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EXCLUSIVE: …जब हिल गए पंडित जवाहर लाल नेहरू, अपने राजनीतिक सचिव पीआर चक्रवर्ती को चुनाव लड़ने भेजा धनबाद

Updated at : 24 Apr 2024 3:27 PM (IST)
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निरसा के 3 बार विधायक रहे कृपा शंकर चटर्जी. प्रभात खबर

एक जमाना था जब ऐसे लोग राजनीत में आते थे, चुनाव लड़ते थे, जिनका लोग दिल से सम्मान करते थे. डीवीसी के 4 डैम से हुए विस्थापन ने पंडित नेहरू को हिला दिया था.

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झारखंड प्रांत की राजनीति में एक ऐसा भी वक्त आया था, जब देश के प्रथम प्रधानमंत्री हिल गए थे. उन्हें अपने राजनीतिक सचिव पीआर चक्रवर्ती को चुनाव लड़ने के लिए धनबाद भेजना पड़ा था. ये वो जमाना था, जब चुनाव लड़ने वालों की इज्जत होती थी. सम्मानित लोग चुनाव लड़ने के लिए आगे आते थे.

धनबाद के निरसा से 3 बार विधायक बने कृपा शंकर चटर्जी

प्रभात खबर (prabhatkhabar.com) के वरिष्ठ पत्रकार संजीव झा के साथ खास बातचीत में निरसा के 3 बार विधायक रहे कृपा शंकर चटर्जी ने ये बातें कहीं. कृपा शंकर चटर्जी 2 बार मासस के टिकट पर विधायक चुने गए. एक बार वह कांग्रेस के टिकट पर चुनकर बिहार विधानसभा पहुंचे. उन्होंने 1952 और उसके बाद के कई चुनावों की कहानी हमें बताई. इसमें उन्होंने बताया कि तब किस तरह के लोग राजनीति में आते थे, चुनाव लड़ते थे.

मासस और कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे कृपा शंकर चटर्जी

कांग्रेस के जिला अध्यक्ष, मजदूर यूनियन के नेता और बिहार प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री रहे कृपा शंकर चटर्जी कहते हैं कि पहले ऐसे लोग चुनाव लड़ते थे, जिनका लोग दिल से सम्मान करते थे. ऐसे ही लोग चुनाव लड़ने का सपना भी देखते थे. उन्होंने बताया कि 1952 के पहले लोकसभा चुनाव में हुआ, तो प्रभात चंद्र बोस जैसे लोग चुनाव जीतकर सांसद बने.

डीवीसी ने बनाए 4 डैम, विरोध से हिल गए थे जवाहर लाल नेहरू

उन्होंने दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (डीवीसी) की ओर से एक साथ 4 डैम बनाने के बाद उत्पन्न हुए हालात के बारे में भी बताया. उन्होंने बताया कि जब मैथन, कोनार और पंचेत समेत 4 डैम बनाए जाने की वजह से बड़ी संख्या में लोग बेघर हुए. विस्थापन के बाद एसआरसी (स्टेट री-ऑर्गेनाइजेशन कमीशन) ने फजर अली कमीशन, पणिक्कर कमीशन, बिंजू कमीशन का गठन किया. इससे नेहरू जी हिल गए. इसके बाद ही पंडित नेहरू ने अपने राजनीतिक सचिव पीआर चक्रवर्ती को चुनाव लड़ने के लिए धनबाद भेजा.

गांवों में वोट के प्रति नहीं थी जागरूकता

हमारे जमाने में गांवों में बहुत जागरूकता नहीं थी. चुनाव के दौरान भाषा और बोली बहुत बड़ी बाधा थी. आज भी संताल परगना और धनबाद में अलग-अलग भाषा में खतियान लिखी जाती है. यहां के लोग बांग्ला बोलते थे, खोरठा भी बोलते थे. उन्होंने बताया कि राज्यों का जब बंटवारा हुआ, तो बांग्ला बोलने वाले लोग बड़ी संख्या में थे, जो पुरुलिया चले गए.

अकबर ने वीर मान सिंह को झारखंड में दी थी बड़ी जागीर

उन्होंने बताया कि आज बहुत से लोगों को नहीं मालूम कि मानभूम कोई जिला भी था. लेकिन, यह था. उन्होंने बताया कि सम्राट अकबर के राज में वीर मान सिंह को जागीर के रूप में बड़ा भू-भाग मिला था. इनके नाम पर ही वीरभूम, मानभूम और सिंहभूम बने. राजा वीर मान सिंह से ही ये तीनों इलाके निकले हैं. वीर से वीरभूम, मान से मानभूम और सिंह से सिंहभूम.

रामगढ़ की महारानी ललिता राजलक्ष्मी ने लड़ा था धनबाद से चुनाव

उन्होंने बताया कि पीआर चक्रवर्ती के बाद रामगढ़ की महारानी ललिता राजलक्ष्मी ने धनबाद से लोकसभा का चुनाव लड़ा. वह बीकेटी के टिकट पर चुनाव लड़ीं. इसी दौरान स्थानीय राजनीति शुरू हुई. रामगढ़ की महारानी के चुनाव के प्रचार की कमान झरिया और कतरास के राजाओं ने संभाली थी. ललिता राजलक्ष्मी ने प्राण प्रसाद के खिलाफ चुनाव लड़ा था.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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