धनबाद : नीरज और रंजय हत्याकांड में कई समानताएं

Updated at : 22 Mar 2017 7:29 AM (IST)
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धनबाद : नीरज और रंजय हत्याकांड में कई समानताएं

धनबाद : पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह और झरिया विधायक संजीव सिंह के करीबी रंजय सिंह की हत्या में कई समानताएं हैं. दोनों की हत्या शाम में ही हुई. रंजय सिंह की हत्या नीरज सिंह के घर रघुकुल के करीब चाणक्य नगर में 29 जनवरी, 2017 को हुई थी. उसकी भी हत्या के बाद हमलावर […]

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धनबाद : पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह और झरिया विधायक संजीव सिंह के करीबी रंजय सिंह की हत्या में कई समानताएं हैं. दोनों की हत्या शाम में ही हुई. रंजय सिंह की हत्या नीरज सिंह के घर रघुकुल के करीब चाणक्य नगर में 29 जनवरी, 2017 को हुई थी. उसकी भी हत्या के बाद हमलावर गोविंदपुर की तरफ भागे थे, जबकि आज नीरज सिंह की हत्या भी शाम में कुंती निवास के समीप हुई. इस कांड के बाद भी हमलावर बाइक से ही गोविंदपुर की तरफ भागे. दोनों ही घटना में घटनास्थल के समीप भारी भीड़ थी. लेकिन, दोनों ही मामले में कोई भी प्रत्यक्षदर्शी सामने आ कर कुछ बोलने को तैयार नहीं है.

मुकेश की मौत के बाद धनबाद शिफ्ट हुए थे नीरज

पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह अपने छोटे भाई मुकेश सिंह की मौत के बाद धनबाद शिफ्ट हुए थे. बीटेक करने के बाद रांची में रियल इस्टेट कारोबार करने वाले नीरज सिंह धनबाद की राजनीति से दूर रहते थे. वर्ष 2009 में उनके अनुज मुकेश सिंह, जो यहां परिवार का कारोबार संभालते थे, की मौत हीरक रोड में एक सड़क दुर्घटना में हो गयी थी. चार भाइयों में नीरज सबसे बड़े तथा मुकेश तीसरे नंबर पर थे. मुकेश की मौत के बाद परिजनों के दबाव में नीरज धनबाद में शिफ्ट हुए. यहां व्यवसाय के साथ राजनीति में सक्रिय हुए. उनकी पैठ हर दल के कार्यकर्ताओं में थी.

हर बार तैयारी के साथ वार

धनबाद के माफिया अपने दुश्मनों पर पूरी तैयारी से वार करते हैं. वह ऑपरेशन के पहले बारीकी से हर पहलू का अध्ययन करते हैं. यही कारण है कि हर घटना के बाद उनकी दहशत का ग्राफ चढ़ता है. दुश्मन तो मारा जाता ही है. माफिया गिरोह इसमें किसी से कम नहीं है. यह वक्त और किस्मत की बात है कि किसको कब मौका मिलता है.

शादी समारोह में हुई थी सुरेश सिंह की हत्या

करोड़पति कोयला व्यवसायी और कांग्रेस नेता सुरेश सिंह (55) की रात लगभग साढ़े नौ बजे धनबाद क्लब में गोली मार कर हत्या कर दी गयी. सुरेश सिंह पुराना बाजार में एक शादी समारोह में भाग लेने के बाद धनबाद क्लब पहुंचे थे. वहां होटल जिल के मालिक नुनू सिंह के बेटे की शादी का रिसेप्शन था. यहां आते ही सुरेश सिंह अपने मुलाजिम गोपाल सिंह से कुरसी पर बैठ कर बात करने लगे. इसी बीच चार युवकों ने उन्हें घेर लिया और उनमें से एक ने रिवाल्वर निकाल कर गोलियां चलानी शुरू कर दी. घटनास्थल पर नाइन एमएम के छह खोखे मिले. चार गोली सुरेश को लगी. दो दायें-बायें सीने में और एक कंधे में. गोली लगने के बाद सुरेश गिर पड़े. उनके निजी अंगरक्षकों और समारोह में जुटे लोगों ने एक पवन सिंह को पकड़ लिया. इस हत्या में रामाधीर सिंह के पुत्र शशि सिंह नामजद हैं. अभी भी फरार हैं.

प्रमोद सिंह की हुई थी हत्या

3 अक्तूबर, 2003 को महाअष्टमी के दिन बनारस से धनबाद लौटे प्रमोद सिंह की हत्या कर दी गयी. बनारस से धनबाद लौटे प्रमोद सिंह ने आवास की सीढ़ियों पर कदम रखा भी नहीं था कि वहां छुपे दो युवकों ने 9 एमएम की पिस्टल की गोलियों से प्रमोद को छलनी कर दिया. घायल प्रमोद को अस्पताल ले जाने वालों में कोयला व्यवसायी सुरेश सिंह, रिश्तेदार रणविजय सिंह और सहयोगी संतोष सिंह के अलावा हत्याकांड का प्रत्यक्षदर्शी गवाह पप्पू सिंह, प्रयाग सिंह आदि शामिल थे. अस्पताल में प्रमोद तो नहीं बचा, परंतु उसकी मौत के बाद उसके कथित मृत्युपूर्व बयान ने जलजला ला दिया. बयान में सिंह मैंशन परिवार के रामधीर सिंह और राजीव रंजन को गोली दागने वाले शख्सों के रूप में आरोपित किया गया था. तब धनबाद के एसपी मुरारीलाल मीणा थे.
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