10 बेड के एचडीयू में लटका है ताला, जेनरल वार्ड में रखकर किया जा रहा गंभीर मरीजों का इलाज

Published at :09 Jun 2024 1:06 AM (IST)
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10 बेड के एचडीयू में लटका है ताला, जेनरल वार्ड में रखकर किया जा रहा गंभीर मरीजों का इलाज

हाल एसएनएमएमसीएच का : गायनी वार्ड में भर्ती मरीजों को हो रही परेशनी, ना एसी है और ना ही पर्याप्त वेंटिलेटर का इंतजाम

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हाल एसएनएमएमसीएच का : गायनी वार्ड में भर्ती मरीजों को हो रही परेशनी, ना एसी है और ना ही पर्याप्त वेंटिलेटर का इंतजाम

संवाददाता, धनबादशहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल के गायनी वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. यहां लाखों रुपये खर्च कर तैयार किया गया हाइ डिपेंडेंसी यूनिट्स (एचडीयू) में ताला लगा हुआ है. वहीं दूसरी ओर एचडीयू के मरीजों को जेरनल वार्ड में रखकर इलाज किया जा रहा है. इससे गंभीर मरीजों को काफी परेशानी हो रही है. गायनी विभाग में 10 बेड का एचडीयू तैयार है, लेकिन इसे चालू नहीं किया गया है. गंभीर मरीजों काे जेनरल वार्ड में रखने से उनमें इंफेक्शन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. नये बने एचडीयू में काफी अच्छे इंतजाम हैं. कैथलैब के वेंटिलेटर को एचडीयू में लगाया गया है. साथ ही पाइप लाइन से ऑक्सीजन सप्लाई है. वार्ड के चालू होने पर गंभीर मरीजों काे फायदा होता. सितंबर 2022 में हैंडओवर हो चुका है एचडीयू : मामले में एसएनएमएमसीएच के प्राचार्य सह प्रभारी अधीक्षक डॉ ज्योति रंजन से पूछने पर उन्होंने बताया कि विभागाध्यक्ष से जानकारी मिली कि एचडीयू हैंडओवर हो चुका है. इसमें मरीजों को रखकर इलाज भी किया जा रहा है. वहीं शनिवार को प्रभात खबर की टीम अस्पताल पहुंची, तो एचडीयू में ताला लटक रहा था. वहीं संवेदक प्रशुन सेंगर ने बताया कि एचडीयू सितंबर 2022 में ही हैंडओवर कर दिया गया है. दूसरी तरफ विभागाध्यक्ष डॉ राज लक्ष्मी तुबिद से संपर्क किया गया, तो उन्होंने ने धनबाद से बाहर होने की बात कही. —–इधर, रास्ते को बना दिया गया पार्किंग, मरीजों को ले जाने में फंस जा रहा स्ट्रेचरइरमजेंसी से आइसीयू में जाने वाले रास्ते को लोगों ने पार्किंग बना दिया है. इस कारण स्ट्रेचर पर मरीजों को लाने और ले जाने में परेशानी झेलनी पड़ रही है. आइसीयू के सामने वाला मेन गेट को खोल दिया गया है. ऐसे में इरमजेंसी से इंडोर में मरीजों को ले जाने में सुविधा होती है. लेकिन रास्ते में कई बाइक दोनों ओर से खड़े कर दिये जाने से मरीजों को लाने ले जाना मुश्किल हो गया. बाइक में स्ट्रेचर फंस जा रहा है.

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