Dhanbad News : बच्चों की थाली से गायब हो गये मड़ुवा के लड्डू और हलवा
Published by : NARENDRA KUMAR SINGH Updated At : 11 Jul 2025 2:09 AM
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प्रभात खास : एमडीएम की थाली में मोटा अनाज शामिल करने के लिए सिर्फ एक बार पैसा देकर भूल गयी सरकार
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एमडीएम में अतिरिक्त पोषाहार के रूप में बच्चों को दिये जाने वाले मड़ुआ के लड्डू या हलवा बच्चों की थाली से गायब हो गये हैं. राशि आवंटित नहीं होने के कारण धनबाद, बोकारो, गिरिडीह के साथ राज्य के लगभग सभी जिलों में कमोबेश यही स्थिति है. कुछ विद्यालयों ने फंड आने की उम्मीद में कुछ समय तक इस योजना को चलाया, लेकिन सरकार राशि आवंटित करना भूल गयी. इसके बाद स्कूलों में इसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया.
क्या थी योजना :
अक्तूबर 2023 में मोटा अनाज के फायदा को समझते हुए सरकार ने बच्चों की थाली में मड़ुआ का लड्डू या हलवा शामिल करने की योजना बनायी. राज्य के 29 लाख 27 हजार 740 बच्चों के थाली में मड़ुआ का लड्डू या हलवा के लिए नौ करोड़ 72 लाख 968 रुपये आवंटित किया गया था. इसके लिए 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य से राशि आवंटित की गयी. इसके बाद योजना को चालू रखने के लिए न ही केंद्र की ओर से और न ही राज्य की ओर से पहल की गयी.सप्ताह में एक दिन देना था मोटा अनाज :
सप्ताह में एक दिन बच्चों की थाली में मोटा अनाज देना था. शुरुआत में जोरशोर से इसे चालू किया गया. लड्डू या हलवा बनाने की पूरी जानकारी दी गयी थी. इसी के अनुसार सामग्री तैयार की जा रही थी. इसके प्रति बच्चों में उत्साह भी था. लेकिन राशि के अभाव में पिछले दो माह से बच्चों को मड़ुआ का लड्डू या हलवा नहीं मिल पाया है. मड़ुआ आटा में 80 फीसदी कैल्शियम पाया जाता है. यह आयरन का भी मुख्य स्रोत है. मड़ुआ विटामिन डी का भी अच्छा स्रोत माना जाता है. बच्चों को इसका फायदा मिलता. बच्चों को मड़ुआ का हलवा या लड्डू दोनों में से क्या दिया जाए, इसका निर्णय विद्यालय स्तर पर बच्चों की पसंद के आधार पर लिया जाना था. सभी जिला शिक्षा अधीक्षक को इस संबंध में प्रतिमाह आठ तारीख को रिपोर्ट देने व त्रैमासिक रिपोर्ट 15 तारीख को देने को कहा गया था. सभी विद्यालयों में रागी का हलवा या लड्डू का देते हुए इसका फोटो भी मुख्यालय को भेजा जा रहा था.धनबाद को 43 लाख रुपये का मिला था फंड :
जिले के एक लाख 29 हजार 494 बच्चों को मड़ुआ का हलवा या लड्डू खिलाने के लिए 42 लाख 99 हजार 201 रुपये आवंटित किया गया था. इसमें केंद्र से 25 लाख 79 हजार 512 रुपये और राज्य से 17 लाख 19 हजार 680 रुपये का आवंटन दिया गया था. प्रति छात्र 4.15 रुपये पड़ा था. वहीं गिरिडीह के दो लाख 51 हजार 409 बच्चों के लिए 83 लाख 46 हजार 779 रुपये और बोकारो के एक लाख 10 हजार 387 बच्चों के लिए 36 लाख 64 हजार 848 रुपये राशि दी गयी थी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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