Dhanbad News : पोखरिया आश्रम : 53 वर्ष बाद भी मूल स्वरूप से नहीं हुई छेड़-छाड़

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Dhanbad News : पोखरिया आश्रम : 53 वर्ष बाद भी मूल स्वरूप से नहीं हुई छेड़-छाड़

आज भी खपड़ैल का है कमरा जिसमें रहकर दिशोम गुरु ने महाजनी प्रथा के खिलाफ छेड़ा था आंदोलन

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टुंडी प्रखंड का पोखरिया आश्रम जिसने दिशोम गुरु को अलग पहचान दिलायी. यहां से गुरुजी ने वर्ष 1972 में महाजनी प्रथा के खिलाफ अभियान छेड़ा था. उसके मूल स्ट्रक्चर से 53 वर्ष बाद भी कोई छेड़-छाड़ नहीं की गयी है. यह कमरा आज भी खपड़ैल वाला ही है. उनकी यादों को सहेज कर रखा गया है.

अलग राज्य बनने के बाद समय-समय पर पोखरिया आश्रम की तस्वीर बदलने के लिए कई योजनाएं ली गयी. विकास के कई काम हुए. लेकिन, जिस मकान में रह कर दिशोम गुरु ने पूरे आंदोलन का नेतृत्व किया. उसे मूल स्वरूप में ही बचाये रखने की कोशिश की जा रही है. इस मकान में गुरुजी के कोई पारिवारिक सदस्य नहीं रहते. बल्कि उनकी देखभाल करने वाले श्यामलाल मुर्मू (अब दिवंगत) के परिजन रहते हैं. इस कैंपस में सामुदायिक केंद्र बनाया गया. संयोग से इसका उद्घाटन भी दिशोम गुरु ने वर्ष 2011 में किया था. इसके बगल में एक आदिवासी सांस्कृतिक कला केंद्र बनाया गया है, जो अभी शुरू नहीं हुआ है.

सामानांतर सरकार में शिक्षा व शराबबंदी पर था जोर

1970 के दशक में भूमिगत रहते हुए शिबू सोरेन ने गिरिडीह और धनबाद जिले में एक ऐसी समानांतर सरकार बनायी, जो न सिर्फ व्यवस्था चलाती थी, बल्कि विकास का अपना मॉडल भी पेश करती थी. उस दौर में उन्होंने शराबबंदी, सामूहिक खेती और रात्रि पाठशाला जैसे कदम उठाकर एक मिसाल कायम की थी. उनका फोकस ग्रामीणों को शिक्षित बनाने व नशा से दूर करने की थी. सामानांतर सरकार में शिबू सोरेन खुद मुख्यमंत्री की भूमिका में थे. अपने मंत्रिमंडल में गृह व उत्पाद मंत्री गांडेय के बसंत पाठक, कृषि मंत्री जामताड़ा के झगरू पंडित, और शिक्षा मंत्री टुंडी के राजेंद्र तिवारी को बनाया था. विधानसभाध्यक्ष थे टुंडी के कोशवा टुडू और महामंत्री थे कीनू मांझी.

शराबबंदी को दिये जाते थे शारीरिक व आर्थिक दंड

शराब पर पूर्ण प्रतिबंध इस सरकार का पहला बड़ा फैसला था. शराबियों को शारीरिक और आर्थिक दंड दिया जाता था. खेती में शिबू सोरेन ने सामूहिक मॉडल अपनाया. बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर आधुनिक तकनीक से खेती करायी गयी. रात्रि पाठशालाओं के माध्यम से निरक्षर आदिवासियों को पढ़ना-लिखना सिखाया गया. इन प्रयासों ने ग्रामीण समाज में शिक्षा और जागरूकता की लहर पैदा की.

पोखरिया में हर आंखें थी नम

दिशोम गुरु के निधन की सूचना से पूरे टुंडी प्रखंड में गम का माहौल है. मनियाडीह जहां पोखरिया आश्रम है के लोग गमगीन हैं. आश्रम में रहने वाले चाहते हैं कि झारखंड सरकार इस आश्रम को विकसित करे. इसे हैरिटेज बनाये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Narendra Kumar Singh

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