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Dhanbad News: बीबीएमकेयू कैंपस में पांच-पांच रुपये में मिलेगा चाय-समोसा

Updated at : 05 Jul 2025 12:53 AM (IST)
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Dhanbad News: बीबीएमकेयू कैंपस में पांच-पांच रुपये में मिलेगा चाय-समोसा

बीबीएमकेयू धनबाद में पहली बार विश्वविद्यालय प्रशासन ने पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा के आधार पर कैंटीन संचालन के लिए टेंडर किया है. ‘मून कैटरर’ नामक एजेंसी को टेंडर मिला है.

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धनबाद.

बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू), धनबाद में कैंपस कैंटीन को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है. पहली बार विश्वविद्यालय प्रशासन ने पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा के आधार पर कैंटीन संचालन के लिए टेंडर किया है. इसमें ‘मून कैटरर’ नामक एजेंसी ने सबसे कम दर कोट कर कैंटीन संचालन का टेंडर लिया है. नई व्यवस्था में कैंटीन संचालक को अस्थायी कैंटीन शेड खुद बनाना होगा, इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जगह उपलब्ध करायी जायेगी. शेड निर्माण और संचालन की तैयारी के लिए मून कैटरर को 15 दिन का समय दिया गया है. यह व्यवस्था तीन साल तक प्रभावी रहेगी या तब तक, जब तक विवि परिसर में स्थायी कैंटीन भवन नहीं बन जाता. इस नये कैंटीन टेंडर प्रणाली से छात्रों को किफायती दर पर खाद्य सामग्री मिलेगी.

कैंटीन मेनू में 64 खाद्य पदार्थ शामिल

नवचयनित एजेंसी ने कैंटीन में पांच रुपये प्रति पीस समोसा और पांच रुपये प्रति प्याला चाय की दर से सेवा देने का प्रस्ताव दिया है. कुल 64 खाद्य पदार्थों को कैंटीन मेनू में शामिल किया गया है. इनमें सभी पैकेट या बोतल बंद खाद्य या पेय पदार्थों को छोड़ अन्य सभी खाद्य सामग्री पर न्यूनतम दरें प्रस्तावित की गई हैं. वहीं पैकेट या बोतल बंद सामग्रियों की कीमत एमआरपी के अनुसार होगी.

अब तक 10 रुपये में मिलती थी चाय

फिलहाल विश्वविद्यालय कैंपस में समोसा, चाय और चॉप आदि 10 रुपये प्रति पीस की दर से बेची जा रही है. वहीं वर्तमान कैंटीन संचालकों को न तो किराया देना पड़ता है और न ही बिजली-पानी का शुल्क. अब नई व्यवस्था के तहत नये संचालक को प्रति वर्गफीट दो रुपये किराया देना होगा. वहीं मीटर के अनुसार बिजली बिल और पानी के लिए प्रति माह 500 रुपये भुगतान करना होगा.

विवादों के बाद बदली व्यवस्था

ज्ञात हो कि बीते तीन वर्षों में कैंटीन संचालन को लेकर कई विवाद सामने आये थे. पहले कैंटीन बिना टेंडर के संचालित होता रहा. विवि प्रशासन ना तो किराया लेता था और पानी-बिजली का शुल्क. ऐसे में कई बार पारदर्शिता की मांग उठी थी. इसे देखते हुए टेंडर प्रक्रिया अपनायी गयी. वर्तमान संचालक द्वारा बनाये गये कैंटीन शेड को हटाने के निर्देश दिये गये हैं, हालांकि यदि वह चाहे तो शेड को नये संचालक को हस्तांतरित कर सकते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ASHOK KUMAR

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