बस की चपेट में आकर शिक्षक की मौत

पुटकी/धनबाद: धनबाद-बोकारो मुख्य सड़क पर पुटकी थाना अंतर्गत चीरूडीह के समीप सड़क दुर्घटना में शिक्षक विजय कुमार पासवान (42) की मौके पर ही मौत हो गयी. सूचना मिलते ही पुटकी थानेदार जयप्रकाश टोप्पो घटनास्थल पहुंच शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए धनबाद भेज दिया. घटना बुधवार दिन के करीब एक बजे की है. […]
पुटकी/धनबाद: धनबाद-बोकारो मुख्य सड़क पर पुटकी थाना अंतर्गत चीरूडीह के समीप सड़क दुर्घटना में शिक्षक विजय कुमार पासवान (42) की मौके पर ही मौत हो गयी. सूचना मिलते ही पुटकी थानेदार जयप्रकाश टोप्पो घटनास्थल पहुंच शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए धनबाद भेज दिया.
घटना बुधवार दिन के करीब एक बजे की है. धनबाद से टाटा जा रही शिव शक्ति बस(जेएच 05 एएम-9069) ने चीरूडीह के समीप महुदा से आ रहे बाइक सवार विजय कुमार पासवान को अपनी चपेट में ले लिया. बस ने शिक्षक को करीब बीस फीट तक बाइक (जेएच09टी-6635) समेत घसीटते हुए ले गयी. बस यात्रियों के अनुसार विपरीत दिशा से आ रही टेंपो के अचानक दाहिने मुड़ जाने से उसे बचाने के चक्कर में चालक ने अपना नियंत्रण खो दिया. मृतक मुरलीडीह (महुदा) उत्क्रमित मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक थे, जबकि हरिहरपुर थाना क्षेत्र के आजाद नगर कॉलोनी घुनघुसा गोमो के निवासी थे.
मिश्रित भवन लाया गया शव, पोस्टमार्टम आज : घटना के बाद शिक्षक का शव मिश्रित भवन लाया गया. यहां उनका शव देख सभी की आंखें नम हो गयी. डीएसइ बांके बिहारी सिंह, डिप्टी डीएसइ एमके पांडेय समेत सभी संगठनों के शिक्षक नेता व शिक्षक पहुंचे. देर शाम होने के कारण शिक्षक के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका. शिक्षक नेताओं ने सभी शिक्षकों से अपील की कि गुरुवार को स्कूल अवधि के बाद पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे. शव को शीत शव गृह में रखा गया है. पोस्टमार्टम के बाद लगभग बारह बजे पुन: शव को मिश्रित भवन परिसर लाया जायेगा और शिक्षक को श्रद्धांजलि दी जायेगी. इससे पहले मध्य विद्यालय, खरनी के सहायक शिक्षक कमलेश चौधरी की भी मौत सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी थी.
अनुकंपा की बहाली टेट मुक्त हो : शव को देख शिक्षक काफी उत्तेजित हो उठे. उन्होंने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि अनुकंपा की बहाली टेट मुक्त होनी चाहिए. यह बहाली मानवीय आधार पर होती है. इसलिए सरकार अपना यह आदेश निरस्त करे. सरकार शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यो से मुक्त करे. सिविल कार्य को लेकर शिक्षक बहुत परेशान थे. एक महीने से उनका वेतन बंद था. पानी नहीं था, जिस कारण राशि निकासी के बावजूद भवन नहीं बनवा पा रहे थे. शिक्षकों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि शिक्षकों को एमडीएम से भी मुक्त किया जाये. इन गैर शैक्षणिक कार्यो को लेकर शिक्षकों पर बहुत मानसिक दबाव बना हुआ होता है. हालांकि मामले को डीएसइ ने शांत कराया. कहा कि यह समय विरोध का नहीं है. मामले में शिक्षकों से बातचीत के बाद निष्कर्ष पर पहुंचेंगे. क्षोभ व्यक्त करनेवालों में नंदकिशोर सिंह, सुनील भगत, नीलकंठ मंडल, राजकुमार वर्मा, संजय कुमार, नेहरू हेंब्रम, आदित्य मिर्धा, उज्जवल तिवारी, अनिल पासवान, संजीत पासवान, सुनील कुमार आदि शामिल थे.
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