स्वास्थ्य महकमा गंभीर होता, तो नहीं जाती जान

Updated at : 28 Oct 2017 3:50 AM (IST)
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स्वास्थ्य महकमा गंभीर होता, तो नहीं जाती जान

दुमका : गोपीकांदर में स्वास्थ्य महकमा संवेदनशील व सक्रिय होता, तो शायद डायरिया से इन मरीजों की जान नहीं जाती. प्रभात खबर ने इसी महीने के 10 अक्तूबर को गोपीकांदर के स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की रिपोर्ट छापी थी, जिसमें दिखाया गया था कि किस तरह से स्वास्थ्य उपकेंद्र लंबे अरसे से नहीं खुला करते […]

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दुमका : गोपीकांदर में स्वास्थ्य महकमा संवेदनशील व सक्रिय होता, तो शायद डायरिया से इन मरीजों की जान नहीं जाती. प्रभात खबर ने इसी महीने के 10 अक्तूबर को गोपीकांदर के स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की रिपोर्ट छापी थी, जिसमें दिखाया गया था कि किस तरह से स्वास्थ्य उपकेंद्र लंबे अरसे से नहीं खुला करते और लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लाभ से वंचित रहना पड़ता है. उस वक्त जिले के उपायुक्त और गोपीकांदर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने ऐसे मामले में कार्रवाई की बात कही थी
. मानव संसाधन की कमी को भी एक कारण बताया गया था, पर यह भी कहा गया था कि डॉक्टर व पारा मेडिकल स्टॉफ अगर वहां तैनात हैं तथा अपनी सेवा नहीं दे रहे हैं, तो उन पर कार्रवाई की जायेगी. वेतन रोका जायेगा. जरुरत पड़ी तो व्यवस्था सुधार के लिए ऐसे पारा मेडिकल स्टॉफ तैनात किये जायेंगे, जिनके लिए केंद्रों में आवागमन सुलभ हों व केंद्र नियमित खुले.
मुख्यालय से नदारद थे पदस्थापित चिकित्सक!
गोपीकांदर में जो दो चिकित्सक पदस्थापित हैं, वे कल से डायरिया फैलने के बाद भी क्षेत्र में नहीं पहुंचे. खबर यह भी मिल रही है कि दोनो चिकित्सक दरअसल मुख्यालय में ही नहीं थे. इसलिए जब दुमका से मेडिकल टीम भेजी गयी, तब भी वे वहां मौजूद नहीं थे. ऐसे मामले के संज्ञान में आने पर अनुमंडल पदधिकारी राकेश कुमार ने गोपीकांदर के बीडीओ से रिपोर्ट मांगी है.
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, लोगों को नहीं मिल रही स्वास्थ्य सुविधाएं
सदर अस्पताल में न कंबल और न ही इंट्राकैट
सदर अस्पताल में डायरिया के रोगी को लाये जाने पर उनके इलाज की जानकारी लेने के बाबत पहुंचे अनुमंडल पदाधिकारी राकेश कुमार ने अस्पताल की कुव्यवस्था देख नाराजगी जतायी. अस्पताल में मरीज के लिए इंट्राकैट व कंबल तक नहीं थे. जब उन्हें जानकारी दी गयी कि सिविल सर्जन के कार्यालय के प्रांगण में हजारों कंबल रखे हुए हैं, तो स्पष्ट हुआ कि सदर अस्पताल के लिए भी 350 कंबल आवंटित होकर महीनों से पड़े हुए हैं, पर लाने की पहल नहीं हुई थी. आनन-फानन में 50 कंबल मंगवाये गये.
सदर अस्पताल में पहले से भर्ती थे तीन मरीज
सदर अस्पताल में पहले से ही डायरिया के तीन मरीज भर्ती थे. इन्हें निचले तल में मेल- फिमेल वार्ड में भर्ती किया गया था. इनका इलाज जारी था. उर्मिला देवी, निवासी देवी व किशन खैरा का इलाज चलते रहने से उनकी सेहत में काफी सुधार आया है. इधर गोपीकांदर से एंबुलेंस में लायी गयी मिस्त्री मरांडी की दो बेटियों श्रीमती व सरोधनी के भी सेहत में सुधार की बात कही जा रहा है. गोपीकांदर में खरकासोल के लीलमुनी सोरेन, लखीराम टुडू तथा कुंडापहाड़ी के काजल टुडू व करण मोहली का भी गांव में मेडिकल टीम द्वारा इलाज किया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग इनकी बीमारी को फूड प्वायजनिंग से जुड़ा बता रहा है.
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