20 महीने बाद कतरास की रौनक लौटी, 24 फरवरी DC लाइन पर दौड़ेंगी ट्रेनें

By Prabhat Khabar Digital Desk
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DGMS की रिपोर्ट पर बंद हुई थी, CCRS की रिपोर्ट पर शुरू हो रही है DC रेल लाइन

उमेश श्रीवास्तव

कतरास : कतरासगढ़ स्टेशन चमचमा रहा है. गुलजार हो गया है कतरास कोयलांचल. 20 महीने तक परेशानी झेलने वाले धनबाद और चंद्रपुरा के बीच रहने वाले लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं है. उनका आंदोलन रंग लाया. डीसी लाइन पर ट्रेन सेवा बहाल होने जा रही है. सिर्फ एक दिन बाद. इससे लाखों लोगों को राहत मिलेगी, तो रेलवे को भी अरबों रुपये का राजस्व मिलेगा. जिस रेल लाइन को यह कहकर बंद कर दिया गया था कि भूमिगत कोयला खदान की आग रेलवे ट्रैक के बेहद करीब पहुंच चुका है और यह जान-माल के लिए खतरा है, उसे अब ट्रेनों के आवागमन के लिए सुरक्षित पाया गया है. 24 फरवरी, 2019 से इस ट्रैक पर ट्रेनों का परिचालन शुरू हो रहा है. गिरिडीह-धनबाद के सांसद एवं विधायक एलेप्पी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर यहां से रवाना करेंगे. इसके साथ ही इस रूट पर 8 जोड़ी ट्रेनों का परिचालन शुरू हो जायेगा.

धनबाद के डीआरएम अनिल कुमार मिश्रा ने 18 फरवरी, 2019 को टावर वैगन गाड़ी से कुसुंडा, बसेरिया, सिजुआ, अंगारपथरा होते हुए कतरासगढ स्टेशन पहुंचे. रास्ते में रेल लाइन, सिग्नल व्यवस्था का जायजा लिया. डीआरएम ने कहा कि 24 फरवरी को डीसी लाइन चालू हो जायेगी. दोनों पटरियों को दुरुस्त करने और अप एवं डाउन दोनों लाइनों पर ट्रेन चलाने में दो महीने लगेंगे.

20 महीने बाद कतरास की रौनक लौटी, 24 फरवरी DC लाइन पर दौड़ेंगी ट्रेनें

कतरासगढ़ से निचितपुर लिंक लाइन को चालू करने की सरकार ने 24 दिसंबर, 2018 को पहली बार पहल की. 28 दिसंबर को भी बैठक हुई. डीजीएमएस की रिपोर्ट खुली. इसमें कतरासगढ़ से निचितपुर रूट में आग से खतरे की कोई बात नहीं थी. सिर्फ बसेरिया, अंगारपथरा, तेतुलिया में ही आग का खतरा था. 34 किलोमीटर लंबे धनबाद-कतरासगढ़ रेल रूट के बीच स्थित ये तीनों स्टेशन 4 किलोमीटर के दायरे में ही हैं.

इसके बाद कतरासगढ़-निचितपुर लिंक लाइन से गोमो के रास्ते रांची के लिए ट्रेन चलाने की योजना बनी. घोषणा हुई कि 5 जनवरी, 2019 से इस लाइन को खोल दिया जायेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्रेन को हरी झंडी दिखाने वाले थे, लेकिन किन्हीं कारणों से ऐसा नहीं हो सका.

20 महीने बाद कतरास की रौनक लौटी, 24 फरवरी DC लाइन पर दौड़ेंगी ट्रेनें

जनवरी, 2019 में गिरिडीह सांसद रवींद्र कुमार पांडेय ने श्रम मंत्री संतोष गंगवार की उपस्थिति में डीजीएमएस, रेलवे, बीसीसीएल, सिंफर आदि के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक की. डीसी लाइन की जांच कराने के आदेश दिये. इसके बाद रेलवे सेफ्टी बोर्ड के सीसीआरएस शैलेश कुमार पाठक ने 23 जनवरी को धनबाद से सोनारडीह तक रेल लाइन की तकनीकी जांच की. इंजन चलाकर ट्रायल किया. फिर 7 बोगी वाली विंडो ट्रेन का भी ट्रायल किया. श्री पाठक ने रेल लाइन को ट्रेन चलाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित बताया. कहा कि इतने दिनों तक रेलवे को बेवकूफ बनाया गया.

