स्वीकार्यता बढ़ाकर ही विकसित होता है नेतृत्व, इसे थोपा नहीं जा सकता : प्रो मिश्रा

Updated at : 25 Jun 2024 2:07 AM (IST)
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स्वीकार्यता बढ़ाकर ही विकसित होता है नेतृत्व, इसे थोपा नहीं जा सकता : प्रो मिश्रा

आइआइटी आइएसएम में विभिन्न संस्थानों के शिक्षकों के प्रशिक्षण का समापन

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धनबाद.

आइआइटी आइएसएम में देश भर के विभिन्न तकनीकी और शैक्षणिक संस्थानों के 18 शिक्षकों के पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन सोमवार को हो गया. इस कार्यशाला में शिक्षकों ने शिक्षण की बारीकियां सीखी. इसमें बातचीत कौशल विकसित करना, प्रभाव और अनुनय, नेतृत्व प्रेरणा और प्रभावी प्रदर्शन लिंक को समझना, संचार कौशल-मौखिक, व्यक्तिगत और संगठनात्मक विकास के लिए सीखने की मानसिकता की संस्कृति बनाना शामिल हैं. समापन सत्र को संबोधित करते हुए आइआइटी धनबाद के निदेशक प्रो सुकुमार मिश्रा ने कहा कि शिक्षा या किसी अन्य क्षेत्र में नेतृत्व लोगों के बीच स्वीकार्यता बढ़ाकर ही विकसित होता है. इसे थोपा नहीं जा सकता है. कार्यशाला में एनआइटी जमशेदपुर, एनआइटी सिक्किम, एनआइटी श्रीनगर, एनआइटी वारंगल, आइआइटी जोधपुर, एनआइटी पुडुचेरी, बीएचयू और सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर के शिक्षकों ने हिस्सा लिया.

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