मुनाफे सिक्के में बदले और जेब खाली, डंप हो गये हजारों रुपये के सिक्के

Updated at : 08 Sep 2017 12:32 PM (IST)
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मुनाफे सिक्के में बदले और जेब खाली, डंप हो गये हजारों रुपये के सिक्के

एक व दो रुपये के सिक्के के नहीं चलने की अफवाह धीरे-धीरे छोटे दुकानदार व बड़े व्यवसाय से लेकर आम लोगों के बीच मुसीबत बन रही है. लोग कमाई के बाद भी खर्च कर पाने की स्थिति में नहीं हैं. चाय-पान की दुकान और ठेले-खोमचे लगाने वालों के पास कई हजार के सिक्के जमा हो […]

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एक व दो रुपये के सिक्के के नहीं चलने की अफवाह धीरे-धीरे छोटे दुकानदार व बड़े व्यवसाय से लेकर आम लोगों के बीच मुसीबत बन रही है. लोग कमाई के बाद भी खर्च कर पाने की स्थिति में नहीं हैं. चाय-पान की दुकान और ठेले-खोमचे लगाने वालों के पास कई हजार के सिक्के जमा हो गये हैं. जबकि मध्य वर्ग के दुकानदार व बड़े व्यवसायियों के पास तो हजार से लेकर लाखों के सिक्के जमा है. इस समस्या से निजात दिलाने के लिए अब केंद्र व सरकार की ओर से बड़ा कदम उठाने की आवश्यकता है.

दुमका: इन दिनों उपराजधानी दुमका में सिक्के के आदान-प्रदान को लेकर बड़ी परेशानी है. दुकानदार हो या फिर आमलोग एक व दो रुपये के सिक्के लेने से इनकार कर रहे हैं. बैंक अधिकारी से लेकर दुकानदारों का कहना है कि सिक्के नहीं चलने की अफवाह से व्यवसायी से लेकर ग्राहक और बैंकों में भी परेशानी बढ़ गयी है.

सजा का है प्रावधान : नियमानुसार देश में रहकर देश की मुद्रा का बहिष्कार करना कानूनी अपराध है. इसमें सजा का भी प्रावधान है. मुद्रा का बहिष्कार करने वाले को जेल की हवा खाने के साथ-साथ अर्थ दंड का भी प्रावधान है. वही बैंकों के लिए यदि कोई बैंक सिक्का लेने से इनकार करता है तो बैंकिंग लोकपाल योजना 2006 के प्रावधान के तहत कार्रवाई की भागी हो सकते हैं.

सिक्कों के बोझ से दबा एक्सिस बैंक : शहर के एक्सिस बैंक सिक्के की बोझ अब सहन नहीं कर पा रहा है. सूत्रों की माने तो 5 लाख रुपये के 50 पैसे के सिक्के पहले से ही जमा है. वही वर्तमान में 42 लाख रुपये के सिक्के ग्राहकों का बैंक में जमा हुआ है. इतनी मात्रा में सिक्के जमा होने के कारण बैंक की भी परेशानी बढ़ गयी है.

केस स्टडी :- एक

बैंक नहीं लेना चाहता सिक्के

टीन बाजार चौक में फल की दुकान चलाने वाले मो आफताब ने सिक्के को लेकर अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि एक दिन में करीब 1000 से 1500 रुपये के सिक्के जमा हो गये हैं. ग्राहक सिक्का नहीं लेना चाहते. वहीं बैंक में भी सिक्का नहीं लिया जा रहा है. जिस कारण सिक्का सिर्फ अपने पास ही जमा होकर रह जा रहा है.

केस स्टडी : – दो

मात्र सौ से दो सौ हो रहे जमा

फूल दुकानदार मुन्ना कहते हैं कि हम तो सिक्का लेते हैं पर हमसे ग्राहक सिक्का नहीं लेना चाहते हैं और बैंक भी ज्यादा मात्रा में सिक्का जमा नहीं ले रहा है. 1000 रुपये में मात्र 100 से 200 रुपये तक का ही सिक्का बैंक जमा ले पाता है. जिससे आर्थिक रूप से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इससे प्रशासन निजात दिलायें.

केस स्टडी : – दो

मात्र सौ से दो सौ हो रहे जमा

फूल दुकानदार मुन्ना कहते हैं कि हम तो सिक्का लेते हैं पर हमसे ग्राहक सिक्का नहीं लेना चाहते हैं और बैंक भी ज्यादा मात्रा में सिक्का जमा नहीं ले रहा है. 1000 रुपये में मात्र 100 से 200 रुपये तक का ही सिक्का बैंक जमा ले पाता है. जिससे आर्थिक रूप से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इससे प्रशासन निजात दिलायें.

केस स्टडी :- चार

अफवाह ने बिगाड़ दी आर्थिक व्यवस्था

कराना दुकानदार विजय स्टोर के संजीव कुमार जायसवाल का कहना है कि हमारे यहां तो सिक्का लिया जा रहा है. अत तक 4000 रुपये का सिक्का जमा हो चुका. परंतु अफवाह के कारण ग्राहक सिक्का नहीं लेना चाहता है. ग्राहकों को सिक्का देने का प्रयास करने पर भी वह सीधे सिक्के लेने से मना कर देते हैं. प्रशासन को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए. लोगों के बीच जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है. नहीं तो आगे जाकर ये समस्या और विकट हो जायेगी.

कहते हैं एसबीआइ के शाखा प्रबंधक

एसबीआइ बाजार शाखा के शाखा प्रबंधक दिवाकर कुमार कहते हैं कि बैंक सिक्का ले रहा है. परंतु अफवाह के कारण काफी कम मात्रा में ग्राहक सिक्का हमसे लेता है. हमलोग अपने स्तर से ग्राहकों को जागरूक भी करने का प्रयास कर रहे हैं.

बोले बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक

बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक रणधीर चौधरी ने कहा कि बैंक में सिक्का लिया जा रहा है. ग्राहकों को सिक्के को लेकर कोई परेशानी होने नहीं दी जा रही है. ग्राहक ज्यादा मात्रा में नहीं परंतु 100-200 रुपये तक का सिक्का ले रहा है.

क्या कहते हैं प्रधान डाकघर के डाकपाल

प्रधान डाकघर के डाकपाल अनामुल हक कहते हैं कि हमारे यहां सिक्के का ही चलन ज्यादा है. हमें सिक्के लेने में कोई परेशानी नहीं है. ग्राहक द्वारा दिये गये सिक्के को सहर्ष हम सभी स्वीकार कर रहे हैं. कोई परेशानी नहीं है.

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