इसी रिपोर्ट के आधार पर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने चार फरवरी, 2019 को घोषणा की कि 11 फरवरी से डीसी लाईन पर मालगाड़ी और 15 ‍फरवरी से ट्रेन चलने लगेगी. इसके बाद धनबाद रेल मंडल ने डीसी लाइन पर रेल पटरी, डायमंड क्रॉसिंग, सिग्नल को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया. समयसीमा में काम पूरा नहीं हो सका, तो 24 फरवरी की नयी तारीख तय हुई. धनबाद के डीआरएम अनिल कुमार मिश्रा ने कहा कि आंदोलन का केंद्र रहे कतरासगढ़ में एक भव्य समारोह का आयोजन होगा.

रेल लाइन को बंद करने की पूरी कहानी

ज्ञात हो कि 13 फरवरी, 2017 को डीजीएमएस के डीजी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई. इसमें रेलवे प्रतिनिधि, सिंफर, आइआइटी (आइएसएम, धनबाद), बीसीसीएल और जेआरडीए के प्रतिनिधि शामिल थे. इसी बैठक में धनबाद-चंद्रपुरा (डीसी) रेल लाइन को बंद करने का निर्णय लिया गया. इसके बाद 22 मई, 2017 को प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रधान सचिव एन मिश्रा की अध्यक्षता में डीसी लाइन को लेकर बैठक हुई और इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन बंद करने का अंतिम निर्णय ले लिया गया. पीएमओ में हुई बैठक के बाद रेलवे बोर्ड ने डीसी लाइन पर ट्रेनों का परिचालन 15 जून, 2017 से बंद करने का आदेश जारी कर दिया.

रेल लाइन बंद होने से एक दिन पहले शुरू हुआ आंदोलन

रेल परिचालन बंद होने का विरोध 14 जून, 2017 से शुरू हुआ. पूर्व विधायक समरेश सिंह के नेतृत्व में लोगों ने धनबाद-चंद्रपुरा सवारी गाड़ी को कतरासगढ़ स्टेशन पर रोक दिया. सुबह में रेल पुलिस ने इन्हें पटरियों से हटा तो दिया, लेकिन 14 जून की आधी रात को डीसी लाइन बंद होते ही कतरास के लोगों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

20 महीने बाद कतरास की रौनक लौटी, 24 फरवरी DC लाइन पर दौड़ेंगी ट्रेनें

एकीकृत झारखंड-बिहार के मंत्री रहे बाघमारा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक ओपी लाल ने 16 जून को कोलकाता-दिल्ली रेलमार्ग को निचितपुर हॉल्ट पर राजधानी सहित अन्य ट्रेनों को रोकने का एलान कर दिया. कतरासवासियों के साथ श्री लाल निचितपुर हॉल्ट गये. पुलिस ने उन्हें समर्थकों के साथ गिरफ्तार कर लिया. बाघमारा के पूर्व विधायक जलेश्वर महतो, आजसू नेता सुभाष राय सहित 200 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई.

इससे लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. सैकड़ों युवकों ने निचितपुर हॉल्ट से पहले गौशाला पुल के निकट पत्थरबाजी कर दी. एलेप्पी एक्सप्रेस को रोक दिया. पथराव में कई यात्री घायल हो गये. ट्रेन के शीशे टूट गये. मालगाड़ी को भी रोक दिया. पूरा कतरास कोयलांचल रेलबंदी की आग में जलने लगा. कतरासवासियों ने कतरास विकास मंच के बैनर तले रेल मंत्री सुरेश प्रभु की अर्थी निकाली और मुंडन कराकर उनका श्राद्ध कर दिया.

