Dhanbad News : कोलकर्मी की मृत्यु पर महिला आश्रितों को अब वैवाहिक स्थिति की परवाह किये बिना मिलेगा रोजगार

Edited by MANOJ KUMAR
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Dhanbad News : कोल इंडिया व अनुषंगी कंपनियों के साथ एनएलसीआइएल में बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी

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Dhanbad News : राज्यसभा में कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने कोयला क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं. उन्होंने बताया कि अब कर्मचारी की मृत्यु होने पर महिला आश्रितों को उनकी वैवाहिक स्थिति की परवाह किये बिना नियोजन (अनुकंपा नियुक्ति) में शामिल किया जायेगा. यह निर्णय कोल इंडिया के लिए एक ऐतिहासिक परिवर्तन है, जो पहले लागू नहीं था.

उन्होंने बताया कि महिला सशक्तीकरण की दिशा में कोल इंडिया व उसकी सहायक कंपनियां लैंगिक समानता व संस्थागत उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए अनेक कदम उठा रही हैं. राज्यसभा में मंत्री ने बताया कि कोयला क्षेत्र में महिलाओं को तकनीकी, स्वास्थ्य सेवा, नियोजन व नेतृत्व जैसे विविध क्षेत्रों में सशक्त किया जा रहा है.

तकनीकी व नेतृत्व की नयी मिसाल :

कोल इंडिया के आइआइसीएम संस्थान ने ‘ज्योति-एक साथ उठना, मार्ग प्रशस्त करना’ नामक महिला नेतृत्व विकास कार्यक्रम शुरू किया है. यह पांच महीने का संरचित प्रशिक्षण संचार, निर्णय क्षमता, नेतृत्व विकास और नेटवर्किंग पर केंद्रित है. बीसीसीएल धनबाद में महिला तकनीशियनों द्वारा संचालित एलइडी व सौर ऊर्जा उपकरणों की मरम्मत के लिए तकनीकी केंद्र की शुरुआत की गयी है. जबकि एसइसीएल की गेवरा खदान में महिलाओं द्वारा संचालित स्थिति आधारित निगरानी प्रयोगशाला स्थापित की गयी है. वहीं एनसीएल सिंगरौली मुख्यालय में लागत व बजट प्रकोष्ठ महिलाओं द्वारा प्रबंधित किया जा रहा है.

खनन और बचाव कार्यों में महिला भागीदारी :

महिलाओं को अब भूमिगत खनन कार्यों के लिए ‘खनन सरदार’ योग्यता प्रमाणपत्र के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है. डब्ल्यूसीएल की 19 महिला कर्मचारी, एमसीएल की 9 महिला कर्मचारियों को अब तक बचाव एवं पुनर्प्राप्ति कार्य का प्रशिक्षण दिया जा चुका है. वहीं एनएलसीआइएल ने भी इस दिशा में प्रभावशाली कदम उठाए है. वर्तमान में उसकी खदानों में 190 महिलाएं कार्यरत हैं, जिनमें से 48 कार्यकारी पदों पर है. इतिहास में पहली बार एनएलसीआइएल ने महिलाओं को मुख्य खनन कार्यों जैसे सर्वेक्षक, खनन सरदार व ओवरमैन पदों पर नियुक्त किया है.

लैंगिक समानता के लिए संरचनात्मक बदलाव :

सभी आंतरिक समितियों में महिला प्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य की गई है. पोश अधिनियम 2013 के तहत सभी इकाइयों में आंतरिक शिकायत समितियां (आइसीसी) गठित की गयी हैं, जो कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करती है.

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