धनबाद : जर्जर स्थिति झेल रहा है जिला पशुपालन कार्यालय, छत से गिर रहा प्लास्टर हो सकती है दुर्घटना

Updated at : 13 Dec 2018 7:02 AM (IST)
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धनबाद :  जर्जर स्थिति झेल रहा है जिला पशुपालन कार्यालय, छत से गिर रहा प्लास्टर हो सकती है दुर्घटना

धनबाद : पुलिस लाइन अवस्थित जिला पशुपालन कार्यालय इन दिनों जर्जर स्थिति झेल रहा है. कार्यालय व क्वार्टरों में छत से प्लास्टर गिर रहे हैं. दरवाजे टूटे हुए हैं. हालात यह है कि पदाधिकारी व कर्मचारी दूसरी जगह किराये के मकान पर रहने की सोच रहे हैं. दुर्घटना की आशंका हमेशा सताते रहती है. कनीय […]

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धनबाद : पुलिस लाइन अवस्थित जिला पशुपालन कार्यालय इन दिनों जर्जर स्थिति झेल रहा है. कार्यालय व क्वार्टरों में छत से प्लास्टर गिर रहे हैं. दरवाजे टूटे हुए हैं. हालात यह है कि पदाधिकारी व कर्मचारी दूसरी जगह किराये के मकान पर रहने की सोच रहे हैं. दुर्घटना की आशंका हमेशा सताते रहती है.
कनीय पशु चिकित्सक धर्मेंद्र वर्मा बताते हैं कि उन्हें कार्यालय में बैठने से भी डर लगता है. जर्जर स्थिति को देखते हुए जिला पशुपालन अधिकारी कई बार रांची हेड क्वार्टर में पत्र के माध्यम से शिकायत कर चुके हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं होती है. ऐसा लगता है मानो जैसे सरकार हमें भूल गयी है. बताया कि पूरे कार्यालय और क्वार्टरों में चारों तरफ जंगल फैला हुआ है. हर दो दिनों के बाद किसी न किसी के घर में सांप घुस जाता है. इससे हमेशा डर बना हुआ रहता है.
दो डॉक्टरों के भरोसे चल रहा अस्पताल : कनीय पशु चिकित्सक के अनुसार : पूरा अस्पताल दो डॉक्टरों के भरोसे ही चलता है. पशु मरीजों बढ़ जाने से परेशानी होती है. वह और पशु शल्य चिकित्सक विपिन बिहारी महथा ही पशुओं को देखते हैं. हालांकि जिला पशुपालन कार्यालय में पशुपालन अधिकारी सहित पांच डॉक्टर पदस्थापित हैं.
सभी को विभागीय काम जैसे कैंप लगाना, आदि काम करने पड़ते हैं. इस वजह से मरीजों की समस्या दो डॉक्टरों को ही झेलनी पड़ती. कर्मचारियों की भी कमी पशु विभाग में है. लिपिक, पीउन सहित मात्र 9 कर्मचारी ही अभी मौजूद हैं.
दवाओं की है कमी : विभाग में इन दिनों दवा की भी भारी कमी है. कीड़े मारना, पेट फूलना, स्लाइन, एंटिबायोटिक आदि सभी दवा खत्म है. ऐसे में मरीज पशु के लिए मालिकों को बाहर की दवा से काम चलाना पड़ता है. अधिकारी बताते हैं कि विभाग में दवा रांची से आती है. वहां एक ही एजेंसी से पूरे राज्य में दवा दी जाती है.
इसके कारण कभी दवा मिलती है तो कभी नहीं मिलती है तो कभी बहुत कम मात्रा में दवा दी जाती है. इसके कारण हमेशा संकट बना रहता है.
दो वर्षों से पड़ा है एंबुलेंस
विभाग के पास एक एंबुलेंस भी है जो दो वर्षों से खराब पड़ा है. अधिकारी बताते हैं कि एंबुलेंस पहले काम में आता था. उसके जरिए ही ग्रामीण क्षेत्रों में दवा आदि का वितरण और कैंप लगाने जाया जाता था. मगर सभी जगह पशुपालन विभाग का प्रखंड कार्यालय बन जाने के बाद दवा का वितरण वहीं से किया जाने लगा. इसके कारण धीरे-धीरे एंबुलेंस की उपयोगिता खत्म हो गयी.
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