दलहन बीज उत्पादन का हब बनेगा दुमका
Updated at : 11 Jun 2017 4:30 AM (IST)
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प्रभात चर्चा . कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक ने कार्य योजना से कराया अवगत, कहा प्रभात खबर द्वारा आयोजित प्रभात चर्चा कार्यक्रम में शनिवार को हमारे मेहमान थे कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ श्रीकांत सिंह. डॉ सिंह ने बताया कि देश के 150 चुनिंदा स्थानों में दुमका जिला भी शामिल किया गया […]
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प्रभात चर्चा . कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक ने कार्य योजना से कराया अवगत, कहा
प्रभात खबर द्वारा आयोजित प्रभात चर्चा कार्यक्रम में शनिवार को हमारे मेहमान थे कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ श्रीकांत सिंह. डॉ सिंह ने बताया कि देश के 150 चुनिंदा स्थानों में दुमका जिला भी शामिल किया गया है, जहां दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने की पहल हो रही है. सरकार ने इसके लिए दलहन के बीज उत्पादन पर विशेष फोकस किया हुआ है. साल भर से चल रही इस योजना के तहत लगातार कार्य हो रहे हैं. आनेवाले तीन-चार वर्षों में इसके सकारात्मक परिणाम नजर आयेंगे. प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश.
दुमका : दलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने तथा उच्च गुणवत्ता वाले बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए सरकार ने देश के 150 स्थानों पर दलहन सीड हब तैयार किया है. इनमें से पांच सीड हब झारखंड के पांच जिले दुमका, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम, हजारीबाग व रांची में स्थापित किये गये हैं. कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ श्रीकांत सिंह ने प्रभात चर्चा में बताया कि इस इलाके में दलहन का उत्पादन दूसरी फसलों यथा धान व मक्का की तुलना में बेहद कम होता है. थोड़ी-बहुत खेती जो किसान करते हैं,
वह वगैर कृषि तकनीक के ही करते हैं. जिससे उनकी लागत अधिक होती है और उत्पादन बेहद कम. ऐसे में दलहन उत्पादन को लेकर उनकी रुचि नहीं बढ़ी है. इस योजना की खासियत यह है कि इसे किसानों की सहभागिता से ही साकार किया जाना है. योजना के तहत गत वर्ष से ही किसानों को पहले प्रशिक्षित कर दलहन की खेती को लेकर उत्प्रेरित किया गया है.
केवल अरहर, चना, मूंग व उरद ही नहीं इस क्षेत्र में उपजाई जाने वाली कुल्थी को भी इसमें शामिल किया गया है. साथ ही किसानों में यह विश्वास पैदा कराने की भी कोशिश हो रही है कि उन्हें इसे उपजाने में किसी तरह का नुकसान नहीं होगा, बल्कि बाजार भाव से काफी अधिक लगभग 15 से 20 फीसदी अधिक दर पर हब ही बीज खरीद लेगी. डॉ सिंह ने बताया प्रत्येक सीड हब को केंद्र सरकार से चरणबद्ध तरीके से 1.5 करोड़ रुपये प्राप्त होने हैं. इनमें से 50 लाख रुपये सीड प्रोसेसिंग और स्टोरेज की व्यवस्था करने पर खर्च करने का प्रावधान है. जबकि शेष एक करोड़ रुपये चक्रीय निधि के तौर पर उपयोग में लायी जायेगी.
दुमका में मिट्टी की प्रकृति के अनुरूप हो रहा बीजों का उत्पादन
डॉ सिंह ने बताया कि इसके तहत दुमका में अलग-अलग इलाके में मिट्टी की प्रकृति, किसानों की अभिरुचि, जल प्रबंधन आदि को देखते हुए भिन्न-भिन्न प्रकार के दलहन की खेती करायी जा रही हैं और बीज उत्पादन कराये जा रहे हैं. डॉ सिंह ने बताया कि 2017-18 में इस योजना के तहत लगभग 900 क्विंटल बीज उत्पादन कराने का लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें अरहर के 400 क्विंटल, चना के 200 क्विंटल तथा उरद, मूंग व कुल्थी के 100-100 क्विंटल बीज उत्पादित किये जाने की योजना है.
इसके लिए समूह बनाकर क्रमश: जरमुंडी के रामपुर, कैरो व ककनियां, रामगढ़ के नावाडीह, जरुवाडीह व कुसुमडीह में, शिकारीपाड़ा के गंध्रकपुर व झुरको में, सरैयाहाट के भाटिन व बनवारा में तथा मसलिया प्रखंड के बास्कीडीह में दलहन बीज उत्पादित किये जा रहे हैं. इसके लिए खासकर वैसी भूमि चिह्नित की गयी है, जो परती रह जाया करती थी.
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