दुमका में कृषि मंत्री ने 1329 किसानों के बीच किया 160 क्विंटल गेहूं बीज का वितरण

Updated at : 14 Dec 2023 4:38 AM (IST)
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दुमका में कृषि मंत्री ने 1329 किसानों के बीच किया 160 क्विंटल गेहूं बीज का वितरण

आत्मा के परियोजना निदेशक संजय कुमार मंडल ने बताया कि विभाग की ओर से रबी फसल की बीजों का वितरण किया गया. सभी किसान फसल को लगाने के पूर्व बीज उपचार अवश्य करें.

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दुमका : जरमुंडी प्रखंड मुख्यालय में बुधवार को आत्मा दुमका के तत्वावधान में कृषक गोष्ठी सह बीज वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के मंत्री बादल पत्रलेख ने कृषकों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार एवं कृषि विभाग के सकारात्मक पहल पर इस वर्ष राज्य के सभी जिलों में किसानों के बीच गेहूं बीज समय से पूर्व ही उपलब्ध करा दिया गया है. कृषकों को आत्मा की ओर से 80 फीसदी अनुदान पर कृषि यंत्र का वितरण किया जा रहा है. इन कृषि यंत्रों के माध्यम से कृषक उन्नत तरीके से कृषि का कार्य करेंगे व बेहतर उपज प्राप्त करेंगे. कृषि मंत्री ने कहा कि कृषकों को पंप सेट, रोटावेटर सीड, ड्रिल पाइप, स्नैप्सीड प्रेयर, मिनी राइस मिल, दाल मिल आदि यंत्र कृषकों के बीच अनुदानित दर पर वितरित किये जा रहे हैं. 1329 कृषकों के बीच 160 क्विंटल गेहूं का बीज ब्लॉकचेन पद्धति द्वारा उपलब्ध कराया गया. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना अंतर्गत नौ क्विंटल चना का बीज व 50 किलो मसूर बीज का वितरण किया गया. कृषि मंत्री ने कृषकों को सलाह दी की कृषि विभाग द्वारा जितने भी प्रकार के बीच का वितरण किया जा रहा है सभी बीज को कृषक अपने खेत में लगाएं.


किसान फसल को लगाने के पूर्व बीज उपचार अवश्य करें : संजय

आत्मा के परियोजना निदेशक संजय कुमार मंडल ने बताया कि विभाग की ओर से रबी फसल की बीजों का वितरण किया गया. सभी किसान फसल को लगाने के पूर्व बीज उपचार अवश्य करें. बीजों को पंक्तिबद्ध तरीके से उचित दूरी पर लगाने की सलाह दी. परियोजना निदेशक द्वारा मृदा स्वास्थ्य कार्ड के बारे में कृषकों को विस्तार पूर्वक जानकारी दी गयी. उन्होंने बताया कि प्रत्येक कृषक के पास मृदा स्वास्थ्य कार्ड होना आवश्यक है. इससे कृषकों को मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता, नमी की उपलब्धता, संभावित हाइड्रोजन और कार्बन की जानकारी मिलती है. मृदा स्वास्थ्य कार्ड द्वारा हमें पता चलता है कि कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी अथवा अधिकता है. कितनी मात्रा में फसलों में उर्वरक का प्रयोग किया जाना चाहिए. मिट्टी में मुख्य रूप से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सूक्ष्म पोषक तत्व, मैग्नीशियम, प्रोटॉन, तांबा, लोहा, मैंगनीज, जस्ता की उपलब्धता होनी चाहिए. परियोजना निदेशक द्वारा कृषकों को 80 फीसदी अनुदान पर मिलने वाले मानव चलित प्रेयर, कल्टीवेटर, कोनो वीडर, पावर स्प्रेयर, सीड स्टोरेज, सीड ट्रीटमेंट ड्रम यंत्र की उपलब्धता की जानकारी दी. कृषक इन कृषि यंत्रों का लाभ लेने के लिए अपने प्रखंड के प्रखंड तकनीकी प्रबंधक, सहायक तकनीकी प्रबंधक के माध्यम से आवेदन जमा कर सकते हैं. इसके अलावा कृषकों को अंतर राज्य प्रशिक्षण एवं परिभ्रमण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बीटीएम अथवा एटीएम के पास आवेदन जमा करने की बात कही. मौके पर मुख्य रूप से जिला कृषि पदाधिकारी कमल कुमार कुजूर, भूमि संरक्षण पदाधिकारी शिवकुमार, परियोजना निदेशक संजय कुमार मंडल, बीडीओ नीलम कुमारी, सीओ आशुतोष ओझा, बीटीएम मिथिलेश कुमार, एटीएम रामेश्वर हंसदा, अमित साह, प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष सत्यनारायण यादव समेत टीम बादल के दर्जनों सदस्य मौजूद थे.

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