मुख्यमंत्री कृषि यांत्रिकरण योजना का राज्यादेश निकला, दुमका व साहेबगंज में बंटेंगे सबसे अधिक ट्रैक्टर

Updated at : 13 Dec 2020 12:45 PM (IST)
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मुख्यमंत्री कृषि यांत्रिकरण योजना का राज्यादेश निकला, दुमका व साहेबगंज में बंटेंगे सबसे अधिक ट्रैक्टर

मुख्यमंत्री कृषि यांत्रिकरण योजना का राज्यादेश निकाल दिया गया, इसके मुताबिक सबसे अधिक कृषि यंत्र और मिनी ट्रैक्टर का वितरण साहेबगंज और दुमका जिले में किया जायेगा.

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रांची : मुख्यमंत्री कृषि यांत्रिकरण योजना का राज्यादेश निकाल दिया गया है. इसके अनुसार सबसे अधिक कृषि यंत्र और मिनी ट्रैक्टर का वितरण साहेबगंज और दुमका जिले में किया जायेगा. दोनों जिलों में 32-32 ट्रैक्टर व कृषि उपकरण बांटने की योजना है. सरकार इस पर कुल 90 फीसदी अनुदान दे रही है. तीसरे नंबर पर रांची का स्थान आता है. कृषि विभाग ने 425 यूनिट मिनी ट्रैक्टर व अन्य यंत्र बाटने की लक्ष्य रखा है. इस पर करीब 18 करोड़ रुपये खर्च होने हैं.

पूरे राज्य में करीब 165 यूनिट पावर टिलर भी बांटे जायेंगे. इस पर सात करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस स्कीम पर 80 फीसदी अनुदान होगा. इस योजना का नोडल एवं नियंत्री पदाधिकारी निदेशक भूमि संरक्षण होंगे. झारखंड एग्रीकल्चर मशीनरी एवं टूल्स ट्रेनिंग सेंटर (जेएएमटीटीसी) को योजना कार्यान्वयन एजेंसी बनाया गया है. निदेशक भूमि संरक्षण योजना की एक मुश्त राशि निकालकर जेएएमटीटीसी के खाते में जमा करा देंगे.

पूर्व मंत्री ने योजना के स्वरूप बदलने को साजिश बतायी :

वर्तमान विधायक सह पूर्व कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने स्कीम के संचालन की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाया है. उन्होंने इस मामले में मुख्य सचिव सुखदेव सिंह को पत्र लिखा है. विभागीय सचिव की भूमिका पर भी सवाल उठाया है. लिखा है कि सचिव ने खुद एक पत्र निकाला था कि केवल निदेशालय से आये प्रस्ताव पर ही स्कीम तैयार होगी. लेकिन उन्होंने एक ट्रेनिंग एजेंसी के प्रस्ताव पर 25 करोड़ रुपये का राज्यादेश निकाल दिया.

रणधीर सिंह ने लिखा है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में चार माह बचे हैं. योजना अभी शुरू भी नहीं हुई है तथा राशि पीएल खाते में डाल देने को कहा गया है. ऐसा तब होता है जब मार्च के अंत में विभाग खर्च नहीं कर पाता है. यह सरकार के वित्तीय नियमों के विरुद्ध है. बिना कैबिनेट के अनुमोदन के एेसी संस्था को काम दे दिया गया है, जिसका रांची छोड़ कहीं कोई कार्यबल नहीं है. इसी संस्था को आपूर्तिकर्ता को सूचीबद्ध करने के लिए अधिकृत किया गया है. जबकि संस्था के बायलॉज में इस तरह के किसी कार्य का जिक्र नहीं है. पूरा मामला देख कर लगता है कि विभाग ने अपने प्रिय पात्र और एजेंसी को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया है.

posted by : sameer oraon

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