DHANBAD NEWS : बिजली कटने पर महिला आश्रय गृह में हो जाता है अंधेरा, शाम होते ही घर चली जाती हैं केयर टेकर

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 26 Nov 2024 1:08 AM

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हाल धनबाद के आश्रय गृह का : कहीं बक्से में बंद है कंबल, तो कहीं सुरक्षा का नहीं है कोई इंतेज़ाम

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धनबाद में ठंड का असर दिखने लगा है. ठंड से बचने के लिए लोगों के शरीर पर गर्म कपड़े दिख रहे हैं. धनाढ्य लोगों के पास ठंड से बचने के पर्याप्त इंतजाम है, दूसरी ओर गरीबों के लिए शहर में बने आश्रय गृह का हाल अच्छा नहीं है. इस वजह से कई लोग ठंड में सड़क किनारे, रेलवे स्टेशन और बस डिपो में रात गुजारने को विवश हैं. देख-रेख के अभाव में जर्जर आश्रय गृह में इंतजामों की भी कमी दिखी. स्टील गेट के आश्रय गृह में कंबल बक्से के अंदर बंद मिले. यहां कई लोग बगैर कंबल के सोते दिखे. वहीं गोल्फ ग्राउंड के पास बने महिला आश्रय गृह में सुरक्षा की काफी कमी दिखी. यहां लाइट कटने पर अंधेरा हो जाता है. सोमवार की रात प्रभात खबर की टीम ने इन दोनों आश्रय गृह का जायजा लिया. पढ़ें शोभित रंजन व ज्योति की रिपोर्ट.

स्टील गेट आश्रय गृह : सो रहे लोगों के बजाय बक्से में था कंबल :

स्टेल गेट में सुपर स्पेशियलिटी परिसर में बने आश्रय गृह में मौजूद लोग बिना कंबल के सोये मिले. केयर टेकर से पूछने पर उन्होंने बताया कि लोगों को कंबल दे दिया गया है. मगर अपने कमरे में लोग बिना कंबल के सोये पाये गये. लोगों के पास चादर भी नहीं था. चादर, कंबल व मच्छरदानी केयर टेकर के चौकीनुमा बक्से में बंद मिला. पूछने पर केयर टेकर ने बताया कि कंबल लोगों को बाद में दिया जायेगा. वहीं आश्रय गृह के बाहर मौजूद लोगों ने बताया कि यहां उन्हें किसी प्रकार की कमी नहीं है. खाने पीने की व्यवस्था खुद करनी पड़ती है. आधे से ज्यादा बेड आश्रय गृह के खाली पड़े थे.

महिला आश्रय गृह : यहां रहने वाली महिलाएं रात में खुद लगाती हैं ताला :

गोल्फ ग्राउंड के पास बने महिलाओं के लिए आश्रय गृह में सुरक्षा की कमी दिखी. बाहर का गेट खुला मिला. अंदर का ग्रिल भी खुला था. इसमें बस ताला लटका था. कई बार आवाज देने के बाद भी अंडर से कोई निकल कर बाहर नहीं आया. कुछ देर बाद दो लड़कियां निकलीं. उन्होंने बताया की महिला आश्रय गृह की केयर टेकर अर्चना कुमारी हैं, जो शाम में पांच बजे ही अपने घर चली जाती हैं. दोनों लड़कियों ने बताया कि वे बाहर से अक्सर धनबाद आती रहती हैं. 25 रुपये दे कर आश्रय गृह में रुकती है. जब वे यहां रुकती हैं, तब वही रात में मेन गेट पर ताला लगाती हैं. यहां कुल 28 कमरे हैं.

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