारा चलाये जानेवाले 90 दिनों की आधारभूत बोलचाल संताली पाठ्यक्रम की शुरुआत की गयी. कुलपति ने कहा कि संताल परगना के संदर्भ में संताली रीढ़ की हड्डी है. बहुत सारे लोग संताली भाषा सीखना चाहते हैं, लेकिन उनको अवसर नहीं मिल पाता है. उनकी संताली भाषा सीखने की सपने साकार होगा.

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Dumka News: सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की इकाई संताल अकादमी में सोमवार से संताली स्पोकेन कोर्स का शुभारंभ कर दिया गया. कुलपति प्रोफेसर (डॉ) सोनाझरिया मिंज की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में संताल अकादमी द्वारा चलाये जानेवाले 90 दिनों की आधारभूत बोलचाल संताली पाठ्यक्रम की शुरुआत की गयी. कुलपति ने कहा कि संताल परगना के संदर्भ में संताली रीढ़ की हड्डी है. बहुत सारे लोग संताली भाषा सीखना चाहते हैं, लेकिन उनको अवसर नहीं मिल पाता है. इसलिए पाठ्यक्रम के शुरू होने से हमलोगों ने सबको अवसर प्रदान किया है. उनकी संताली भाषा सीखने की सपने साकार होगा.

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ धुनी सोरेन ने कहा कि मुझे मेरी मातृभूमि की सौगंध लिवरपूल इंग्लैंड से यहां खींचकर ले आती हैं. मातृभाषा और मातृभूमि से बढ़कर मेरे लिए कोई प्रेम नहीं हो सकता. यह प्रयास काफी सफल साबित होगा. संताली भाषा विकसित होगी. उन्होंने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है. किसी भी उम्र में आप सीख सकते हैं. इसलिए जो भी लोग संताली भाषा नहीं जानते हैं, उनके लिए सुनहरा अवसर है. वह आसानी से संताली सीख सकते हैं.

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संताली को पहचान देने की जरूरत: प्रतिकुलपति

विशिष्ट अतिथि प्रतिकुलपति डॉ विमल प्रसाद सिंह ने मधुबनी पेंटिंग का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह से मधुबनी पेंटिंग विश्वविख्यात पेंटिंग बन चुकी है. इसी तरह से संताली भाषा और संस्कृति को भी विशिष्ट पहचान देने की जरूरत है. केवल बोलचाल की भाषा तक ही इसको सीमित नहीं करना है. बल्कि अंतरराष्ट्रीय लेवल पर पहुंचना है. संताली भाषा में अनुवाद का काम भी शुरू किया जाना चाहिए. कुलसचिव डॉ संजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मातृभाषा और मातृभूमि से सबको प्यार करना चाहिए. पाठ्यक्रम शुरू होने से संताली बोलने के लिए हमारे जैसे लोगों को आसानी होगी. वे भी इस क्षेत्र के पुत्र हैं, लेकिन स्थानीय संताली भाषा सीखने से वंचित रह गये थे, अब वह सपना पूरा होगा. कार्यक्रम में छात्रा कल्याण अधिष्ठाता डॉ संजय कुमार सिंह ने कहा कि इस तरह की पहल से संताल अकादमी पुनः पुनर्जीवित होकर आगे बढ़ रही है. इसका फायदा संताल परगना के लोगों को निश्चित रूप से मिलेगा. इसका प्रचार प्रसार अधिक से अधिक किया जाना चाहिए, ताकि लोग इसका लाभ ले सकें.

पाठ्यक्रम पर हुई परिचर्चा

कार्यक्रम में स्वागत भाषण संताल अकादमी की उपाध्यक्ष डॉ सुमित्रा हेम्ब्रम ने दिया. पाठ्यक्रम पर परिचर्चा व परिचय डॉ चंपावती सोरेन ने रखी. डॉ सोरेन ने परिचर्चा में कहा कि पाठ्यक्रम के शुरुआत से संताली बोलने वाले की संख्या में इजाफा होगी. लोगों को आसान तरीके से सीखने में मौका मिलेगा. मंच का संचालन डॉ इग्नाशियस मरांडी ने किया. कार्यक्रम में संताल अकादमी के सचिव डॉ सुशील टुडू, परीक्षा नियंत्रक डॉ जय कुमार साह, सीसी डीसी डॉ विजय सर, डॉ शर्मिला सोरेन, डॉ विनय कुमार सिंह, डॉ शंभू कुमार सिंह, डॉ विनोद कुमार शर्मा, डॉ राजीव रंजन सिन्हा, प्रो होलिका मरांडी, डॉ स्वतंत्रता सिंह, निर्मल मुर्मू, प्रो बास्की नीरज, डॉ विनोद मुर्मू, प्रो अमित मुर्मू सैकड़ों छात्र-छात्रा उपस्थित थे. कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुशील टुडू ने किया.

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