खुलने थे 50 केंद्र, खुले बस तीन जेनरिक दवा अब भी पहुंच से दूर

Updated at : 09 Sep 2018 4:54 AM (IST)
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खुलने थे 50 केंद्र, खुले बस तीन जेनरिक दवा अब भी पहुंच से दूर

धनबाद : केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का धनबाद में बुरा हाल है. सरकारी घोषणाओं के बावजूद धनबाद में केंद्र खोलने के लिए कोई आवेदन ड्रग कार्यालय को नहीं मिल रहा है. धनबाद में लगभग 50 जन औषधि केंद्र खोलने की सरकार ने योजना बनायी थी, लेकिन अब तक मात्र […]

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धनबाद : केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का धनबाद में बुरा हाल है. सरकारी घोषणाओं के बावजूद धनबाद में केंद्र खोलने के लिए कोई आवेदन ड्रग कार्यालय को नहीं मिल रहा है. धनबाद में लगभग 50 जन औषधि केंद्र खोलने की सरकार ने योजना बनायी थी, लेकिन अब तक मात्र दो केंद्र ही खोले जा सके हैं. एक केंद्र भूईंफोड़ व एक राजगंज में खुला है. पहले से चल रहे पीएमसीएच के जन औषधि केंद्र को मिला कर जिले में तीन केंद्र खुले हैं. बता दें कि अप्रैल 2017 में जन औषधि केंद्र का नाम बदल कर प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र रखा गया था. केंद्रों में दवाओं के साथ चिकित्सकों से जेनरिक दवा लिखने की अपील की गयी थी, लेकिन डेढ़ वर्ष के बाद धनबाद में न पर्याप्त केंद्र खुले, न चिकित्सक ही यह दवा लिख रहे हैं.

जेनरिक व ब्रांडेड दवा में अंतर
ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में जेनरिक दवाइयां लगभग पांच गुनी सस्ती होती हैं. जेनरिक दवाएं इसे बनाने वाले उत्पादक से सीधे रिटेलर तक पहुंचती हैं. इन दवाओं के प्रचार-प्रसार पर दवा कंपनियों को कुछ खर्च नहीं करना पड़ता. एक ही कंपनी की ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं के मूल्य में काफी अंतर होता है. चूंकि जेनरिक दवाओं के मूल्य निर्धारण पर सरकारी अंकुश होता है, इसलिए वह सस्ती होती हैं. जबकि ब्रांडेड दवाओं की कीमत कंपनियां खुद तय करती हैं, इसलिए वह महंगी होती हैं. कमीशन के लिए ब्रांडेड दवाओं को ही डॉक्टर अधिकांश लिखते हैं. 20 रुपये की लागत की दवा बाजार में सौ रुपये तक बिकती है, इसमें चिकित्सकों को 30 से 60 प्रतिशत तक कमीशन मिलता है.
पीएमसीएच के जेनरिक केंद्र से थोड़ी राहत
पीएमसीएच के जन औषधि केंद्र की मॉनिटरिंग पहले राज्य के जिम्मे थी. अब केंद्र सरकार की मॉनीटरिंग शुरू हो गयी है. केंद्र में लगभग सौ प्रकार की दवा उपलब्ध करायी गयी. फिलहाल यहां 75 विभिन्न प्रकार की दवा मौजूद हैं. कुछ चिकित्सक तो जेनरिक दवा लिख रहे हैं, लेकिन चिकित्सकों के एक बड़े तबके का ब्रांडेड दवाओं से मोहभंग नहीं हो रहा है. पीएमसीएच को छोड़कर शहर की दूसरी जगहों पर एक भी केंद्र अभी तक नहीं खुल पाया है. ऐसे में सस्ती दवा के लिए मरीजों को अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.
न प्रखंडों में खुला, न लाइसेंस मिला
केंद्र सरकार के निर्देशानुसार लोगों तक सस्ती और अच्छी जेनरिक दवा पहुंचाने के लिए सभी प्रखंडों में जेनरिक दवा केंद्र खोलने हैं. लेकिन इन डेढ़ वर्षों में धनबाद में किसी भी प्रखंड में जेनरिक दवा केंद्र नहीं खोला जा सका है. कुछ माह पूर्व जेनरिक दवा के लाइसेंस के लिए लगभग 50 आवेदन ड्रग कार्यालय में आये थे, लेकिन किसी के साथ फार्मासिस्ट का लाइसेंस नहीं था. इस कारण ड्रग कार्यालय की ओर से इसे वापस कर दिया गया.
जिले में दो नये जन औषधि केंद्र खोले गये हैं. दो लोगों ने आवेदन किया था, लोगों को सस्ती दवा यहां से मिल रही है. हालांकि आवेदन नहीं आ रहे हैं. इससे कम केंद्र ही खुल पा रहे हैं.
शैल अंबष्ठ, ड्रग इंस्पेक्टर धनबाद
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