Dhanbad News: शिक्षा, खेल और संस्कृति प्रेमी थे बिनोद बाबू : वीसी

Edited by MANOJ KUMAR
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Dhanbad News: बीबीएमकेयू और कॉलेजों में धूमधाम से मनायी गयी बिनोद बाबू की जयंती

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Dhanbad News: बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) और उससे संबद्ध कॉलेजों में मंगलवार को बिनोद बिहारी महतो की 102वीं जयंती धूमधाम से मनायी गयी. विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति प्रो. (डॉ.) राम कुमार सिंह ने बिनोद बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की. सीनेट हॉल में भी उनकी तस्वीर पर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया. आर्ट एंड कल्चर विभाग की डॉ ताप्ती चटर्जी के निर्देशन में छात्र-छात्राओं ने वंदना गीत प्रस्तुत किया. दर्शनशास्त्र विभाग के डॉ कृष्ण मुरारी और अंग्रेजी विभाग के डॉ केएम सिंह ने बिनोद बाबू के जीवन संघर्ष और झारखंड आंदोलन में योगदान पर प्रकाश डाला. कुलसचिव डॉ राधानाथ त्रिपाठी ने उनके “पढ़ो और लड़ो” के नारे को शिक्षा दर्शन से जुड़ा बताया. कुलपति ने कहा कि बिनोद बाबू शिक्षा, खेल और संस्कृति प्रेमी थे. उन्होंने मजदूरों, विस्थापितों और गरीबों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया और झारखंड राज्य निर्माण में उनकी अहम भूमिका रही.

एसएसएलएनटी महिला कॉलेज :

एसएसएलएनटी महिला कॉलेज में प्राचार्या डॉ. शर्मिला रानी की अध्यक्षता में बिनोद बाबू और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती मना.यी गयी. प्राचार्या ने कहा कि बिनोद बाबू का नारा आज भी शिक्षा और सामाजिक न्याय का प्रतीक है, जबकि दिनकर की कविताएं देशभक्ति और स्वाभिमान की प्रेरणा देती हैं. मंच संचालन ऋषि रंजना और अनुशिखा अनु ने किया.

गुरुनानक कॉलेज :

गुरुनानक कॉलेज, भूदा कैंपस के सेमिनार हॉल में प्राचार्या डॉ रंजना दास के नेतृत्व में में बिनोद बाबू की जयंती मनायी गयी. प्रो. दीपक कुमार ने बिनोद बाबू की जीवनी और समाज सुधार में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला. एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर प्रो. दलजीत सिंह ने कहा कि उनके आदर्शों पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी. धन्यवाद ज्ञापन प्रो. संजय सिन्हा ने किया.

बीएसएस महिला महाविद्यालय :

बीएसएस महिला कॉलेज में आयोजित जयंती समारोह में प्राचार्या डॉ. करुणा ने बिनोद बाबू को शिक्षा प्रेमी और समाज सुधारक बताया. एनएसएस पदाधिकारी डॉ. दिलीप कुमार सिन्हा ने कहा कि बिनोद बाबू का “पढ़ो और लड़ो ” का नारा आज भी प्रासंगिक है, जबकि दिनकर की कविताएं भारतीय जनमानस को आज भी जागृत करती हैं.

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