मधुपुर. शहर के बाबन बीघा स्थित संवाद परिसर में शनिवार को धरती आबा क्रांतिवीर बिरसा मुंडा की जयंती सह झारखंड स्थापना दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया. इस अवसर पर धरती आबा बिरसा मुंडा की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया. मौके पर समाजकर्मी घनश्याम ने कहा कि बिरसा मुंडा का देश की आजादी के लिए दिए गए बलिदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है. बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को खूंटी जिला के उलिहातु ग्राम में एक किसान परिवार में हुआ था. बचपन से अंग्रेजों का अत्याचार को देखकर बिरसा मुंडा के मन में अंग्रेजों के प्रति विद्रोह की भावना जागी. भूमि अधिग्रहण कानून को लेकर अंग्रेजों के विरुद्ध जनजातीय विद्रोह उलगुलान प्रारंभ किया. जिसका नेतृत्व स्वयं बिरसा मुंडा कर रहे थे. जल, जंगल, जमीन की लड़ाई लड़ने वाले महान आदिवासी जन चेतना के लोकनायक बिरसा मुंडा के शौर्य बलिदान को कभी नहीं बुलाया जा सकता है. जल, जंगल, जमीन की रक्षा का संदेश आज भी प्रासंगिक है. मौके पर अबरार, सीमांत, विनोद, तुहीन, प्रदीप, विजय, सुशीला, ललिता, महानंद, महेश, अनूप, धर्मेंद्र, जावेद, सुभाष, अन्ना, पवन आदि मौजूद थे.
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