World Organ Donation Day 2024: धनबाद मेडिकल कॉलेज में नेत्रदान बंद, अंगदान की भी व्यवस्था नहीं, ऐसे जताया विरोध

Updated at : 12 Aug 2024 11:05 PM (IST)
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आंख पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करते लोग

प्रभात खबर

World Organ Donation Day 2024: धनबाद के मेडिकल कॉलेज में दो साल से नेत्रदान बंद है. यहां अंगदान की भी व्यवस्था नहीं है. एसएनएमएमसीएच में अंगदान व नेत्रदान के नाम पर सिर्फ जागरूकता कार्यक्रम होते हैं. इसके खिलाफ लोगों ने आंखों पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया.

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World Organ Donation Day 2024: धनबाद-अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने, लोगों को अंगदान करने के लिए प्रेरित करने, अंगदान के महत्व को समझाने व अंगदान की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देने के लिए हर साल 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है. अंगदान एक जीवन रक्षक कार्य है. इससे कई लोगों की जान बचायी जा सकती है, लेकिन धनबाद में अंगदान की कोई व्यवस्था नहीं है, जबकि जिले में राज्य का तीसरा सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) संचालित है. अंगदान दिवस को लेकर मेडिकल कॉलेज में सिर्फ खानापूर्ति के लिए जागरूकता व शपथ कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं. अंगदान व नेत्रदान की अस्पताल में काई व्यवस्था नहीं है.

21 माह से आई बैंक का लाइसेंस एक्सपायर

धनबाद के एसएनएमएमसीएच में पहले नेत्रदान की व्यवस्था थी. अस्पताल में संचालित आई बैंक में नेत्रदान भी होता था. मृत्यु के बाद नेत्रदान करने वालों की आंखों का कॉर्निया निकाल जरूरतमंदों के लिए संरक्षित रखा जाता था. दो साल से अस्पताल के आई बैंक में नेत्रदान भी ठप है. लगभग 21 माह से आई बैंक में सर्जन चिकित्सक का पद भी रिक्त है.

पांच सालों में 43 का कराया गया नेत्रदान

मेडिकल कॉलेज में 2014 में आई बैंक की शुरुआत हुई. स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से साल 2019 तक 43 लोगों का नेत्रदान कराया गया. कुल 86 कॉर्निया प्राप्त हुए. इस बीच सिर्फ 22 जरूरतमंदों को ही कॉर्निया प्रत्यारोपित किया जा सका. कुछ कॉर्निया दूसरे अस्पताल को भेजे गये. अच्छे से रख रखाव नहीं होने के कारण लगभग 40 कॉर्निया खराब हो गये. जबकि, धनबाद में लगभग 700 लोगों ने कॉर्निया के लिए निबंधन करा रखा है.

अंतिम बार 2022 में हुआ था नेत्रदान

एसएनएमएमसीएच के आई बैंक में अंतिम बार नेत्रदान 2022 में कराया गया था. 11नवंबर, 2022 को रानीगंज की कमला अग्रवाल की मृत्यु होने के पश्चात उनका कॉर्निया निकाला गया था. इस दौरान धनबाद में ट्रांसप्लांट की व्यवस्था नहीं होने के कारण कॉर्निया को बाहर भेज दिया गया था. इसके बाद 2022 में अस्पताल के एकमात्र नेत्र सर्जन डॉ रजनीकांत सिन्हा रिटायर हो गए. इनके स्थान पर किसी नेत्र सर्जन की नियुक्ति नहीं हुई. तब से अबतक अस्पताल में नेत्रदान पूरी तरह से बंद है.

अंगदान की कोई व्यवस्था नहीं

प्राचार्य सह प्रभारी अधीक्षक डॉ ज्योति रंजन प्रसाद अस्पताल में फिलहाल अंगदान की कोई व्यवस्था नहीं है. सर्जन नहीं होने के कारण नेत्रदान भी बंद है. चिकित्सक मिलने पर ही लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते है. स्वास्थ्य मुख्यालय को इस संबंध में जानकारी दे दी गयी है.

नेत्रदान बंद होने के विरोध में आंखों पर काली पट्टी बांध प्रदर्शन

एसएनएमएमसीएच में नेत्रदान बंद होने के विरोध में लोगों ने आंखों पर काली पट्टी बांध रणधीर वर्मा चौक पर प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में शहर के समाजसेवी व विभिन्न संगठनों के सदस्य शामिल हुए. समाजसेवी अंकित राजगढ़िया ने कहा कि बड़े दुख की बात की हम नेत्रदान जैसा पुण्य काम करना चाहते हैं, पर अस्पताल में सुविधा ही नहीं है. लोगों ने धनबाद में अंगदान सेवा शुरू होने की मांग की. मौके पर समाजसेवी गोपाल भट्टाचार्य, रमा सिन्हा, रमेश राही, इरशाद आलम, अजय कुमार, रवि शेखर, रवि सिंह समेत अन्य मौजूद थे.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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