Dhanbad News: हर साल 2000 इंजीनियर तैयार कर रहा धनबाद

Edited by ASHOK KUMAR
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आइआइटी आइएसएम, बीआइटी सिंदरी और केके कॉलेज मिलकर देश-दुनिया को दे रहे प्रतिभाशाली इंजीनियर.

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धनबाद.

झारखंड की औद्योगिक राजधानी धनबाद सिर्फ कोयला नगरी ही नहीं, बल्कि इंजीनियरों की नगरी के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर चुका है. यहां से हर साल करीब 2000 इंजीनियर तैयार होकर देश- विदेश की बड़ी कंपनियों में अपना परचम लहरा रहे हैं. यहां तीन प्रमुख संस्थान आइआइटी आइएसएम धनबाद, बीआइटी सिंदरी और केके कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट मिलकर इंजीनियर तैयार कर रहे हैं.

आइआइटी आइएसएम : शताब्दी वर्ष में नई ऊंचाइयों पर

धनबाद का आइआइटी आइएसएम इंजीनियरिंग शिक्षा व शोध के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान रखता है. वर्ष 1926 में स्थापित यह संस्थान अब शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है. संस्थान में 18 विभाग हैं और कुल 1210 सीटें उपलब्ध हैं.

खनन शिक्षा के क्षेत्र में आइआइटी आइएसएम की खासी प्रतिष्ठा है. यहां से निकले छात्र आज कई बड़ी खनन कंपनियों में सीईओ और सीएमडी जैसे अहम पदों पर कार्यरत हैं. पिछले कुछ वर्षों में संस्थान ने कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और पेट्रोलियम जैसे विभागों में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. आइआइटी आइएसएम को देश के प्रमुख शोध संस्थानों में गिना जाता है.

बीआइटी सिंदरी: इंजीनियरों की फैक्ट्री

धनबाद का दूसरा प्रमुख संस्थान है बिरसा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआइटी) सिंदरी. वर्ष 1949 में स्थापित इस कॉलेज को ‘इंजीनियरों की फैक्ट्री’ भी कहा जाता है. झारखंड सरकार के अधीन संचालित इस संस्थान में 11 विभाग हैं और कुल 1115 सीटें उपलब्ध हैं.

बीआइटी सिंदरी से निकले इंजीनियर आज देश-विदेश की नामचीन कंपनियों में कार्यरत हैं. कई पूर्व छात्र बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नेतृत्वकारी पदों पर आसीन हैं. संस्थान का योगदान सिर्फ तकनीकी शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप कुशल प्रतिभा तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाता रहा है.

केके कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट: नई ऊर्जा से आगे

धनबाद का तीसरा अहम संस्थान है केके कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट. यह अपेक्षाकृत नया कॉलेज है, लेकिन अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता व अनुशासन से इसने राज्य स्तर पर मजबूत पहचान बनायी है. संस्थान में पांच विभाग हैं और कुल 540 सीटें हैं. यहां से निकलने वाले इंजीनियर भी देश-विदेश में काम कर रहे हैं. संस्थान लगातार आधुनिक तकनीक और उद्योग की मांगों के अनुरूप शिक्षा देने पर जोर दे रहा है. कॉलेज के निदेशक ने कहा, “हमारा लक्ष्य विद्यार्थियों को सिर्फ डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योग के लिए तैयार करना है. इसी वजह से हमारे छात्र तेजी से पहचान बना रहे हैं.”

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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