बांग्ला कीर्तन से माहौल हुआ भक्तिमय

करौं में तीन दिवसीय बांग्ला कीर्तन आयोजित
करौं. प्रखंड क्षेत्र के बाबा कर्णेश्वर मंदिर प्रांगण में सार्वजनिक संकीर्तन समिति के तत्वावधान में वार्षिक त्रिदिवसीय अखंड बंगला संकीर्तन का आयोजन किया गया. कीर्तन सुनने के लिए डूमरतर, सिरिया, चांदचौरा, रानीडीह, केन्दवेरिया, कमलकर, रान्हा, गोविन्दपुर, सालतर, चौरवरिया, प्रतापपुर व तारापुर आदि गांवों से श्रद्धालु शामिल हुए. पश्चिम बंगाल के संकीर्तन गायिका लक्खी दास ने श्रीकृष्ण नाम महिमा व महत्ता के विभिन्न व्यवहारिक पहलूओं का उल्लेख करते कहा कि कलिकाल हरे राम रहे कृष्ण के नाम ध्यान, जप-तप से लोगों का आध्यात्मिक शक्ति का प्रवेश होता है. एक मात्र नाम संकीर्तन से बेड़ा पार का उपाय है. उन्होंने सुमधुर सुरताल व नृत्य के माध्यम से श्रोताओं को बांधे रखा. आज बच्चें के जन्मदिन में केक काट कर मोमबत्ती बुझाते है व बैलून फोड़ते हैं यह संस्कृति हमारी नहीं है. हिन्दू समाज में बच्चों के जन्मदिन पर खीर प्रसाद के रूप खिलाया जाता है. आज हम अपनी सभ्यता, संस्कृति और संस्कार को भूलते जा रहें ये चिंतनीय है. आधुनिकता के नाम पर चहुंओर फूहड़पन का नजारा है. उन्होंने कहा कि सरल सहज और समभाव जीवन जीना चाहिए. माता-पिता का सेवा ही परमोधर्म है. मौके पर सार्वजनिक संकीर्तन समिति के पदाधिकारियों के अलावे स्वयंसेवक उपस्थित थे.
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