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दुमका में कला और शिक्षा जगत में शोक की लहर

Updated at : 14 Jan 2026 11:09 PM (IST)
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दुमका में कला और शिक्षा जगत में शोक की लहर

दुमका जिला कला संस्कृति संघ के अध्यक्ष शिशिर घोष नहीं रहे. उनका निधन पूरे दुमका की सांस्कृतिक और शैक्षणिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है.

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दुमका नगर. जिला कला संस्कृति संघ के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त शिक्षक और जिले में कई बाल विज्ञानियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभानेवाले शिशिर कुमार घोष का बुधवार की सुबह निधन हो गया. उनका निधन पूरे दुमका की सांस्कृतिक और शैक्षणिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है. शिशिर घोष सिर्फ जिला कला संस्कृति संघ के अध्यक्ष ही नहीं थे, बल्कि साहित्य, संगीत, रंगकर्म, चित्रकला और मंच संचालन जैसी कई कलाओं के पारखी, सच्चे कलाकार और हमेशा कलाकारों के अधिकार के लिए आवाज उठाने वाले व्यक्ति थे. हिजला मेला की सांस्कृतिक उप समिति हो या जिला कला संस्कृति संघ का अध्यक्ष पद, जिला शिक्षा विभाग या अन्य प्रशासनिक कार्यक्रम—शिशिर दा ने हमेशा गुमनाम कलाकारों और बाल प्रतिभाओं को मंच दिया. सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने जिला खेलकूद संघ में वरिष्ठ सदस्य के रूप में खेल आयोजनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. जिला कला संस्कृति संघ के पुनर्गठन के बाद जब पहली बार वार्षिकोत्सव कार्यक्रम आयोजित हुआ, तब उन्होंने खोज-खोज कर साहित्य, संगीत, नृत्य, चित्रकला के जाने-माने नामों के साथ-साथ गुमनाम कलाकारों को भी मंच पर सम्मानित किया. विज्ञान के लोकप्रिय शिक्षक होने के साथ ही शिशिर घोष सिंथेसाइज़र वादन, कंप्यूटर कार्य, उद्घोषक, मंच संयोजन, विज्ञान क्विज मास्टर और कला-संगीत के निर्णायक के रूप में भी ख्याति प्राप्त थे. शेरो-शायरी में भी उनकी गहरी रुचि थी. वर्ष 2000 के झारखंड स्थापना के बाद से ही शिक्षा विभाग और प्रशासनिक कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति अनिवार्य रही. शिक्षण सेवा में रहते हुए उन्होंने हर कार्य को पूरी निष्ठा और लगन से संपन्न किया. शंकर पंजियारा और विज्ञान शिक्षक कामख्या नारायण सिंह के साथ मिलकर ‘साइंस फॉर सोसाइटी, दुमका’ के गठन के बाद से ही शिशिर घोष बच्चों के लिए विज्ञान क्विज का आयोजन करते रहे, जिससे दुमका में वैज्ञानिक चेतना का विकास हुआ. शिशिर दा दुमका के पुराने आर्केस्ट्रा टीम के भी प्रमुख सदस्य थे. 80 के दशक में उन्होंने युवा काल में ही गीत-संगीत की नींव डाली और किशोर कुमार व लता के पुराने गीतों को सहजता से प्रस्तुत करते थे. पिछले डेढ़-दो वर्ष से गंभीर बीमारी से जूझ रहे शिशिर घोष गत वर्ष 29 दिसंबर, 2025 को संघ के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में भौतिक रूप से उपस्थित न रहकर भी निरंतर मार्गदर्शन करते रहे. उनके प्रस्ताव पर आयोजित “झंकार 2025” वार्षिकोत्सव अभूतपूर्व रूप से सफल रहा था. उनके निधन के इस दुखद समाचार के बाद जिला कला संस्कृति संघ के उपाध्यक्ष महेंद्र प्रसाद साह, ईमानुएल सोरेन, कोषाध्यक्ष मधुर सिंह, संरक्षक सदस्य कवि अरुण सिन्हा, वरिष्ठ साहित्यकार शंभूनाथ मिस्त्री, संघ सचिव अशोक सिंह, मीडिया प्रभारी अमरेंद्र सुमन और अन्य वरिष्ठ शिक्षक व कलाकार अश्रुपूरित नेत्रों से श्रद्धांजलि अर्पित की. उनके निधन पर झारखंड राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के राज्याध्यक्ष दिवाकर महतो, प्रमंडलीय अध्यक्ष डॉ दिलीप कुमार झा, जिला अध्यक्ष बुलबुल कुमार, जिला सचिव काशीनाथ महतो, मीडिया प्रभारी सह प्रवक्ता नीलांबर कुमार साहा, परीक्षा अध्यक्ष जुलकर अंसारी, संयुक्त सचिव अशोक कुमार यादव ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BINAY KUMAR

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