विपक्षी दलों का आंदोलन को मिला समर्थन

-रेल लाइन को बंद करने के विरोध का दौर शुरू हो गया. 21 जून, 2017 को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने चंद्रपुरा से कतरासगढ़ स्टेशन तक पदयात्रा की. केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध किया और डीसी लाइन को फिर से चालू करने की मांग की.

20 महीने बाद कतरास की रौनक लौटी, 24 फरवरी DC लाइन पर दौड़ेंगी ट्रेनें

-24 जुलाई, 2017 को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ए‍वं कांग्रेस के झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह धरनास्थल पर पहुंचे. दोनों नेताओं ने ट्रेन का परिचालन बंद करने के केंद्र सरकार के फैसले का विरोध किया.

-13 अगस्त, 2017 को सीपीएम की नेता वृंदा करात भी कतरासगढ़ पहुंची. धरना दे रहे लोगों के प्रति अपना समर्थन जताया. सरकार के फैसले का विरोध किया.

उग्र आंदोलन काम न आया, तो शुरू की प्रार्थना सभा

उग्र आंदोलन से काम नहीं बना, तो लोगों ने प्रार्थना सभा का सहारा लिया. इसके बाद कतरास विकास मंच के बैनर तले कतरासगढ़ स्टेशन पर प्रार्थना सभा शुरू हुई. यह अब भी जारी है. जागो संगठन के चुन्ना यादव ने 48 घंटे की भूख हड़ताल की.

604 दिन से दे रहे हैं महाधरना

एक जुलाई, 2017 से कतरासगढ़ स्टेशन रोड पर पूर्व विधायक ओपी लाल, पूर्व विधायक समरेश सिंह, पूर्व बियाडा अध्यक्ष विजय कुमार झा की अगुवाई में ‘रेल दो या जेल दो’ के बैनर तले कतरास वार्ड संख्या-1 के पार्षद विनोद गोस्वामी के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन महाधरना शुरू हुआ. 23 फरवरी, 2019 को इस महाधरना के 604 दिन हो गये. ट्रेनों का परिचालन शुरू होने के बावजूद यह महाधरना जारी रहेगा. इनका कहना है कि जब तक सभी 26 जोड़ी ट्रेनों का परिचालन शुरू नहीं हो जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा.

रंग लाने लगा आंदोलन

पार्षद विनोद गोस्वामी, कतरास विकास मंच के नितेश ठक्कर, झामुमो के टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो, राजेंद्र प्रसाद राजा सहित दर्जन भर लोगों ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया. धीरे-धीरे इनका आंदोलन बड़ा होने लगा. कतरास कोयलांचल के लोग भी उद्वेलित हो उठे. आंदोलन में कूद पड़े. 20 महीने बाद आंदोलन सफल हुआ. ट्रेनों का परिचालन शुरू होने जा रहा है. लोग खुश हैं. पार्षद विनोद गोस्वामी ने कहा है कि सरकार का यह फैसला गरीब जनता के हित में है.

स्थानीय नेताओं ने रिपोर्ट को दी चुनौती, उपायुक्त से रेल मंत्री तक को लिखा पत्र

सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन कर रहे पूर्व विधायक ओपी लाल, पूर्व बियाडाध्यक्ष विजय कुमार की अगुवाई में 18 जुलाई, 2017 को 500 लोगों ने जिला के उपायुक्त को एक शपथ पत्र सौंपा. इसमें कतरास के लोगों ने कहा था कि रेल पटरी को कोई खतरा नहीं है. पटरियों के नीचे कहीं आग नहीं है. साथ ही कहा कि रेल खंड में अग्नि से अगर कोई दुर्घटना होती है, तो शपथ पत्र दाखिल करने वाले लोगों को जेल भेज दिया जाये. महाधरना पर बैठे पार्षद विनोद गोस्वामी ने सीपीएम नेता वृंदा करात के साथ दिल्ली जाकर रेल मंत्री पीयूष गोयल से मिले. पत्र सौंपा और डीसी लाइन के नीचे आग की जांच कराने और रेल लाइन को दुरुस्त कराने की मांग की. यह सिलसिला अनवरत जारी रहा.

