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Binod Bihari Mahto Jayanti: झारखंड के आंबेडकर थे बिनोद बाबू, राजनीति से ज्यादा समाज सुधार की थी चिंता

Updated at : 23 Sep 2024 7:05 AM (IST)
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Binod Bihari Mahto

बिनोद बिहारी महतो

Binod Bihari Mahto Jayanti: बिनोद बाबू का नारा ही था- पढ़ो और लड़ो. उनके समर्थक उन्हें श्रद्धा से बाबू कहकर पुकारते हैं.

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Binod Bihari Mahto Jayanti|धनबाद, संजीव झा : झारखंड आंदोलन के पुरोधा बिनोद बिहारी महतो का जन्म धनबाद जिले के बलियापुर प्रखंड स्थित बड़ादाहा गांव में हुआ था. उन्होंने शिबू सोरेन, एके राय के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का गठन किया था. झारखंड आंदोलन को धार देने में उनकी बड़ी भूमिका रही. समाज सुधार व शिक्षा को ले कर कई बड़े अभियान चलाये.

बिनोद बाबू का नारा ही था- पढ़ो और लड़ो. उनके समर्थक उन्हें श्रद्धा से बाबू कहकर पुकारते हैं. बिनोद बिहारी महतो 2 बार बिहार विधानसभा के सदस्य तथा एक बार सांसद बने. सांसद रहते ही उनका निधन हो गया था. 23 सितंबर को उनकी 101वीं जयंती है. इस मौके पर प्रभात खबर ने उनके बेटे चंद्रशेखर महतो से बातचीत की.

चंद्रशेखर महतो ने बताया कि जिस टाइपिंग मशीन का उपयोग अलग झारखंड राज्य के आंदोलन के पुरोधा एवं वरिष्ठ अधिवक्ता बिनोद बिहारी महतो महत्वपूर्ण मुकदमों का जवाब दाखिल करने के लिए उपयोग करते थे. उसे आज तीन दशक से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनके एकमात्र जीवित पुत्र चंद्रशेखर महतो ने आज भी संजोकर रखा है.

समता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े थे बिनोद बाबू के बेटे चंद्रशेखर

पेशे से अधिवक्ता चंद्रशेखर महतो झारखंड आंदोलन के पुरोधा बिनोद बिहारी महतो के पांच पुत्रों तथा दो पुत्रियों में से एकमात्र जीवित संतान हैं. श्री महतो के अनुसार, उनके पिता अंतिम समय तक उनके साथ ही रहे. पिता के निधन के बाद समता पार्टी से एक बार वर्ष 1995 में टुंडी से विधानसभा चुनाव लड़े.

इसके बाद कुछ कारणों से खुद को राजनीति से अलग कर लिया. वकालत एवं समाज सेवा करना शुरु किया. आज भी घर में बने दफ्तर में पिता एवं मां की बड़ी तस्वीर लगा रखे हैं. कहा कि सुबह प्रति दिन मां-पिता की पूजा-अर्चना कर ही कोई काम करते हैं. दफ्तर में एक टाइप राइटर रखा हुआ है. बताया कि इस टाइप राइटर पर ही उनके पिता बड़े-बड़े मुकदमों का जवाब तैयार कराते थे. वह आज भी इसका उपयोग करते हैं. इसे पिता की धरोहर की तरह रखा है.

शोषण, सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ चलाते रहे अभियान

श्री महतो कहते हैं कि उनके पिता बिनोद बिहारी महतो झारखंड के आंबेडकर थे. उनके तरह ही हमेशा शोषण, सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाते रहे. उनके पिता ने हमेशा सिद्धांत की राजनीति की. चुनाव जीतने के लिए कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किये. ऐसा करते तो बहुत पहले ही विधायक, सांसद बन गये होते. कई चुनावों में पराजय झेलने के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर विश्वास बनाये रखा.

1980 में पहली बार बिहार के विधायक बने बिनोद बिहारी महतो

पहली बार 1980 में अविभाजित बिहार विधानसभा के सदस्य बने. जबकि संसद में पहली बार 1991 में पहुंचे. झारखंड अलग राज्य के आंदोलन को धार दिये. इसके लिए झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन, पूर्व सांसद एके राय सरीखे नेताओं को एक मंच पर लाकर झामुमो का गठन किया था. तीनों दिग्गज अलग-अलग क्षेत्र को संभाल रहे थे. देश के बड़े वाम नेताओं, आंदोलनकारियों से उनका नजदीकी संबंध रहा.

समाज सुधार के लिए खूब काम किया

श्री महतो के अनुसार बिनोद बाबू राजनीति से ज्यादा समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ ज्यादा संघर्ष किये. इसको लेकर चिंतित रहते थे. शिवाजी समाज की स्थापना की थी. शिक्षा को अस्त्र बनाया. इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल, कॉलेज खुलवाते रहे. अपने पैसों से इनका संचालन करते थे.

वकील की टिप्पणी से आहत होकर छोड़ दी सरकारी नौकरी

चंद्रशेखर महतो के अनुसार उनके पिता डीसी कार्यालय में आपूर्ति विभाग में कार्यरत थे. एक दिन किसी वकील ने कुछ ऐसी टिप्पणी कर दी की आहत हो कर बिनोद बाबू ने तत्काल नौकरी से इस्तीफा दे दिया. पटना जा कर एलएलबी किया. उसके बाद वकील के रूप में गरीबों का मुकदमा ज्यादा लड़ते थे. विस्थापितों को जमीन के बदले नौकरी एवं मुआवजा दिलाने की शुरुआत बिनोद बाबू ने ही की थी. इसको कानूनी मान्यता भी दिलायी.

और बिनोद बाबू के साथ राय दा ने ठेली जीप

बिनोद बिहारी महतो ने एक संस्मरण सुनाते हुए बताया कि एक बार किसी आंदोलनात्मक बैठक में अचानक बिनोद बिहारी महतो एवं एके राय को जमशेदपुर जाना था. कोई ड्राइवर नहीं था. तब उन्होंने (चंद्रशेखर महतो) जीप चलाकर दोनों नेता को लेकर धनबाद से जमशेदपुर के लिए निकले. रास्ते में कहा कि जीप में पेट्रोल खत्म होने वाली है. लेकिन, उनके पिता ने कहा कि पहुंच जायेगा जमशेदपुर तक, चलते रहो. कुछ दूर जाने के बाद जीप का पेट्रोल खत्म हो गया. उसके बाद बिनोद बाबू तथा राय दा जीप को ठेल कर पेट्रोल पंप तक ले गये.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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