बीबीएमकेयू प्रशासन दो वर्ष में नहीं ढूंढ पाया एक भी शोधार्थी, स्कॉलरशिप का पैसा लैप्स

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राज्य सरकार ने 2022 में रिसर्च गतिविधियों के लिए दिया था 50 लाख रुपया, नैक कराने लिए मिले एक करोड़, नये अंगीभूत कॉलेजों के लिए आये 1.5 करोड़ रुपये भी वापस

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बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय प्रशासन पिछले दो वर्षों में एक भी ऐसा गरीब शोधार्थी नहीं ढूंढ पाया, जिसे राज्य सरकार की ओर से पांच हजार रुपये मासिक की स्कॉलरशिप दी जा सके. राज्य सरकार ने 2022 में बीबीएमकेयू प्रशासन आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शोध कार्य के लिए प्रोत्साहित करने के लिए स्कॉलरशिप योजना के तहत 50 लाख रुपये का फंड दिया था. इस योजना का लाभ शोध कार्य से जुड़े विवि के शिक्षकों के भी उठाने का प्रावधान था. राज्य सरकार ने पिछले माह इस पैसे को वापस ले लिया है.

विवि से हुई है चूक :

इस मामले में विवि प्रशासन से भी चूक हुई है. विवि प्रशासन द्वारा इस योजना की जानकारी शोधार्थियों तक नहीं पहुंचायी गयी थी. अभी विवि में करीब 150 से अधिक शोधार्थी पीएचडी कर रहे हैं. वह इस योजना का लाभ उठा सकते थे. लेकिन जानकारी नहीं होने से एक भी शोधार्थी ने इसके लिए आवेदन नहीं किया. वहीं विवि का कोई भी शिक्षक अपना स्वतंत्र शोध नहीं कर रहा है, इस वजह से उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला.

नैक के लिए मिले एक करोड़ रुपये भी लैप्स :

विवि के कॉलेजों को नैक कराने के लिए 2022 में एक करोड़ रुपये का फंड राज्य सरकार ने दिया था. लेकिन इस राशि को भी कॉलेजों को आवंटित नहीं की गयी. इस वजह से यह राशि भी लैप्स कर गयी. सरकार ने इस राशि को पिछले महीने वापस ले लिया.

नये कॉलेजों को मिले 1.5 करोड़ रुपये भी वापस :

इन राशियों के साथ बीबीएमकेयू अधीन खुले तीन नये अंगीभूत कॉलेजों (डिग्री कॉलेज टुंडी, डिग्री कॉलेज झरिया और डिग्री कॉलेज गोमिया) में लैब और लाइब्रेरी के विकास के लिए मिला 1.5 करोड़ रुपये भी लैप्स कर गये. तीनों कॉलेजों के लिए राज्य सरकार ने 50 – 50 लाख रुपये का फंड 2022 में आवंटित किया था. लेकिन 2024 तक इसका उपयोग नहीं होने के कारण, राज्य सरकार ने इसे वापस ले लिया.

इस नियम के कारण फंड हुआ लैप्स :

राज्य सरकार ने सभी फंड विवि के पीएल खाता में दिया था. इस खाता में आने वाली राशि को दो वर्ष में उपयोग कर उपयोगिता प्रमाणपत्र राज्य सरकार को भेजना होता है. उपयोग नहीं करने पर फंड को राज्य सरकार वापस ले लेती है. इस मामले में यहीं हुआ है. इनका उपयोग नहीं कर पाने के कारण विवि प्रशासन को इसे राज्य सरकार को लौटाना पड़ा है. बताया जा रहा है कि करीब तीन करोड़ रुपये की राशि राज्य सरकार ने वापस ले ली है.

कोट

राज्य सरकार से पीएल खाता में मिलने वाले फंड का दो वर्ष में उपयोग करना होता है. अगर इसका उपयोग नहीं होता है, तो इसे वापस करना होता है. इस मामले में भी यहीं हुआ है. इन पैसाें को वापस पाने के लिए विवि फिर से प्रस्ताव भेजेगी.

डॉ शिव प्रसाद,

वित्त अधिकारी, बीबीएमकेयू

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