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राजयोग ध्यान से नशामुक्त समाज का निर्माण संभव: डॉ पीयूष

Updated at : 16 Apr 2025 6:32 PM (IST)
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राजयोग ध्यान से नशामुक्त समाज का निर्माण संभव: डॉ पीयूष

डॉन बॉस्को वीटीआइ दुमका में हुआ व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम

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डॉन बॉस्को वीटीआइ दुमका में हुआ व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम संवाददाता, दुमका: दुमका के डॉन बॉस्को वीटीआइ में आयोजित दो दिवसीय व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम में 160 युवाओं ने भाग लिया. इस कार्यक्रम में फूलो झानो मेडिकल कॉलेज के फिजियोलॉजिस्ट डॉ. पीयूष रंजन ने युवाओं को नशा और तकनीक के दुरुपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया. उन्होंने कहा कि आज के युवा नशीले पदार्थों के साथ-साथ मोबाइल, इंटरनेट, सोशल मीडिया जैसे तकनीकी माध्यमों के भी शिकार हो रहे हैं. उन्होंने युवाओं को राजयोग ध्यान के महत्व से अवगत कराते हुए बताया कि इससे इंद्रियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है और नशे के प्रति स्वाभाविक घृणा उत्पन्न होती है. आत्मा के मूल गुण जैसे प्रेम, सुख, शांति, आनंद, ज्ञान, शक्ति और पवित्रता जागृत होने लगते हैं, जो शुद्ध और संपूर्ण व्यक्तित्व विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं. डॉ. पीयूष ने बताया कि बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, गांजा, भांग जैसी पारंपरिक नशीली चीजों के साथ-साथ एलोपैथिक दवाओं जैसे गैस, दर्द की दवाएं और खांसी की सिरप की भी लत लग सकती है. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, मोबाइल गेम्स और टीवी आदि का अत्यधिक प्रयोग भी एक प्रकार की लत है, जो बाद में साइबर क्राइम जैसी समस्याओं को जन्म देता है. दूसरे दिन के सत्र में डॉ. पीयूष ने नशा से बचाव के उपाय बताते हुए युवाओं को पॉजिटिव एक्टिविटी में व्यस्त रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि खेल, नृत्य, संगीत, योग और ध्यान जैसी गतिविधियों को जीवन में शामिल करने से नकारात्मक प्रवृत्तियों से बचा जा सकता है. उन्होंने राजयोग मेडिटेशन को आत्मा के लिए भोजन की तरह बताया और उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार गाड़ी के संचालन के लिए ड्राइवर जरूरी होता है, उसी तरह शरीर को चलाने वाली आत्मा का पोषण भी आवश्यक है. यदि आत्मा भूखी होगी तो वह ग़लत निर्णय लेगी, जिससे क्रोध, ईर्ष्या, घमंड, चिड़चिड़ापन, उदासी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं. डॉ. पीयूष ने जोर देकर कहा कि आत्मा का भोजन ध्यान है, जो परमात्मा के साथ दोतरफा संचार विकसित करता है. इसके लिए शुद्ध, स्वच्छ और सात्विक भोजन आवश्यक है, जो आत्मा की शक्तियों को जाग्रत करता है. कार्यक्रम के अंत में बीके जयमाला ने मुरगुनी की सिस्टर रीता तिग्गा, फादर कार्लोस और वीटीआई निदेशक संजय राय की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों से ही दुमका को नशामुक्त बनाया जा सकता है. सत्र के समापन पर बीके रेखा ने सभी युवाओं को नशा से दूर रहने और समाज में दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलायी. मौके पर बीके अर्जुन, डेनियल, बिनोद और आलोक ने भी अपना योगदान दिया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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