Dumka: 250 बच्चों के सिर पर टपकती छत और सिर्फ 5 चालू टॉयलेट, आदिवासी छात्रावास की दास्तां सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे

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आदिवासी छात्रावास की समस्या बताते छात्र दरबारी हेंब्रम. फोटो: प्रभात खबर

दुमका के एसपी कॉलेज के आदिवासी कल्याण छात्रावास में 250 छात्र जर्जर भवन में रहने को मजबूर हैं। छत से पानी टपकता है, टॉयलेट और पेयजल की भारी कमी है, जिससे उनकी जान और पढ़ाई दोनों खतरे में है।

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दुमका से ऑगस्टिन हेंब्रम की रिपोर्ट

Dumka News: झारखंड में दुमका स्थित एसपी कॉलेज के आदिवासी कल्याण छात्रावास नंबर-5 में रहने वाले 250 छात्र जर्जर भवन में कैद हैं. 1984 में बने इस भवन की छत और दीवारों का प्लास्टर जगह-जगह झड़ रहा है और बारिश में छत से पानी टपकता है, जिससे छात्रों को रात-दिन भय सताता है. इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है. बच्चों के अनुसार, वे हर पल खतरे के साये मेंरहने को मजबूर हैं .

9 बाथरूम में नहाते हैं 250 बच्चे

छात्रावास के छात्रनायक दरबारी हेम्ब्रम का कहना है, "छात्रावास में 14 शौचालय हैं, जिसमें पांच ही शौचालय उपयोग के लायक है, बाकी ख़राब हो चुका है. 250 छात्रों के लिए नौ बाथरुम में बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है."

पेयजल संकट बड़ी समस्या

सहायक छात्र नायक रंजित मुर्मू ने बताया, "छात्रावास में रह रहे सैकड़ों छात्रों के समक्ष पेयजल एवं दैनिक उपयोग के लिए जल संकट उत्पन्न हो गया है. बोरिंग की कमी है, पीने की सप्लाई पानी की कमी है, वाटर फिल्टर मशीन है लेकिन सब ख़राब हो चुका है."

धंस गई है रसोईघर की जमीन

छात्र भीमसेंट सोरेन का कहना है, "रसोईघर पुरी तरह जर्जर हो चुका है, रसोईघर के जमीन धंसने के कारण रसोईया को खाना बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है."

कंप्यूटर से लेकर झाड़ू तक की कमी

छात्र ईश्वर हेम्ब्रम ने बताया, "छात्रावास में कम्प्यूटर की आवश्यकता है, जिसमें छात्रों को कोई भी प्रपत्र भरने में सुविधा होगी. छात्रावास में दैनिक उपयोग की जरूरी सामाग्री भी विभाग से उपलब्ध नहीं करायी जा रही है, इनमें झाड़ू, कुर्सी, टेबूल, डाइनिंग टेबल व खेल सामाग्री शामिल हैं."

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बार-बार आवेदन के बावजूद मिला सिर्फ आश्वासन

छात्र नेता डॉ श्याम देव हेंब्रम ने कहा, "हम लोग पानी की समस्या को लेकर कई बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ भी नहीं मिला है." उन्होंने बताया कि परीक्षा नजदीक होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है. छात्रों ने जिला कल्याण पदाधिकारी से प्राथमिकता के आधार पर नई मोटर लगवाने और बोरिंग कराने की मांग की है, ताकि पेयजल व्यवस्था सुचारू हो सके और 250 छात्रों को इस नर्क से राहत मिल सके.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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