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स्वच्छता का ख्याल रखें बेटियां,समस्या होने पर झिझकें नहीं,पहले मां को बितायें,फिर चिकित्सक से मिलें

Updated at : 18 May 2024 2:59 PM (IST)
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स्वच्छता का ख्याल रखें बेटियां,समस्या होने पर झिझकें नहीं,पहले मां को बितायें,फिर चिकित्सक से मिलें

खालसा उच्च विद्यालय में प्रभात खबर के स्वास्थ्य जागरूकता अभियान में चिकित्सक ने छात्राओं को दिये सुझाव

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उप मुख्य संवाददाता, धनबाद,

बैंकमोड़ स्थित खालसा उच्च विद्यालय में शुक्रवार को प्रभात खबर की ओर से छात्राओं के लिए हेल्थ अवेयरनेस कैंप स्वस्थ बेटियां खुशहाल परिवार का आयोजन किया गया. इसमें स्कूल की नौंवी व 10वीं कक्षा की 120 छात्राएं शामिल हुईं. शहर की वरिष्ठ स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ नीतू सहाय की बेटियों को किशोरावस्था में होनेवाली समस्या, समाधान के साथ वैक्सीनेशन की जानकारी दी. छात्राओं ने अपनी समस्या से चिकित्सक को अवगत कराया. चिकित्सक ने न सिर्फ उनके सवालों का जवाब दिया, बल्कि अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने के टिप्स भी दिये. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर झिझकें नहीं, पहले मां को बतायें, फिर चिकित्सक से मिलें. मौके पर स्कूल की शिक्षिका प्रेमी दुबे, ज्योति कुमारी व सृष्टि कुमारी उपस्थित थीं. सभी ने कार्यक्रम की सराहना की. उन्होंने भी कई सवाल पूछे.

जो समस्या सामने आयी : छात्राओं ने कई समस्याओं को चिकित्सक के समक्ष रखा और उससे संबंधित जानकारी ली. छात्राओं ने पीरियड्स, व्हाइट डिस्चार्ज से संबंधित सवाल पूछे. हाइट का नहीं बढ़ना, पीरियड्स की तारीख में अंतर से जुड़े सवाल पूछे.

बेटियों ने जताया आभार : स्कूल की छात्राओं ने कहा कि आज का कार्यक्रम हमारे लिए बहुत ही उपयोगी रहा. हमारे मन में कई जिज्ञासा थी जिसे चाह कर भी किसी से शेयर नहीं कर पा रही थी. चिकित्सक ने हमारी जिज्ञासा को शांत किया. हमें स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी. प्रभात खबर का आभार. चिकित्सक ने दिया सुझाव : डॉ नीतू सहाय ने छात्राओं के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भारतीय परिवेश में 11 से 13 साल की उम्र में पीरियड्स शुरू होता है. यह सामान्य प्रक्रिया है. हालांकि बदलते लाइफ स्टाइल व पर्यावरण में प्रदूषण के कारण नौ साल में भी पीरियड्स शुरू हो जा रहा है. अगर 16 साल की उम्र तक बेटियों को पीरियड्स नहीं आया, तो चिकित्सक से मिलें. बढ़ती बेटियों को मां पहले से पीरियडस की जानकारी दें, ताकि जब पीरियड्स आये, तो बेटी घबराये नहीं. पीरियड्स आने के पहले पेट दर्द की समस्या होती है. अधिक होने पर चिकित्सक से सलाह लेकर दवा लें. माह के खास दिनों में स्वच्छता का ख्याल रखें. सेनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल करें. पांच से छह घंटे में उसे बदलें. पीरियडस के पहले व्हाइट डिस्चार्ज होता है, अगर यह ज्यादा हो, इंचिग हो रहा हो तो अपने परिजन को बतायें. पौष्टिक व संतुलित आहार लें. नियमित योग करें. 10 से 12 गिलास पानी पीयें. यूटीआई इंफेक्शन से बचें : ई- कोलाई बैक्टीरिया के कारण यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) होता है. बेटियों में यूटीआइ होना कॉमन है. इंफेक्शन होने से ठंड के साथ बुखार आना, यूरीन के साथ ब्लड आना, उल्टी आदि की समस्या हो सकती है. इससे बचने के लिए माहवारी के समय गंदे पैड का इस्तेमाल न करें. स्वच्छता का ध्यान न रखें. अगर यूटीआइ इंफेक्शन हो गया है, तो इसे हल्के में न लें. चिकित्सक से मिलें. इंफेक्शन किडनी तक फैल सकता है. इसका प्रभाव आगे भी स्वास्थ्य पर पड़ सकता है. इंफेक्शन का सोर्स गंदगी होता है, इसलिए स्वच्छता का पूरी तरह ध्यान रखना जरूरी है. खूब पानी पीयें. पानी का कम सेवन भी इंफेक्शन का कारण हो सकता है. यूरिन पास करने की जरूरत हो, तो उसे रोंके नहीं. टाॅयलेट का इस्तेमाल करते समय पानी डाल दें. आयरन युक्त आहार लें : बढ़ती हुई उम्र में बेटियों को खाने में आयरन, विटामिन व मिनरल की जरूरत अधिक होती है. आयरन के लिए पालक, गुड़, खजूर, बीट, मोटा अनाज व आलू, सेव खायें. विटामिन सी के लिए नींबू, हरी मिर्च व आंवला का उपयोग करें. गुड़ में नींबू का रस मिलाकर शरबत बनाकर सेवन करें. फास्ट फूड व जंक फूड से परहेज करना चाहिए. पिज्जा, बर्गर, चाउमिन, पास्ता व कोल्ड ड्रिंक्स का इस्तेमाल नहीं करें. फास्ट व जंक फूड से मोटापा, अनियमित मासिक, खून की कमी, लंबाई का नहीं बढ़ना जैसी समस्या होती है. प्राचार्य बोलें : बेटियों में जरूरी है जागरूकता :मौजूदा समय में बेटियों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता जरूरी है. प्रभात खबर की ओर से बेटियों के लिए हेल्थ अवेयरनेस प्रोग्राम चलाया जा रहा है, जो प्रशंसनीय है. इस उम्र में बच्चियों में झिझक होती है. ऐसे कार्यक्रम के माध्यम से उनकी समस्या का समाधान होगा, तो झिझक मिटेगी. राम नरेश मिश्रा, प्राचार्य, खालसा उच्च विद्यालयशिक्षिका ने कहा : बेहतर आयोजनस्वास्थ्य को लेकर बहुत ही सार्थक पहल प्रभात खबर द्वारा किया जा रहा है. बढ़ती बेटियों को सही मार्गदर्शन व स्वास्थ्य संबंधी समस्या का निराकरण जरूरी है. प्रभात खबर का जागरूकता अभियान सराहनीय है. प्रेमी दुबे, शिक्षिका

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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