उपभोक्ता फोरम ने धनबाद के सीओ की सैलरी पर लगाई रोक, जमीन विवाद नहीं दिए थे रिपोर्ट

Updated at : 20 Mar 2026 9:11 AM (IST)
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Dhanbad News

धनबाद का जिला उपभोक्ता फोरम कार्यालय. फोटो: प्रभात खबर

Dhanbad News: धनबाद में जमीन विवाद मामले में रिपोर्ट नहीं देने पर उपभोक्ता फोरम ने सीओ की सैलरी रोकने का आदेश दिया. भूली निवासी महिला की शिकायत पर कार्रवाई हुई. बिल्डर द्वारा फ्लैट रजिस्ट्री में देरी और जमीन की वैधता पर सवालों के बीच प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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Dhanbad News: झारखंड के धनबाद जिले से एक अहम प्रशासनिक मामला सामने आया है, जहां उपभोक्ता फोरम ने सख्त रुख अपनाते हुए अंचल अधिकारी (सीओ) की सैलरी रोकने का आदेश जारी कर दिया है. यह कार्रवाई लंबे समय से लंबित एक जमीन विवाद मामले में रिपोर्ट नहीं सौंपने के कारण की गई है. इस फैसले से जिला प्रशासन में हलचल मच गई है और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं.

बार-बार निर्देश के बावजूद नहीं सौंपी गई रिपोर्ट

मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता फोरम ने पाया कि संबंधित अंचल अधिकारी रामप्रवेश कुमार को कई बार निर्देश दिए गए थे कि वे जमीन से जुड़ी स्थिति पर स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करें. फोरम ने यह जानना चाहा था कि संबंधित जमीन रैयती है या गैर आबाद श्रेणी में आती है. लेकिन, तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट जमा नहीं की गई, जिससे मामले की सुनवाई प्रभावित हुई. इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए फोरम ने सख्त कदम उठाया और सीओ के वेतन पर रोक लगाने का आदेश दे दिया.

जिला प्रशासन को भी दिए गए निर्देश

उपभोक्ता फोरम ने अपने आदेश में जिला प्रशासन को भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस फैसले का पालन सुनिश्चित किया जाए. आदेश की प्रति उपायुक्त आदित्य रंजन और संबंधित अंचल अधिकारी को भेज दी गई है. फोरम का यह कदम यह दर्शाता है कि प्रशासनिक लापरवाही को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाएगा.

क्या है पूरा जमीन विवाद मामला

यह मामला धनबाद के भूली क्षेत्र की रहने वाली इंदिरा कुमारी की शिकायत से जुड़ा है. उन्होंने वर्ष 2018 में लुबी सर्कुलर रोड स्थित एसएसएलएनटी कॉलेज के पीछे एक बिल्डर से करीब 1400 वर्ग फीट का फ्लैट बुक कराया था. शिकायत के अनुसार, बिल्डर ने पैसे लेने के बावजूद तय समय पर फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं कराई. लगातार देरी और टालमटोल के कारण उन्हें जमीन की वैधता पर संदेह होने लगा.

जमीन की वैधता पर उठे सवाल

इंदिरा कुमारी ने आशंका जताई कि संबंधित जमीन कहीं छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) के दायरे में तो नहीं आती या फिर यह गैर आबाद श्रेणी की जमीन तो नहीं है. इसी संदेह को दूर करने के लिए उन्होंने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई. इस मामले में बिल्डर कंपनी और उससे जुड़े अन्य लोगों को भी पक्षकार बनाया गया है.

फोरम ने मांगी थी स्पष्ट स्थिति रिपोर्ट

मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता फोरम ने अंचल कार्यालय से यह स्पष्ट करने को कहा था कि जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है. यह जानकारी मामले के निष्पादन के लिए बेहद जरूरी थी. लेकिन संबंधित अधिकारी की ओर से समय पर कोई जवाब नहीं दिया गया, जिससे न केवल शिकायतकर्ता को परेशानी हुई बल्कि न्यायिक प्रक्रिया भी बाधित हुई.

लापरवाही पर कड़ा संदेश

फोरम द्वारा उठाया गया यह कदम प्रशासनिक तंत्र के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. खासकर जब मामला आम नागरिकों के अधिकारों और संपत्ति से जुड़ा हो. इस फैसले से यह उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में अधिकारी अपने दायित्वों को लेकर अधिक गंभीर होंगे और समय पर आवश्यक रिपोर्ट व जानकारी उपलब्ध कराएंगे.

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पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद

इंदिरा कुमारी की ओर से दर्ज शिकायत अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है. फोरम के इस सख्त फैसले के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि मामले की सुनवाई तेज होगी और उन्हें जल्द न्याय मिलेगा. कुल मिलाकर यह मामला न केवल एक जमीन विवाद का है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की भी परीक्षा है, जिसमें उपभोक्ता फोरम ने सख्त रुख अपनाकर एक उदाहरण पेश किया है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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