बोन ड्रिल मशीन खराब होने से सात दिनों में ऑर्थों विभाग में 32 ऑपरेशन टले

Updated at : 31 Jul 2024 1:06 AM (IST)
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बोन ड्रिल मशीन खराब होने से सात दिनों में ऑर्थों विभाग में 32 ऑपरेशन टले

पांच गंभीर मरीजों को रिम्स किया गया रेफर, मशीन ठीक होने में लगेगा और 10 दिन का समय

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जिले के सबसे बड़े अस्पताल शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) के ऑर्थों विभाग की बोन ड्रिल मशीन सात दिनों से खराब है. इसके कारण पिछले सात दिनों में अबतक 32 मरीजों का ऑपरेशन टाल दिया गया है. गत 24 जुलाई को ऑर्थों विभाग की बोन ड्रिल मशीन खराब हुई थी. इस दिन सात मरीजों का ऑपरेशन किया जाना था, लेकिन मशीन खराब हो जाने से इन सात मरीजों के अलावा दूसरी तिथियों पर निर्धारित मरीजों का ऑपरेशन भी टाल दिया गया है. बता दें कि एसएनएमएमसीएच में सप्ताह में चार दिन मरीजों का ऑपरेशन होता है. मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण उन्हें उन्हें पहले ही ऑपरेशन की तिथि दे दी जाती है.

पांच गंभीर मरीजों को भेजा गया रिम्स :

ऑर्थों विभाग की मशीन खराब होने के कारण जहां मरीजों का ऑपरेशन टाल दिया गया है. वहीं गंभीर मरीजों, जिन्हे तत्काल ऑपरेशन की जरूरत है, उन्हें रिम्स भेजा जा रहा है. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार अबतक ऐसे पांच मरीजों को रिम्स रेफर किया गया है. वहीं कई मरीज ऐसे भी हैं, जिनका ऑपरेशन टलने पर वे खुद दूसरे अस्पताल चले गये.

जानें क्या है बोन ड्रिल मशीन :

ऑर्थो ड्रिल का इस्तेमाल आर्थोपेडिक सर्जन हड्डियों में छेद करने के लिए करते हैं, ताकि स्थिरीकरण स्क्रू, तार, प्लेट, प्रत्यारोपण और कृत्रिम उपकरण आदि को ठीक किया जा सके. यदि आपको फ्रैक्चर हुआ है, तो उपचार में यह सुनिश्चित करना शामिल होता है कि सभी हड्डी के हिस्से ठीक से सेट हों और अपनी मूल स्थिति में एक साथ रहें. ऐसे केस के ऑपरेशन में ड्रिल मशीन को इस्तेमाल में लाया जाता है.

इधर, 20 दिन से सदर अस्पताल में रात को सिजेरियन डिलीवरी बंद :

सदर अस्पताल में प्रतिनियुक्त चिकित्सकों को वापस उनके पदस्थापन स्थल बुला लेने से यहां 20 दिनों से रात को सिजेरियन डिलीवरी बंद है. वर्तमान में अस्पताल में मात्र एक एनेस्थेसिस्ट है. एनेस्थीसिया के एक चिकित्सक से दिन की पाली में काम लिया जा रहा है. रात को प्रसव पीड़ा होने पर गर्भवती को एसएनएमएमसीएच भेज दिया जा रहा है. बता दें कि मेडिकल कॉलेज में पदस्थापित एनेस्थीसिया के दो चिकित्सकों को सदर अस्पताल में प्रतिनियुक्त किया गया था. बाद में स्वास्थ्य चिकित्सा, शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के निर्देश पर चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति रद्द किये जाने पर सदर अस्पताल के दो एनेस्थेसिस्ट चिकित्सक डॉ पीयू गोराईं व डॉ नेगी ने मेडिकल कॉलेज में योगदान दे दिया है. अब सदर अस्पताल में मात्र एक एनेस्थेसिस्ट डॉ राजकुमार सिंह बचे हैं. वह दिन में होने वाले ऑपरेशन के समय मौजूद रहते हैं. रात पाली में एक भी एनेस्थीसिया के चिकित्सक मौजूद नहीं रहते हैं.

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