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दिव्यांग नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को सश्रम आजीवन कारावास की सजा

Updated at : 20 Aug 2024 7:23 PM (IST)
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दिव्यांग नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को सश्रम आजीवन कारावास की सजा

एडीजे तृतीय सह पॉक्सो एक्ट स्पेशल कोर्ट राजेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत ने पॉक्सो केस संख्या 10/2022 में अभियुक्त चंदन दास को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनायी है.

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विधि संवाददाता, देवघर. एडीजे तृतीय सह पॉक्सो एक्ट स्पेशल कोर्ट राजेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत ने पॉक्सो केस संख्या 10/2022 में अभियुक्त चंदन दास को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. इसके साथ ही 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जो पीड़िता को दिया जायेगा. जुर्माना अदा नहीं करने पर चंदन को अतिरिक्त छह महीने की कैद भुगतनी होगी. कोर्ट के आदेश के अनुसार, चंदन दास को जीवन भर जेल में रहना होगा. देवीपुर थाना के बड़ा मेरखी गांव के रहने वाले चंदन पर 11 अप्रैल 2022 को पीड़िता की मां द्वारा दर्ज कराये गये मामले में दुष्कर्म का आरोप था. दर्ज मुकदमा के अनुसार पीड़िता घर में अकेली थी और घर के बगल में किसी के घर में अन्नप्राशन्न था, जहां पर डीजे व लाउडस्पीकर बज रहा था. मौका पाकर चंदन दास उसके घर पर आया एवं अपनी बाइक पर बैठाकर गांव के बाहर परसबोनी की ओर ले गया, जहां पर उसके साथ दुष्कर्म किया. इसके बाद पीड़िता के घर के निकट एक किराना की दुकान के पास लाकर छोड़ दिया. पीड़िता दिव्यांग होने के साथ साथ गूंगी, बहरी एवं मानसिक रूप से बीमार रहने के बाद भी अभियुक्त ने उसे हवस का शिकार बनाया था. पुलिस ने अनुसंधान पूरी की एवं आरोप पत्र दाखिल किया. इसके बाद केस का स्पीडी ट्रायल हुआ. अभियोजन पक्ष ने विशेष लोक अभियोजक शिवाकांत मंडल के नेतृत्व में आठ गवाहों की गवाही पेश की, जिससे चंदन दोषी साबित हुआ. बचाव पक्ष के अधिवक्ता मो जैनुल अंसारी थे, जिन्होंने बचाव में छह लोगों की गवाही दिलायी, लेकिन दोषमुक्त कराने में विफल रहे. इस मुकदमा में महज 27 माह में पीड़िता को न्याय मिला. अभियुक्त को दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट की धारा 6 में दोषी पाया गया एवं पॉक्सो एक्ट में सश्रम उम्रकैद की सजा सुनायी गयी. —————————————————————- एडीजे तीन सह पॉक्सो एक्ट स्पेशल कोर्ट राजेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत से आया फैसला गूंगी, बहरी व मानसिक रूप से बीमार नाबालिग के साथ किया था दुष्कर्म 11 अप्रैल 2022 को घटी थी घटना, 27 माह के बाद पीड़िता को मिला न्याय.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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