देवघर में साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़, तीन को न्यायिक हिरासत में भेजा गया, एक छूटा

Author Rupali das
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UK Transport Company Hacking:

Cyber Crime: देवघर साइबर थाना की विशेष टीम ने जंगल में छापेमारी कर साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया. इस दौरान 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इनमें से तीन ठगों को कोर्ट में पेश होने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. जबकि एक कोर्ट से छूट गया.

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Cyber Crime: देवघर साइबर थाना की विशेष टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर जंगल में एक साइबर अपराधियों के गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने मामले का खुलासा देवीपुर थाना क्षेत्र के पसारपुर गांव के पास जंगल में छापेमारी कर की है. इस कार्रवाई में चार साइबर आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया. इनमें से तीन को कोर्ट के निर्देश पर न्यायिक हिरासत में भेजा गया. वहीं, एक अन्य आरोपी कोर्ट से छूट गया.

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फर्जी लिंक भेजकर करते थे ठगी

घटना के संबंध में बताया गया कि गिरफ्तार सभी आरोपी फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को अपने झांसे में लेते थे. फिर, उनसे ठगी करते थे. इन पर आरोप है कि ये फर्जी क्रेडिट कार्ड अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि और कस्टमर केयर अधिकारी बनकर लोगों से केवाईसी अपडेट कराने, पीएम किसान योजना और एसबीआई क्रेडिट कार्ड से जुड़ा फर्जी लिंक भेजकर साइबर ठगी करते थे.

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साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज

इस संबंध में साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी, जिसमें मारगोमुंडा थाना क्षेत्र के दुधानी निवासी फिरदौस अंसारी, पाथरौल थाना क्षेत्र के गोनेया निवासी पंकज कुमार दास, सारवां थाना क्षेत्र के चरघरा निवासी श्रीकांत दास व करौं थाना क्षेत्र के जांत निवासी मुन्ना कुमार दास को आरोपी बनाया गया है. पुलिस ने छापेमारी के दौरान इन लोगों के पास से चार मोबाइल सहित चार सिम कार्ड और दो प्रतिबिंब सिम बरामद किये हैं.

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मुनाफे का लालच देकर फंसाया

इधर, देवघर के बैजनाथपुर निवासी एक युवक को अज्ञात आरोपी ने ट्रेडिंग में इंवेस्ट करने पर अच्छा मुनाफे मिलने का झांसा दिया. फिर, उससे 10 हजार रुपये की ठगी कर ली. इस संबंध में गुरुवार को पीड़ित ने मामले की शिकायत साइबर थाना में दी.

इसे लेकर बताया गया कि सोशल मीडिया साइट में ट्रेडिंग में इंवेस्टमेंट का विज्ञापन देख पीड़ित ने ठगों से संपर्क किया. इसके बाद साइबर अपराधियों ने उसे अच्छे मुनाफे का प्रलोभन देकर एक ग्रुप से जोड़ा. इसके बाद पीड़ित ने आरोपियों को कई बार में 10 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिया. लेकिन उसे मुनाफे की राशि नहीं मिली. इसके बाद उसे ठगी की आशंका हुई, तो वह शिकायत करने साइबर थाना पहुंचा.

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