पूर्व विधायक के गंभीर आरोप : कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बंद की रेल लाइन

पूर्व विधायक ओपी लाल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाये. कहा कि डीसी रेल लाइन के नीचे स्थित उच्चतम गुणवत्ता के कोयले पर बीसीसीएल की नजर है. कॉर्पोरेट घरानों को कोयला खनन का ठेका देने के लिए रेल लाइन को बंद करने की साजिश रची गयी है. पूर्व विधायक ने कहा कि वह खनन मंत्री रह चुके हैं. इसी कोयलांचल में उनका जन्म हुआ. उन्हें हर खदान के बारे में पूरी जानकारी है. उन्होंने पूरे दावे के साथ सरकार को पत्र लिखा कि रेल पटरी के नीच कहीं आग नहीं है. हां, रेलवे लाइन के किनारे अंगारथरा में आग थी, जिसे ट्रेंच कटिंग करके हटा दिया है. साउथ गोविंदपुर (तेतुलिया हॉल्ट) की आग भी रेल लाइन की सुरंग के नीचे से आर-पार कर आधा किलोमीटर दूर जा चुकी है. रेल पटरी के नीचे कहीं कोयले की कटाई नहीं हुई है. इसलिए ट्रेन चलाने से जान-माल को कोई खतरा नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कहीं आग है, तो सरकार को चाहिए कि सिंफर से आग बुझवाकर रेल लाइन को चालू करवाये.

रेल लाइन बंद करने के लिए दी थी यह दलील

भारतीय रेलवे बोर्ड ने 15 जून से ट्रेनों का परिचालन बंद करने का आदेश जारी करते हुए कहा था कि कोयला खनन के कारण भूमिगत आग रेल पटरियों तक आ गयी है. तत्कालीन डीजीएमएस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि डीसी रेल लाइन के बसेरिया, बांसजोड़ा, अंगारपथरा, तेतुलिया हॉल्ट तक रेल पटरी के नीचे आग पहुंच चुकी है. इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन बड़े खतरे को आमंत्रण दे सकता है.

डीजीएमएस ने की थी यह सिफारिश

झरिया मास्टर प्लान को लेकर कोयला सचिव की अध्यक्षता में गठित हाइ पावर सेंट्रल कमेटी ने एक रिपोर्ट दी थी. इसमें कहा था कि धनबाद-चंद्रपुरा रेलवे मार्ग को चालू रखना खतरे से खाली नहीं है. इसके नीचे भूमिगत खदानें हैं, जो कि आग, गोफ व भू-धंसान की चपेट में हैं. इस वजह से मानव जीवन की रक्षा के लिए तत्काल इस रेलवे लाइन को बंद कर देना चाहिए.

74 ट्रेनें चलती थीं डीसी लाइन पर

डीसी लाइन 34 किलोमीटर लंबी है. इसमें छह स्टेशन व सात हॉल्ट हैं. आठ कोल साइडिंग हैं. 14 किमी क्षेत्र में आग फैल चुकी है. रेलवे ट्रैक के निकट आ गयी है. इसी को लेकर डीजीएमएस ने कोल मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी और रेलवे बोर्ड ने 15 जून से इस मार्ग को बंद करने का निर्णय लिया. इस मार्ग पर यात्री ट्रेनों के अलावा 20 मालगाड़ी सहित 74 ट्रेन चला करती थी.

अरबों रुपये का रेलवे को हुआ नुकसान

डीसी लाइन से प्रतिदिन साढ़े नौ रैक कोयला लोड होता था. इससे सालाना करीब 2500 करोड़ रुपये रेलवे को मिलते थे. यात्री किराया से करीब 125 करोड़ रुपये मिलते थे. बीसीसीएल के 13 मिलियन टन एवं इसीएल के 12 मिलियन टन कोयले की ढुलाई होती थी.

अटल सरकार ने बंद कर दिया था धनबाद-झरिया रेल मार्ग

वर्ष 2001-02 में धनबाद-झरिया रेल मार्ग को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया. तब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी. सरकार के इस फैसले का जमकर विरोध हुआ, लेकिन रेल लाइन को बंद होने से रोका नहीं जा सका.

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