Deoghar news : चेक बाउंस के दोषी को सुनायी गयी एक साल की सजा

न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में चल रहे कंप्लेंट केस की सुनवाई पूरी गयी. इसके बाद नामजद आरोपित देवेंद्र कुमार को चेक बाउंस का दोषी पाकर एक साल की साधारण कैद की सजा सुनायी गयी.
विधि संवाददाता, देवघर . न्यायिक दंडाधिकारी स्वाति विजय उपाध्याय की अदालत में चल रहे कंप्लेंट केस की सुनवाई पूरी गयी. इसके बाद नामजद आरोपित देवेंद्र कुमार को चेक बाउंस का दोषी पाकर एक साल की साधारण कैद की सजा सुनायी गयी. इसके अलावा 21 लाख 69 हजार 16 रुपये रुपये मुआवजा राशि के तौर पर देने का आदेश दिया. इसमें चेक बाउंस की राशि 14 लाख 73 हजार 158 रुपये शामिल है. आदेशित राशि का भुगतान नहीं करने पर अलग से तीन माह की साधारण कैद की सजा काटनी होगी. सजा पाने वाला सिविल लाइन मोहल्ले नंदन पहाड़ रोड का रहने वाला है. यह मुकदमा तत्कालीन बौद्ध गया बिहार स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ मैनेजर सुनील कुमार सिन्हा ने तीन सितंबर 2019 को दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया था कि आरोपित ने ऋण पर वाहन लिया था और उसके एवज में 14.73 लाख रुपये का चेक दिया था. परिवादी ने उक्त चेक को बैंक में जमा किया, लेकिन कैश नहीं हुआ. वकालतन नोटिस देने के बाद भी पैसों का भुगतान नहीं करने पर कोर्ट में परिवाद दाखिल किया. इसमें परिवादी व बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनी और उपरोक्त फैसला सुनाया. ॰21 लाख 69 हजार 16 रुपये देने का आदेश
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By फाल्गुनी मारिक
विगत 32 वर्षों से प्रभात खबर में पत्रकारिता करते आ रहा हूं. विशेष तौर पर कोर्ट से संबंधित खबरों के अलावा श्रावणी विशेषांक -बिल्व पत्र में धार्मिक आलेख लेखन, दुर्गापूजा के अवसर पर निकाली गयी दुर्वाक्षत में धार्मिक लेख लिखने, सामयिक कॉलम कोर्ट कचहरी का चक्कर, क्राइम स्टोरी आदि लेखन का अनुभव है. साथ ही लोक भाषा खोरठा में कविता, कहानी लेखन का अनुभव है. झारखंड अधिविध परिषद रांची के वर्ग अष्टम के पाठ्यक्रम में तथा आचार्य विनोवा भावे विश्वविद्यालय में बीए की कक्षा के पाठ्यक्रम में कविता शामिल हो चुकी है. विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कविताएं, कहानियां व आलेखों का भी प्रकाशन हो चुका है.
प्रभात खबर में विगत 32 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव. विशेष तौर पर अदालत की खबरों पर पकड़ है. इसके अलावा विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं पर आलेख छपते रहा है. बिल्व पत्र श्रावणी विशेषांक में धार्मिक आलेख, सामयिक कॉलम- कोर्ट कचहरी का चक्कर, क्राइम स्टोरी आदि लेखन करते रहे हैं. लोक भाषा खोरठा की जानकारी है एवं इनकी कविता झारखंड अधिविध परिषद में वर्ग अष्टम तथा बिनोवा भावे विश्वविद्यालय में बीए पाठ्यक्रम में शामिल है.
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