भीम के पदचिह्न और दुर्लभ जड़ी-बूटियां… जानें सारठ का पत्थरड्डा क्यों बन रहा पर्यटन का नया ठिकाना

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पत्थरड्डा पहाड़ का मनोरम दृश्य.Prabhat Khabar Network

सारठ का पत्थरड्डा पहाड़ प्राकृतिक सौंदर्य, पौराणिक मान्यताओं और दुर्लभ जड़ी-बूटियों से भरपूर. पर्यटन के लिए नया डेस्टिनेशन.

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सारठ : देवघर जिले के सारठ प्रखंड में स्थित पत्थरड्डा पहाड़ इन दिनों अपनी प्राकृतिक खूबसूरती से लोगों को आकर्षित कर रहा है. करीब 220 एकड़ क्षेत्र में फैला यह पहाड़ पत्थरड्डा नवादा, बोचबांध और बसाहाटांड़ समेत चार पंचायत क्षेत्रों में फैला हुआ है. हरियाली, पहाड़ी झरने, ऊंची चोटियां और मनोरम प्राकृतिक दृश्य इसे पर्यटन की दृष्टि से खास बनाते हैं. खासकर बरसात के मौसम में पहाड़ की खूबसूरती देखते ही बनती है.

प्रकृति के साथ इतिहास की भी झलक

पत्थरड्डा पहाड़ सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ी ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के कारण भी लोगों के आकर्षण का केंद्र है. स्थानीय लोगों के अनुसार, महाभारतकाल में पांडवों ने अपने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में कुछ समय बिताया था. पहाड़ की चोटी पर भीम के पदचिह्न से जुड़ा एक स्थान आज भी लोगों के लिए आस्था और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है. यहां आने वाले पर्यटक इस स्थान को देखने के लिए पहाड़ की चोटी तक पहुंचते हैं.

झरने का शीतल पानी, खेतों के लिए भी वरदान

बरसात के दिनों में पहाड़ से निकलने वाला झरना इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देता है. पहाड़ से बहता शीतल जल स्थानीय लोगों और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. स्थानीय लोगों का दावा है कि इस पानी में प्राकृतिक मिठास है और इसके सेवन से पेट संबंधी परेशानियों में भी राहत मिलती है. वहीं, झरने का पानी आसपास के खेतों की सिंचाई के लिए भी उपयोगी साबित होता है.

पिकनिक और वनभोज के लिए पहुंचते हैं लोग

पत्थरड्डा पहाड़ स्थानीय लोगों के साथ-साथ देवघर, जामताड़ा और दुमका सहित आसपास के जिलों के लोगों के लिए भी पिकनिक और वनभोज का पसंदीदा स्थल बनता जा रहा है. खासकर जनवरी और अन्य छुट्टियों के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं और प्राकृतिक वातावरण के बीच समय बिताते हैं. पहाड़ की चोटियों से दिखने वाला विहंगम दृश्य पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है.


पत्थरड्डा पहाड़ का मनमोहन दृश्य.
पत्थरड्डा पहाड़ का मनमोहन दृश्य.

दुर्लभ जड़ी-बूटियों का भी खजाना

पत्थरड्डा पहाड़ की पहचान दुर्लभ जड़ी-बूटियों के लिए भी है. स्थानीय जानकारों और वैद्यों के अनुसार, पहाड़ के आसपास कई उपयोगी औषधीय पौधे पाये जाते हैं. दूर-दराज से आने वाले वैद्य और जड़ी-बूटियों के जानकार इनका संग्रह भी करते हैं. बरसात के बाद जब पहाड़ की चट्टानों पर पानी की बूंदों पर सूर्य की किरणें पड़ती हैं, तो पूरा क्षेत्र बेहद मनमोहक दिखाई देता है.

पूर्व स्पीकर ने पर्यटन और सिंचाई के लिए की थी पहल

पत्थरड्डा पहाड़ को पर्यटन और स्थानीय जरूरतों से जोड़ने की दिशा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सह तत्कालीन विधायक शशांक शेखर भोक्ता ने भी पहल की थी. उनके कार्यकाल में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से सिंचाई के लिए तालाब तथा पर्यटकों की सुविधा के लिए टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स भवन निर्माण की योजना तैयार करायी गयी थी. हालांकि वन विभाग से क्लीयरेंस नहीं मिलने के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी.


पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग

सारठ विधायक उदय शंकर सिंह उर्फ चुन्ना सिंह ने पत्थरड्डा पहाड़ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पहल की है. उन्होंने कहा कि पहाड़ को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने को लेकर विभागीय मंत्री के समक्ष मांग रखी गयी है और विधानसभा के पटल पर भी यह मामला उठाया जा चुका है. विधायक के अनुसार, पत्थरड्डा पहाड़ प्राकृतिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण धरोहर है. इसके विकसित होने से यहां पर्यटकों की संख्या में काफी वृद्धि हो सकती है.


पत्थरड्डा पहाड़ का मनमोहन दृश्य.
पत्थरड्डा पहाड़ का मनमोहन दृश्य.

उन्होंने कहा कि देवघर के नंदन पहाड़, तपोवन और त्रिकुटी की तर्ज पर पत्थरड्डा पहाड़ को भी प्रमुख दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास जारी है. विभाग स्तर पर योजना तैयार की जा रही है.

सुविधाएं मिलें तो पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान

प्राकृतिक सौंदर्य, पौराणिक मान्यताओं, झरने और औषधीय वनस्पतियों से समृद्ध पत्थरड्डा पहाड़ पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे हुए है. यदि यहां पहुंचने के लिए बेहतर सड़क, सुरक्षा, पेयजल, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, पर्यटक भवन और अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएं, तो यह क्षेत्र देवघर जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी जगह बना सकता है.


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मिथिलेश सिन्हा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश सिन्हा

2001 से प्रभात खबर से जुड़ कर जनहित से जुड़ी पत्रकारिता कर रहे हैं. विकास, लोगों की समस्या, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्राइम से जुड़ी खबरों पर बेहतर कवरेज करते रहे हैं.

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