पीपीपी मोड पर डेयरी इंजीनियरिंग कॉलेज में जल्द शुरू होगी पढ़ाई

Published at :01 Aug 2016 5:19 AM (IST)
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पीपीपी मोड पर डेयरी इंजीनियरिंग कॉलेज में जल्द शुरू होगी पढ़ाई

निर्णय. बेकार पड़े भवनों का उपयोग शीघ, कृषि मंत्री ने कहा पढ़ाई शुरू होने से माहौल बनेगा बेहतर बेकार पड़े भवनों का लोगों को मिल सकेगा लाभ दुमका : कृषि एवं पशुपालन मंत्री रणधीर सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार डेयरी इंजीनियरिंग काॅलेज, शिक्षा, स्वास्थ्य व पशुपालन से संबंधित निर्मित भवनों में शीघ्र ही […]

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निर्णय. बेकार पड़े भवनों का उपयोग शीघ, कृषि मंत्री ने कहा

पढ़ाई शुरू होने से माहौल बनेगा बेहतर
बेकार पड़े भवनों का लोगों को मिल सकेगा लाभ
दुमका : कृषि एवं पशुपालन मंत्री रणधीर सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार डेयरी इंजीनियरिंग काॅलेज, शिक्षा, स्वास्थ्य व पशुपालन से संबंधित निर्मित भवनों में शीघ्र ही शैक्षणिक व स्वास्थ्य व्यवस्था शुरू करेगी. इन नवनिर्मित भवनों में शैक्षणिक व स्वास्थ्य सुविधा का कार्य पीपीपी मोड से चलाया जायेगा. श्री सिंह ने दुमका परिसदन में पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा कि दुमका जिले के सरैयाहाट प्रख्ंड के हंसडीहा स्थित डेयरी इंजीनियरिंग काॅलेज में पीपीपी से जल्द ही शैक्षणिक कार्य प्रारंभ किया जायेगा. इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा त्वरित कार्रवाई की जा रही है.
इसी क्रम में उन्होंने कहा कि पूर्व में ठेकेदारी को बढ़ावा देने को लेकर राज्य सरकार द्वारा शिक्षक, डाॅक्टर, सहित अन्य संसाधनों की व्यवस्था किये बगैर भवन निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिये गये और कमीशन बटोर लिया गया, लेकिन जिन कार्यों के लिए इन भवनों का निर्माण कराया गया था वह कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया है. इसका लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल पाया है. इसलिए राज्य सरकार इसे गंभीरता से लेते हुए करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित बेकार पड़े भवनों का उपयोग शीघ्र शुरू करेगी. बता दें कि डेयरी इंजीनियरिंग काॅलेज भवन का निर्माण कराया गया है लेकिन इस इंजीनियरिंग काॅलेज में आज तक पढ़ाई शुरू नहीं हो पायी है.
10 हजार कुएं में मछली पालन का लक्ष्य
श्री सिंह ने कहा कि पिछले वितीय वर्ष 2015 -16 में राज्य के 4 लाख 16 हजार किसानों को राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना से जोड़ा गया था. इसके तहत किसानों को 200 करोड़ फसल बीमा क्षतिपूर्ति का मुआवजा जारी किया गया है. इस वर्ष राज्य में पहली बार 10 हजार कुएं में मछली पालन की नयी योजना की शुरुआत की गयी है, जिससे यहां के किसानों की आय में वृद्धि हो सकेगी. इसके अलावा चालू वितीय वर्ष के बजट में बंजर भूमि जोत आबाद की नयी योजना भी शुरू की गयी है. इसके तहत बंजर भूमि को आबाद करने के लिए 4100 रुपये प्रति एकड़ बजटीय प्रावधान किया गया है. श्री सिंह ने कहा कि सहकारिता विकास के लिए राज्य सरकार ने 127 को-ऑपरेटिव बैकों की शाखाओं को एक सूत्र में बांध कर स्टेट को ऑपरेटिव बैंक में विलय कर दिया गया है. इन बैकों को सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जा रहा है. 8 अगस्त को नाबार्ड के साथ बैठक कर राज्य के सहकारिता बैकों को मजबूत कर किसानों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाया जायेगा,जिससे किसानों को समय पर बीज,खाद, उपकरण आदि सुविधाओं का लाभ मिल सकेगी.
बैठक में ये सभी रहे उपस्थित
बैठक में संयुक्त निबंधक सह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के राज्यस्तरीय नोडल पदाधिकारी सुनील सिंह, संयुक्त निदेशक कृषि एसएन सिंह, जिला कृषि पदाधिकारियों में दुमका के सुरेन्द्र सिंह, पाकुड़ के मिथिलेश कुमार कालिंदी, जामताड़ा के मो शमसुद्दीन अंसारी गोड्डा के सुरेश तिर्की, जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी डा मदन मोहन जायसवाल, जिला सहकारिता पदाधिकारी दुमका राकेश कुमार सिंह, आत्मा के पदाधिकारियों में परियोजना निदेशक डॉ दिवेश सिंह, देवघर के रमेश कुमार, गोड्डा के उप निदेशक राकेश कुमार सिंह, देवघर के उप निदेशक मन्टु कुमार,
पाकुड़ के अरविंद कुमार राय, जिला योजना एवं मूल्यांकन पदाधिकारी राजेन्द्र प्रसाद, जिला गव्य विकास पदाधिकारियों में पाकुड़ के धर्मेन्द्र विद्यार्थी, दुमका के अरुण कुमार सिन्हा, देवघर के संजीव रंजन कुमार, जिला पशुपालन पदाधिकारियों में गोड्डा के डा भारतेन्दु प्रसाद, जामताड़ा के डॉ विपिन कुमार मिश्रा, साहेबगंज के डा विष्णु प्रसाद मांझी, दुमका के डाॅ राम किशोर प्रसाद मेहता मुख्य रूप से उपस्थित थे.
प्रस्ताव शीघ्र केंद्र सरकार को भेजा जायेगा
श्री सिंह ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर तय समय सीमा में बढ़ोतरी किये जाने से संबंधित प्रस्ताव शीघ्र ही केंद्र सरकार को भेजेगी, ताकि अधिक से अधिक किसान इससे लाभान्वित हो सके. 31 जुलाई तक राज्य के दस लाख किसानों को फसल बीमा योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. इस योजना के लक्ष्य को शत-प्रतिशत उपलब्धि हासिल करने के लिए केंद्र सरकार से निर्धारित समय अवधि में एक माह की बढ़ोतरी करने की आवश्यकता महसूस की गयी है. कृषि विभाग की ओर से मुख्यमंत्री के समक्ष इससे संबंधित एक आग्रह प्रस्ताव रखा गया है जो मुख्यमंत्री के स्तर से केंद्र सरकार को भेजा जायेगा.
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