सुरक्षित और सस्टनेबल माइनिंग के लिए डीजीएमएस और IIT खड़गपुर ने किया एमओयू

डीजीएमएस और आआइटी खड़गपुर के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद दोनों संस्थानों के अधिकारी. फोटो : प्रभात खबर
DGMS-IIT Kharagpur signs MoU: खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर ने खनन क्षेत्र में सुरक्षित, वैज्ञानिक और सतत खनन पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं. आइआइटी खड़गपुर के निदेशक प्रो सुमन चक्रवर्ती ने इसे ‘भविष्य उन्मुख खनन पद्धतियों के निर्माण में मील का पत्थर’ बताया.
DGMS-IIT Kharagpur Signs MoU: भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय अंतर्गत खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) खड़गपुर ने खनन क्षेत्र में सुरक्षित, वैज्ञानिक और सतत खनन पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए एमओयू किया है. यह समझौता बुधवार को डीजीएमएस मुख्यालय धनबाद में हुआ. एमओयू पर डीजीएमएस के निदेशक (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) सैफुल्लाह अंसारी और आइआइटी खड़गपुर की अधिष्ठाता प्रो गर्गी दास ने हस्ताक्षर किये. इस दौरान डीजीएमएस के महानिदेशक उज्ज्वल ताह, विभिन्न जोन से आये उप महानिदेशक और आइआइटी खड़गपुर से खनन अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष प्रो विश्वजीत सामंता, प्रो देबाशीष देव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे.
3 वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा समझौता
यह समझौता 3 वर्षों तक प्रभावी रहेगा. इसके बाद स्वतः अगले 3 वर्षों के लिए नवीनीकृत होगा. यह साझेदारी भारत को वैश्विक खनन सुरक्षा मानकों के करीब लाने और तकनीक आधारित खनन नीति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
वैश्विक मानकों की ओर बढ़ता भारत का खनन क्षेत्र
आइआइटी खड़गपुर के निदेशक प्रो सुमन चक्रवर्ती ने इस सहयोग को ‘भविष्य उन्मुख खनन पद्धतियों के निर्माण में मील का पत्थर’ बताया. उन्होंने कहा कि यह समझौता अकादमिक उत्कृष्टता और नियामक विशेषज्ञता के संगम का परिचायक है, जो आर्थिक विकास, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और श्रमिक कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करेगा.
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सहयोग के प्रमुख उद्देश्य
- क्षमता निर्माण : डीजीएमएस और आइआइटी मिलकर प्रशिक्षण, कार्यशालाएं, पुनश्चर्या पाठ्यक्रम एवं अकादमिक सहयोग करेंगे.
- संयुक्त अनुसंधान और विकास : सतत खनन तकनीकों पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय परियोजनाएं चलायी जायेंगी.
- ज्ञान साझा और इंटर्नशिप : छात्रों को डीजीएमएस कार्यालयों और खानों में इंटर्नशिप के अवसर मिलेंगे.
- तकनीकी कार्यक्रम : संयुक्त संगोष्ठी, सम्मेलन और कार्यशालाएं आयोजित की जायेंगी.
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By Mithilesh Jha
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