धनबाद : कचरा प्रबंधन पर खर्च नहीं होगी डीएमएफटी की राशि

Updated at : 01 Oct 2019 8:53 AM (IST)
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धनबाद : कचरा प्रबंधन पर खर्च नहीं होगी डीएमएफटी की राशि

प्रशासन ने हाथ खड़े किये रैमकी ने दो माह का दिया 1.30 करोड़ का बिल धनबाद : कचरा प्रबंधन पर डीएमएफटी फंड का उपयोग नहीं होगा. अब नगर निगम को स्वयं कचरा प्रबंधन पर खर्च करना होगा. उपायुक्त अमित कुमार ने मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल को डीएमएफटी फंड नहीं देने के संकेत दिये हैं. इसके बाद […]

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प्रशासन ने हाथ खड़े किये

रैमकी ने दो माह का दिया 1.30 करोड़ का बिल

धनबाद : कचरा प्रबंधन पर डीएमएफटी फंड का उपयोग नहीं होगा. अब नगर निगम को स्वयं कचरा प्रबंधन पर खर्च करना होगा. उपायुक्त अमित कुमार ने मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल को डीएमएफटी फंड नहीं देने के संकेत दिये हैं. इसके बाद नगर निगम सकते में आ गया है. इधर, रैमकी कंपनी बिल पर बिल दे रही है.

जुलाई से अगस्त तक लगभग 1.30 करोड़ रुपये का बिल रैमकी दे चुकी है लेकिन अब तक नगर निगम से बिल पेमेंट संबंधी कोई पहल नहीं की गयी है. पिछले दिनों मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने उपायुक्त से मिल कर कचरा प्रबंधन के लिए डीएमएफटी फंड रिलीज करने का आग्रह किया था. इस पर उपायुक्त ने कहा कि कचरा प्रबंधन पर डीएमएफटी फंड का उपयोग नहीं होगा. उपस्कर या अन्य सामग्री की खरीदारी हो सकती है.

कचरा प्रबंधन पर हर माह होंगे तीन करोड़ खर्च : कचरा प्रबंधन पर हर माह तीन करोड़ रुपये खर्च होंगे. डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, ट्रांसपोर्टेशन व डिस्पोजल के लिए रैमकी के साथ 2000 रुपये प्रति मीट्रिक टन कचरा का करार हुआ है. जुलाई से रैमकी काम कर रही है.

प्रथम चरण में शहर के 14 वार्ड (20 से 33) तक लिया गया. इसके बाद झरिया के वार्ड को शामिल किया गया. सिंदरी के बाद छाताटांड़ व कतरास अंचल के वार्ड को शामिल किया जायेगा. जुलाई में रैमकी ने लगभग 47 लाख का बिल दिया है. अगस्त माह में रैमकी का लगभग 80 लाख लाख बिल है. शहर में रोजाना पांच सौ मीट्रिक टन कचरा का उठाव होना है. लिहाजा एक दिन में दस लाख व माह में तीन करोड़ रुपये खर्च होंगे.

मेयर ने कहा- कैबिनेट से पास कराया जायेगा : मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने कहा कि कचरा प्रबंधन के लिए डीएमएफटी फंड का उपयोग कराने संबंधी प्रस्ताव को कैबिनेट से पास कराया जायेगा. प्रस्ताव को पिछले दिनों बोर्ड में पारित कराया गया था. फिर प्रस्ताव को डीएमएफटी कमेटी को भेजा गया था. डीएमएफटी फंड रिलीज करने में जिला प्रशासन आगे नहीं आ रहा है. अगर डीएमएफटी फंड को उपायुक्त रिलीज नहीं करते हैं तो कैबिनेट से प्रस्ताव को पास कराया जायेगा.

निगम क्षेत्र में सबसे अधिक कोलियरी है. गंदगी का मुख्य कारण खनन व कोयले की ट्रांसपोर्टिंग है. इसके बावजूद डीएमएफटी फंड का नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है. इधर, उपायुक्त अमित कुमार ने कहा कि कचरा प्रबंधन के लिए डीएमएफटी फंड नहीं दिया जायेगा. नगर निगम को अपने स्रोत से इसकी व्यवस्था करनी होगी.

नगर निगम में सोमवार को पुलिस के पहरे में 3.8 करोड़ की विकास योजनाओं का टेंडर डाला गया. एनआइटी 36 के 39 ग्रुप के लिए रोड, नाली, पेवर ब्लॉक आदि विकास योजनाओं के लिए टेंडर निकला था.

सोमवार को टेंडर डालने की अंतिम तिथि थी. लिहाजा नगर निगम में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था. टेंडर डालने के लिए सुबह से नगर निगम में संवेदकों की भीड़ थी. ऐसे में नगर आयुक्त स्वयं मोर्चा संभाल रहे थे. मुख्य द्वार पर नगर आयुक्त पुलिस बल के साथ मौजूद थे. टेंडर डालने आ रहे एक-एक व्यक्ति से पूछताछ के बाद ही उसे अंदर आने दिया जा रहा था. हालांकि संवेदक आपसी तालमेल करने से नहीं चुके. आपस में सेटिंग-गेटिंग कर टेंडर डाल रहे थे.

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