झरिया उप-डाकघर का पुराना भवन ध्वस्त, इंटरनेट की लाइन खराब, काम ठप

ध्वस्त हुआ झरिया का पुराना उप-डाकघर.
Sub-Post Office Collapsed in Jharia: झरिया उप डाकघर बिल्डिंग के पीछे पुराने भवन का पीछे का हिस्सा शुक्रवार को जोरदार आवाज के साथ ध्वस्त हो गया. सबसे पहले पुराने भवन की ओर आने-जाने पर रोक लगा दी गयी है. ध्वस्त भवन के मलबा से इंटरनेट की लाइन क्षतिग्रस्त हो गयी है, जिससे डाकघर का कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है.
Sub-Post Office Collapsed: झरिया थाना क्षेत्र के झरिया उप डाकघर बिल्डिंग के पीछे पुराने भवन का पीछे का हिस्सा शुक्रवार को जोरदार आवाज के साथ ध्वस्त हो गया. उससे पुराने भवन में रखे बंद अमलापाड़ा पोस्ट ऑफिस के खाताधारियों के कागजात मलबे में दब गये. संयोग अच्छा था कि हादसा सुबह-सुबह हआ. उप डाकघर में कोई कर्मचारी या ग्राहक मौजूद नहीं था. इसलिए बड़ा हादसा टल गया. घटना से कर्मचारियों में भय व्याप्त है, क्योंकि अभी भी नये भवन से सटे पुराने भवन का कुछ हिस्सा जर्जर हालत में है.
उप-डाकघर का कामकाज ठप
घटना के बाद उप डाकघर के सुरक्षा प्रहरी शक्ति ओझा ने इसकी सूचना प्रभारी पोस्ट मास्टर सुशील मुर्मू को दी. उसके बाद प्रभारी पोस्टमास्टर ने इसकी सूचना अपने विभाग के वरीय अधिकारियों को दी. सूचना पाकर धनबाद मंडल डाक निरीक्षक संतोष कुमार घटनास्थल पहुंचे और घटना जानकारी ली.

इंटरनेट की लाइन क्षतिग्रस्त, कामकाज ठप
उन्होंने सबसे पहले पुराने भवन की ओर आने-जाने पर रोक लगा दी. ध्वस्त भवन के मलबा से इंटरनेट की लाइन क्षतिग्रस्त हो गयी है, जिससे डाकघर का कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है. उससे खाताधारियों के लेनदेन समेत डाक छंटनी, रजिस्ट्री आदि कार्य बाधित रहे.
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ग्राहकों को नहीं होगी परेशानी : डाक निरीक्षक
इस संबंध में डाक निरीक्षक संतोष कुमार ने कहा कि निरीक्षण के दौरान देखा गया कि उप डाकघर का पुराना भवन काफी जर्जर अवस्था में था. यह बनने लायक भी नहीं है. जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ है. इसकी रिपोर्ट बनाकर मंडल कार्यालय को सौंपेंगे. उन्होंने कहा कि मलबे में जो कागजात दबे हैं, वह कंप्यूटर में लोड है. ग्राहकों को कोई परेशानी नहीं होगी. अभी भी पुराने भवन की दीवारों और छत में बड़ी-बड़ी दरारें स्पष्ट दिखाई दे रही हैं.

जान जोखिम में डालकर काम करते हैं लोग : एजेंट
उधर,, एजेंट मनीष कुमार ने बताया कि पोस्ट ऑफिस के कर्मचारी प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को विवश हैं. इसके बावजूद न तो डाक विभाग और न ही स्थानीय प्रशासन इस ओर ध्यान दे रहा है.
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By Mithilesh Jha
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