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आयकर कार्यालय अग्निकांड में रमेश गांधी समेत तीन बरी

Updated at : 30 Jul 2024 2:23 AM (IST)
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आयकर कार्यालय अग्निकांड में रमेश गांधी समेत तीन बरी

अदालत से : 1993 में हुई थी घटना, सीबीआइ को झटका

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धनसार थाना क्षेत्र के जोड़ाफटक स्थित आयकर कार्यालय में आग लगाकर जब्त दस्तावेज को जला कर राख कर देने के मामले में सोमवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश रजनीकांत पाठक की अदालत ने अपना फैसला सुनाया. अदालत ने पूर्व कोल कारोबारी रमेश गांधी, उनके भाई राजेश गांधी व विजय कुमार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया. अदालत ने फैसला सुनाते वक्त कहा कि इस मामले में सीबीआई केस साबित करने में असफल रही है. फैसला सुनाये जाने के समय अदालत में सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक मुरारी कुमार आर्य भी मौजूद थे. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता एस एन मुखर्जी व सुरेश मिश्रा ने पैरवी की. क्या है मामला : वर्ष 1993 में आयकर विभाग के अधिकारियों ने रमेश गांधी और राजेश गांधी के प्रतिष्ठान व कार्यालय में छापामारी कर एक करोड़ 47 लाख रुपये का आयकर बकाया से संबंधित दस्तावेज को जब्त किया था. इसे आयकर कार्यालय जोड़ाफटक धनबाद में रखा गया था. छह मार्च 1993 को आयकर अधिकारियों द्वारा अभियुक्तों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था. पूछताछ के बाद उनके सामने जब्त दस्तावेज को कार्यालय की अलमीरा में रखा गया. नौ मार्च 1993 की रात अचानक आयकर कार्यालय में आग लग गयी. इस कारण जब्त दस्तावेज जल कर राख हो गये. प्रमोद कुमार ने इस मामले में धनसार थाना में कांड संख्या 159/93 दर्ज करायी थी. बाद में पुलिस ने इस मामले में अदालत में एफआरटी भेज दिया. हालांकि एफआरटी स्वीकार होने के पहले ही राज्य सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई को करने की स्वीकृति प्रदान कर दी. सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की. सीबीआई ने अनुसंधान के उपरांत रमेश गांधी उनके भाई राजेश गांधी, कोल कारोबारी सुरेश सिंह व विजय कुमार के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था. ट्रायल फेस करने के दौरान सुरेश सिंह की मौत हो गयी थी. इस वजह से उनके खिलाफ चल रहा मामला बंद कर दिया गया.

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दहेज हत्या में पति और देवर को 10 वर्ष कैद

दहेज के लिए विवाहिता की हत्या के मामले में धनबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीकांत पाठक की अदालत ने सोमवारी को मुजरिम चिरकुंडा निवासी शिबू रविदास (पति) व इंद्रदेव रविदास (देवर) को 10-10 वर्ष कैद की सजा सुनायी है. अभियोजन का संचालन लोक अभियोजक अवधेश कुमार ने किया. प्राथमिकी मृतका की मां की शिकायत पर पांच जून 2018 को चिरकुंडा थाने में दर्ज की गयी थी. इसके मुताबिक मृतका अनिता कुमारी की शादी 30 अप्रैल 2015 को शिबू रविदास के साथ हुई थी. शादी के तीन माह के बाद ही दहेज के लिए उसे प्रताड़ित किया जाने लगा था. आरोप था कि तीन जून 2018 को शिबू ने अपने ससुर को फोन कर गाली गलौज की और कहां की तुम लोग से बुलेट मोटरसाइकिल मांग रहे थे, अब तक नहीं दिया. अब तुम्हारा बेटी को मार देंगे, आकर लाश ले जाना. दूसरे दिन पुलिस ने उसे सूचना दी कि उसकी बेटी की मौत हो गयी है.

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