मारगोमुंडा. प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न आदिवासी गांवों में खेतों व जंगलों में शिकार के साथ सोहराय (वंदना पर्व) का समापन हो गया. इस संबंध में प्रखंड 20 सूत्री अध्यक्ष सोहन मुर्मू ने बताया कि आदिवासियों का प्रकृति से जुड़ाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण पर्व सोहराय वंदना है. पर्व की शुरुआत पांच दिनों तक प्रकृति के अलग-अलग रूपों की पूजा कर की जाती है. इसको लेकर आदिवासी काफी उत्साहित रहते हैं. आदिवासी समाज प्रत्येक वर्ष सोहराय पर्व धूमधाम से मनाते हैं. पर्व के पहले दिन गांवों में देवता की पूजा की जाती है. दूसरे दिन गोहाल की पूजा की जाती है. इसमें इष्ट देव को याद कर बैलों की पूजा की जाती है. साथ ही कृषि कार्य के दौरान बैलों को हुए कष्ट के लिए क्षमा याचना की जाती है. साथ ही पारंपरिक तरीके से ढोल-नगाड़े के साथ गोहाल की पूजा की जाती है. तीसरे दिन बरद खूंटा मनाया जाता है. साथ ही युवतियां महिलाएं युवक पुरुष मिलकर पारंपरिक वेशभूषा में गांव के गलियारों में घर-घर जाकर नृत्य प्रस्तुत किया जाता है. इस दौरान गाय व बैल की चुमावड़ा किया जाता है. बैल के माथे पर तेल व सिंदूर लगाकर धान की बाली से सजाया जाता है. चौथे दिन गांव की महिला पुरुष पारंपरिक परिधान पहनकर गांव में नृत्य एक दूसरे को सोहराय पर्व की बधाई देते नहीं थकते हैं. खेतों व जंगलों में शिकार किया जाता है, जिसके बाद पारंपरिक रूप से पूजा अर्चना के साथ पर्व का समापन स्वत: हो जाता है. हाइलार्ट्स : मारगोमुंडा के आदिवासी गांवों में धूमधाम से मना सोहराय पर्व
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