बच्चों की शिक्षा भगवान भरोसे

Published at :19 Jan 2017 5:32 AM (IST)
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बच्चों की शिक्षा भगवान भरोसे

विडंबना. एकमात्र शिक्षक की वजह से बाधित रहता है पठन-पाठन सरकार भले ही शिक्षा व्यवस्था पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है मगर इसका कुछ खास लाभ विद्यालयों में देखने को नहीं मिल रहा है. कमोवेश सुदूरवर्ती इलाकों में स्थिति आज भी जस की जस बनी हुई है. दुमका : जिले के मसलिया […]

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विडंबना. एकमात्र शिक्षक की वजह से बाधित रहता है पठन-पाठन

सरकार भले ही शिक्षा व्यवस्था पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है मगर इसका कुछ खास लाभ विद्यालयों में देखने को नहीं मिल रहा है. कमोवेश सुदूरवर्ती इलाकों में स्थिति आज भी जस की जस बनी हुई है.
दुमका : जिले के मसलिया प्रखंड में नौनिहालों की शिक्षण व्यवस्था भगवान भरोसे है. विद्यालय में बच्चे तो समय पर पहुंच जाते हैं पर गुरुजी गायब रहते हैं. यह नजारा बुधवार को उत्क्रमित मध्य विद्यालय धोकड़जोड़ा, प्राथमिक विद्यालय जाहेरटोला धोकड़जोड़ा और नव प्राथमिक विद्यालय पहाड़पुर का है. यू तो विद्यालय का पठन-पाठन 10 बजे शुरू होकर तीन बजे तक चलना है. पर 10 बजे तक विद्यालय में शिक्षक नहीं पहुंचे थे. 10.15 बजे उत्क्रमित मध्य विद्यालय धोकड़जोड़ा में छात्र विनाली सोरेन झाड़ू लगा रही थी. छात्रा से पूछने पर बताया कि विद्यालय में एक ही शिक्षिका है जो अब तक नहीं पहुंची हैं.
प्राथमिक विद्यालय जाहेरटोला में दो शिक्षक उमेश मरांडी तथा बाबूश्वर टुडू पदस्थापित हैं पर 10.30 बजे तक दोनों शिक्षक विद्यालय से गायब थे. और छात्र स्कूल के परिसर में खेलते नजर आये. छात्र ओविराम मरांडी, ओवीसल हांसदा, विभिषण टुडू ने बताया कि हम छात्र 10 बजे तक विद्यालय पहुंच गये हैं पर शिक्षक अब तक नहीं पहुंचे हैं.
चावल उठाव के लिये गये प्रखंड गये शिक्षक
विद्यालय में बच्चों के मध्याह्न भोजन ग्राम शिक्षा समिति एवं माता समिति द्वारा संचालित होती है. बावजूद आज भी शिक्षक गैर शैक्षणिक कार्य चावल उठाव और सब्जी लाने में लगे हुए हैं. जिस कारण बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है. वहीं इस ओर शिक्षा विभाग के अधिकारी भी गंभीर नहीं है. जिले के मसलिया अंचल अंतर्गत नव प्राथमिक विद्यालय में एक ही शिक्षक रहने के बावजूद बुधवार को शिक्षक रसोइया के भरोसे छात्र को छोड़ चावल उठाव के लिए गये. 11 बजे विद्यालय में छात्र-छात्राएं किताब कॉपी लेकर कक्षा के बाहर बैठे हुए तो थे पर उसे पढ़ाने वाला कोई नहीं और रसोइया खाना बनाने की तैयारी में लगी हुई थी. रसोइया को जब शिक्षक के बारे में पूछा गया तो बताया कि विद्यालय में एक ही शिक्षक है, जो चावल उठाव के लिये मसलिया गये हुए हैं.
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