35 सालों में नहीं बढ़ी सीटें 25 बच्चे ही हो रहे शिक्षित

Updated at : 07 Aug 2017 2:32 PM (IST)
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35 सालों में नहीं बढ़ी सीटें 25 बच्चे ही हो रहे शिक्षित

दुमका : उपराजधानी दुमका के हिजला स्थित मूक बधिर विद्यालय में स्थापना के बाद से अब तक सीटें नहीं बढ़ायी गयी है. 1982 में स्थापित इस विद्यालय में 25 बच्चों को ही शिक्षा मिल पा रही है. नामांकन के लिये हर साल बड़ी संख्या में अभिभावक बच्चे के साथ निराश लौटने को मजबूर हो जाते […]

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दुमका : उपराजधानी दुमका के हिजला स्थित मूक बधिर विद्यालय में स्थापना के बाद से अब तक सीटें नहीं बढ़ायी गयी है. 1982 में स्थापित इस विद्यालय में 25 बच्चों को ही शिक्षा मिल पा रही है. नामांकन के लिये हर साल बड़ी संख्या में अभिभावक बच्चे के साथ निराश लौटने को मजबूर हो जाते हैं.
संतालपरगना में मूक बधिर बच्चों की संख्या काफी अधिक है, जो पठन-पाठन का लाभ पाने से वंचित रह जाते हैं. अगर सीटें बढ़ायी गयी, तो इसका लाभ उन बच्चों को मिल पायेगा और वे आवसीय व्यवस्था के तहत यहां शिक्षण प्राप्त करने के साथ-साथ अपने अंदर कौशल विकास भी कर पायेंगे.
राज्य में दो ही स्कूल
बता दें कि समाज कल्याण विभाग द्वारा राज्य में दो ही मूक बधिर विद्यालय संचालित है, जिनमें दूसरा रांची में संचालित है. दुमका में 25 और रांची में 30 ही सीटें निर्धारित है. दोनों ही मूक बधिर विद्यालय बालकों के लिए संचालित है, बालिकाओं के लिए राज्य के अंदर ऐसी सरकारी व्यवस्था नहीं है.
चार साल से 10 कंप्यूटर बेकार, ट्रेनर भी नहीं
मूक बधिर विद्यालय के बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा दिलाने के लिए दस कंप्यूटर चार साल पहले उपलब्ध कराये गये थे, पर आज कंप्यूटर एक कमरे में बंद है. बच्चों ने इशारे से बताया कि वे कंप्यूटर चलाना चाहते हैं, पर कोई सीखानेवाला नहीं है. बच्चों की लालसा बैडमिंटन खेलने की भी है.
विद्यालय में पेयजल संकट, कनेक्शन भी नहीं है
मूक बधिर बच्चे इन दिनों पेयजल संकट से परेशान हैं. इस स्कूल में पेयजलापूर्ति का कनेक्शन भी है, पर पिछले डेढ़-दो महीने से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है. ऐसे में बच्चों को चापाकल का पानी पीना पड़ रहा है, जबकि स्कूल भवन में आरओ तक लगे हुए हैं. अभी चापाकल से जो पानी निकलता है, वह मटमैला होता है.
बढ़ायी जायेगी सीट, ध्यान देगी सरकार : मंत्री
समाज कल्याण मंत्री डॉ लोइस मरांडी ने कहा कि अगर सीट 25 ही है और मूक बधिर बच्चे दाखिला पाने से वंचित रह जाते हैं, तो सीटें बढ़ाई जायेंगी.
इसके लिए जो भी संसाधन बढ़ाने की जरूरत होगी, वह उपलब्ध कराया जायेगा. पानी की समस्या के निदान के लिए वहां डीप बोर भी जल्द करवा दिया जायेगा. अगले सत्र से ऐसे बच्चों को निराश न लौटना पड़े, इसका पूरा ध्यान रखा जायेगा.
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